ऐश्वर्या राय के साथ एक मुलाक़ात

  • 26 जून 2009

बीबीसी हिंदी सेवा के विशेष कार्यक्रम 'एक मुलाक़ात' में हम भारत के जाने-माने लोगों की ज़िंदगी के अनछुए पहलुओं से आपको अवगत कराते हैं.

Image caption ऐश्वर्या डाइटिंग नहीं करती हैं और बहुत ज़्यादा एक्सरसाइज भी नहीं करती है

इस हफ़्ते हमारे शो में एक बहुत ख़ास मेहमान हैं जो न सिर्फ़ देशी की बल्कि पूरी दुनिया की सबसे ख़ूबसूरत शख़्सियतों में शुमार की जाती हैं. वह जितनी ख़ूबसूरत हैं उतनी ही दिमाग वाली हैं. जी हाँ, हम बात कर रहे हैं पूर्व विश्व सुंदरी और बॉलीवुड की नायिका ऐश्वर्या राय की.

जैसे मैंने आपकी तारीफ़ की वैसे ही बहुत सारे लोगों ने की होगी. किसी ने गुलाब का फूल देकर घुटनों के बल बैठकर कहा होगा, तो किसी ने ऐसे ही की होगी. तीन सबसे पसंदीदा तारीफ़ बता दीजिए.

सबसे अच्छी तारीफ़ को शब्दों में नहीं बता सकती. इतने सालों से लोगों का प्यार और आशीर्वाद बना हुआ है यही सबसे बड़ी तारीफ़ है. लोग मुझे और मेरे परिवार को इतना प्यार करते हैं कि अपने निजी जीवन और परिवार का हिस्सा मानते हैं. हम जहाँ भी जाते हैं हर जगह लोगों का भरपूर प्यार मिलता है, यही सबसे बड़ी तारीफ़ है.

ये तो दार्शनिक पहलू है जिसे हमने मान लिया लेकिन कभी किसी ने कुछ ऐसा कहा हो जो दिल को भा गया हो?

यही हमारी ज़िंदगी की सच्चाई है.जहाँ भी गई हूँ वहीं लोगों ने जी-जान से प्यार किया है. मेरे ऊपर लोगों ने इतनी साइटें बनाई हैं, मुझे वोट दे-देकर इतने ख़िताब दिलवाए हैं.मुझे उन सबका एहसान मानना ही होगा. मैं कभी-कभी यह देखकर आश्चर्यचकित रह जाती हूँ कि कैसे लोग निश्छल भाव से अपनी भावनाओं का इज़हार करते हैं.

आप अभी तक इतनी ख़ूबसूरत बनी हुई हैं, इसका क्या राज़ है. कुछ खाती भी हैं या नहीं?

जहाँ तक खाने का सवाल है मैं इस मामले में बहुत शौकीन हूँ. काम के हिसाब से मेरा भी वज़न घटता-बढ़ता रहता है जिसकी कभी आप प्रशंसा करते हैं तो कभी तरह-तरह के अनुमान लगाते हैं. मैं कभी डाइट नहीं करती और बहुत ज़्यादा एक्सरसाइज भी नहीं करती. केवल ‘धूम-2’ फ़िल्म के लिए एक महीने की ट्रेनिंग ली थी.

आप अभी कह रही थीं कि सब लोग आपको अपने परिवार का हिस्सा मानते हैं, लोग इतना चाहते हैं तो क्या इसे लेकर कभी कोई ज़िम्मेदारी भी महसूस होती है?

देखिए सबकी नज़रों के सामने रहने से ये सब होता ही है. मेरे सीनियरों ने पहले ही बताया था कि इस करियर में ये सब होता ही है. लेकिन ईमानदारी से कहूँ तो मैं उतनी ही ज़िम्मेदार हूँ जितनी बेटी होने के नाते अपने पिता के लिए हूँ. मैं कोई छवि बनाने की कोशिश नहीं कर रही हूँ, दरअसल इसी तरह पालन-पोषण ही हुआ है.

‘जोधा-अकबर’ फ़िल्म में आपने काम किया है. एक ऐसे ऐतिहासिक किरदार की भूमिका निभाई है जिसके बारे में बहुत कुछ कहा गया है तो क्या आपने भी इसके लिए कुछ रिसर्च की थी या सबकुछ निर्देशक पर ही छोड़ दिया था?

सबकुछ निर्देशक पर छोड़ने की बात नहीं है. मैंने देखा कि आशुतोष ने इसके लिए पूरी रिसर्च की है. आशुतोष ने ख़ुद कहा था कि उन्होंने चार साल रिसर्च करने के बाद ही फ़िल्म के लिए टीम बनाने पर काम शुरू किया. इससे हमलोगों का काम आसान हो गया.

एक अभिनेत्री के तौर पर मैं मानती हूँ कि यह सुनने में बहुत अच्छा लगता है कि मैंने भी रिसर्च की है. इसके लिए लाइब्रेरी गई और किताबें पढ़ीं, लेकिन यह जानना ज़रूरी है कि जब फ़िल्म में एक टीम साथ आ जाती है तो हम खु़द की फ़िल्म नहीं बना रहे होते हैं बल्कि निर्देशक की फ़िल्म बना रहे होते हैं. इसलिए मेरा मानना है कि हमें निर्देशक की रिसर्च और सोच को ही मानना चाहिए.

अगर निर्देशक चाहेंगे तो मैं किरदार के लिए ज़रूर रिसर्च करूंगी लेकिन यहाँ ये सब काम आशुतोष ने किया और सारे ऐतिहासिक तथ्यों के लिए वही ज़िम्मेदार हैं. उन्होंने पूरी टीम को शुरू में ही बता दिया था कि यह फ़िल्म इतिहास के बारे में नहीं है. हम इस फ़िल्म के ज़रिए इतिहास को बताने की कोशिश नहीं कर रहे हैं.

आशुतोष इस फ़िल्म के माध्यम से जोधा और अकबर की अनकही प्रेम कहानी के बारे में बताने की कोशिश कर रहे हैं जिसका किताबों में जिक्र नहीं है. इसलिए वह कह भी रहे हैं कि यह एक रोमांटिक कहानी है, न कि ऐतिहासिक.

जोधा का रोल करना आसान था कि कुछ दबाव भी रहा?

इसमें पूरी टीम का साथ रहा है, कोई दबाव नहीं था. सबसे अच्छी बात रही इसका राजस्थान में शूटिंग होना. चारों ओर महल जैसे वातावरण की मौज़ूदगी और इसमें हम जब परिधान पहन लेते थे तो फिर लगता था कि इतिहास में पहुँच गए.

मैं इसका सारा श्रेय डायरेक्टर और तकनीकी टीम को दूँगी. शहर से दूर बनाए गए आगरा और आमेर के किला के बीच जहाँ न तो गाड़ियों की आवाज़ थी और न ही पर्यटक थे तो ऐसा लग रहा था कि सही में दूसरी दुनिया में पहुँच गए हैं. इससे पूरी टीम का काम आसान हो गया.

‘धूम-2’ में आप काफ़ी फ़िट दिखी हैं और कुछ-कुछ एक्शन जैसा भी किया है. ‘जोधा अकबर’ के पोस्टरों में भी तलवार लकेर आप हाथियों पर बैठी दिख रही हैं.आप तलवार चलाने या एक्शन को लेकर असहज होती हैं या आराम से कर लेती हैं?

देखिए बतौर कलाकार मैं बहुत लोभी हूँ. मैं सौभग्यशाली हूँ कि करियर में इतने अलग-अलग तरह के किरदार मिले हैं. ऐसी फ़िल्में रोज नहीं बनती और जब एक डायरेक्टर ने यह चुनौती ली है तो काबिल-ए-तारीफ़ है. हाथी पर बैठने की बात है तो इसमें कोई परेशानी नहीं हुई. आशुतोष अक्सर मुझसे कहते थे कि तुम इसपर एकदम नैचुरल लगती हो.

जहाँ तक तलवारबाजी की बात है तो जब मैंने ‘लास्ट लीजेंड’ की थी, उस वक़्त भी फ़िल्म के डायरेक्टर ने चाहा था कि मैं इसकी ट्रेनिंग लूँ लेकिन हमलोग एक के बाद एक फ़िल्में करते हैं और समय काफ़ी कम रहता है. अंत में मैं दो-तीन दिन के लिए गई थी तो फ़ाइट मास्टर ने कहा कि नृत्य की पृष्ठभूमि होने के कारण आप इसे आराम से सीख गईं. तब मुझे काफ़ी मज़ा आया था.

Image caption ऐश्वर्या ने पाँच साल तक भारतनाट्यम और डेढ़ साल तक लोकनृत्य का प्रशिक्षण लिया है

इस फ़िल्म में ऋतिक के लिए ज़्यादा संभावनाएं हैं क्योंकि आख़िरकार वो राजा की भूमिका निभा रहे हैं. मेरे हिस्से बहुत कम तलबारबाजी आई है लेकिन जितनी भी की है उसमें बहुत मज़ा आया. ‘धूम-2’ एकदम अलग आज की फ़िल्म थी. इस फ़िल्म की स्क्रिप्ट में भी एक-दो ऐसे सीक्वेंस थे जिसे हम अंत में कर नहीं सके. लेकिन मेरी इच्छा थी कि ये रहते क्योंकि मैं एक्शन करना चाहती थी.

इस तरह के किरदार मधुबाला, मीना कुमारी और हेमा मालिनी जैसे बड़ी स्टारों ने निभाए हैं, तो क्या कभी ये दबाव रहा कि उनसे तुलना होगी.

मैं इस तरह के दबाव में नहीं आती. वैसे भी मेरे बारे में इतनी बातें हो चुकी हैं कि मुझे इसकी आदत हो गई है और अब मैं अपने ऊपर इन सब चीज़ों को हावी नहीं होने देती. मैं एक अभिनेत्री हूँ और डायरेक्टर ने मुझे किसी किरदार के लिए चुना है तो मेरा काम उसे निभाना है. तुलना की बात मेरे वश में नहीं है ये सब आपलोग करते हैं. जिसे हम कभी-कभी सुनते हैं और कभी-कभी नहीं सुनते.

ये बताइए कि आपने अभी तक जितनी फ़िल्में की हैं उनमें आपका मनपसंद रोल कौन सा है?

यह बहुत ही मुश्किल सवाल है. हर अनुभव अलग रहा है और मेरे लिए ये बात सबसे महत्वपूर्ण है कि मुझे इतने अलग-अलग मौक़े मिले. मैं प्रशिक्षित अभिनेत्री नहीं थी और मेरे परिवार की पृष्ठभूमि भी फ़िल्म की नहीं थी. इसलिए मैंने इतना कुछ सोचा भी नहीं था, बस एक उम्मीद थी और मुझे ख़ुशी है कि यह सफ़र आज भी जारी है.

चलिए मैं बताता हूँ कि आपकी कौन सी फ़िल्में सबसे अच्छी रहीं, आप सिर्फ़ ये बता दीजिए कि आप इससे सहमत हैं या नहीं. मैंने आपकी ऋतुपर्णो घोष वाली फ़िल्में नहीं देखी हैं. इसके अलावा अगर बात करूं तो हम दिल दे चुके सनम, ताल, देवदास, धूम और गुरू.

मुझे भी ये सारी फ़िल्में पसंद हैं लेकिन कोई दो या तीन सबसे पसंदीदा बताना मुश्किल है.

अभिषेक को छोड़ दिया जाए तो आप किसके साथ काम करने में सबसे सहज रहती हैं?

निश्चित रूप से अभिषेक के साथ काम करना मुझे काफ़ी पसंद है. वास्तविक जीवन में हम दोनों के क़रीब आने से पहले भी मैंने अभिषेक के साथ कई फ़िल्में कीं. इसके अलावा ऋतिक के साथ काम करने में भी बहुत मज़ा आता है. बहुत पहले मैंने ऋतिक के साथ एक विज्ञापन किया था और उसके बाद अफ़वाह भी उड़ी थी. इसके बाद मैं उनसे विधु विनोद चोपड़ा के यहाँ मिली.

उन्होंने मुझसे ‘मिशन कश्मीर’ के लिए बात की थी लेकिन डेट्स न होने की वजह से नहीं कर पाई. तब मैंने पाया था कि ऋतिक काम को लेकर कितने उत्साही हैं. आज देखिए वह कितना अच्छा काम कर रहे हैं. बतौर दर्शक और सहयोगी उनके काम को देखकर ख़ुशी होती है. मुझे ख़ुशी है कि ऋतिक के साथ मेरी दोनों फ़िल्में बिल्कुल अलग तरह की हैं.

क्या ऐसा है कि धूम-2 से ऋतिक ने नई पहचान बनाई? मेरे एक सहयोगी का कहना है कि पहले ऋतिक बच्चों के हीरो थे लेकिन ‘धूम-2’ के बाद लड़कियों के हीरो हो गए?

मैंने पहले भी कहा कि आकलन करना आप लोगों का काम है. लेकिन अगर कोई अभिनेता नई पहचान बनाता है तो यह अच्छी और प्रशंसा की बात है. आख़िरकार यह हमारे काम का हिस्सा है.

जब मॉडलिंग और मिस वर्ल्ड बनने के बाद फ़िल्मों आईं तो बहुत संघर्ष रहा या चीज़ें आसान रहीं?

शुरू से अभी तक मिला-जुला रहा है. बातें बहुत बनती हैं. मैं इंडस्ट्री और निर्देशकों की बहुत शुक्रगुजार हूँ कि मुझ पर शुरू से विश्वास जताया. काम के मामले में हमारे पास बहुत ही समर्पित, जुनूनी और रचनाशील निर्देशक हैं. मैं आभारी हूँ कि इन सभी लोगों ने मेरे लिए किरदार सोचे और मुझे मौक़ा दिया.

अलग-अलग तरह की फ़िल्मों में काम करके मेरा अब तक का सफ़र बहुत अच्छा रहा है और मैं इससे बहुत ख़ुश हूँ. कड़ी मेहनत तो सबको करनी पड़ती है. अगर आज भी मैं अपने ससुर अमिताभ जी से बात करती हूँ तो प्रेरणा मिलती है.

आप बहुत अच्छा नृत्य करती हैं, सीखा है कहीं से या अपने आप आ गया?

स्कूल के दिनों में पाँच साल मैंने भारतनाट्यम और डेढ़ साल लोकनृत्य का प्रशिक्षण लिया था. मुझे नृत्य करना बहुत पसंद है और औपचारिक प्रशिक्षण लेने की वजह से स्क्रीन पर इसका असर दिखता है.

कहते हैं कि अभिनेताओं में ऋतिक सबसे अच्छे डान्सर हैं और अभिनेत्रियों में माधुरी दीक्षित की इतनी बात होती है. आपने दोनों के साथ डान्स किया है, कैसा रहा?

बहुत मज़ेदार रहा. हमलोगों के बीच किसी तरह की प्रतिस्पर्धा नहीं थी और कोई तुलना नहीं हो रही थी.

कौन-सी फ़िल्म के बाद आपको लगा कि अब मैं स्थापित हो गई हूँ?

यह किसी भी फ़िल्म के बाद नहीं लगा. हर नई फ़िल्म की शुरुआत में आप चिंतित और नर्वस रहते हैं. पहले मुझे लगता था कि यह सिर्फ़ मेरे साथ है लेकिन बाद मैंने साथी कलाकारों से बात की और अब अपने परिवार के लोगों से बात करती हूँ तो पता चला कि ऐसा अनुभव सबको होता है. और यह सिर्फ़ अभिनेताओं के साथ नहीं होता, निर्देशकों के साथ भी होता है और तकनीशियनों के साथ भी.

यह बात सही है लेकिन जैसे पहले फ़्लॉप फ़िल्में आती हैं और फिर फ़िल्में हिट होने लगती हैं, तो थोड़ा आराम तो मिलता है कि स्थापित हो रहे हैं.

हम फ़िल्मों में काम कर रहे हैं और हिट या फ़्लॉप हमारे हाथ में नहीं है. हम कलाकार है और किसी के पास भी न इसका जवाब नहीं है और न ही तय फ़ॉर्मूला.

आपने कहा कि डान्स के दौरान प्रतिस्पर्धा नहीं होती लेकिन क्या यह संभव है कि दो शीर्ष कलाकार एक-दूसरे के दोस्त हों?

मुझे याद है कि ‘देवदास’ के उस गाने की जब शूटिंग हो रही थी तो माधुरी दीक्षित सरोज जी से कह रही थीं कि लोग विश्वास नहीं करेंगे कि ऐसा कभी हो सकता है. लेकिन हम लोगों ने इस गाने में इतना मज़ा किया कि मैं आज भी संजय लीला भंसाली से कहती हूँ कि मुझे उस गाने के निर्माण का वीडियो दें.

मैंने माधुरी की फ़िल्म और डान्स को हमेशा पसंद किया है. मैं फ़िल्मों में जब आई भी नहीं थी तब से उनकी प्रशंसक रही हूँ. सिनेमा के लिए उनका शानदार योगदान रहा है. मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि पर्दे पर माधुरी के साथ काम करने का मौक़ा मिलेगा लेकिन जब यह संयोग हुआ तो मुझे बहुत ख़शी हुई.

जब आपने पर्दे पर देखा तो कैसा लगा? आपने उनके मुक़ाबले का डान्स किया, बेहतर किया या फिर कमज़ोर रहा?

मैं यह सब नहीं सोचती. मुझे तो इस बात की ख़ुशी है कि मैंने उनके साथ पर्दे पर काम किया और यह सब पर्दे पर लंबे समय तक हमेशा रहेगा.

आपने कहा था कि खाने की शौकीन हैं, तो क्या खाना पसंद है?

घर का खाना.

छुट्टियां बिताने के लिए सबसे पसंदीदा जगह?

घर. काम के चलते इतना बाहर रहना पड़ता है कि घर पहुँचकर काफ़ी सुकून मिलता है और लगता है कि छुट्टियाँ शुरू हो गईं.

फ़िल्म इंडस्ट्री के बारे में कौन सी बात आपको सबसे ज़्यादा पसंद है?

हम एक बड़े परिवार का हिस्सा हैं. ज़्यादातर अभिनेताओं के बारे में ही बात होती है कि वो लोग फ़िल्म की शूटिंग के लिए कई-कई दिन घर से बाहर रहते हैं लेकिन ऐसा यूनिट के जुड़े हर किसी के साथ होता है. इसलिए हर फ़िल्म में एक परिवार जैसा बन जाता है और अगली फ़िल्म में नया परिवार बन जाता है. दुर्भाग्य से किसी के साथ कोई अनहोनी हो जाती है तो पूरी यूनिट साथ होती है. इस सबके चलते बहुत ख़ास अनुभव होता है.

मेरी शादी से पहले शूटिंग के अंतिम दिन जब आशुतोष ने सेट पर यह घोषणा की कि आज ऐश्वर्या जा रही हैं और जब आएंगी तब मिसेज बच्चन बन चुकी होंगी. पूरी यूनिट के लोग वहाँ जमा थे और मैं भावुक हो गई. ऐसा लग रहा था कि हर कोई मुझे आशीर्वाद दे रहा है या मेरे लिए दुआ माँग रहा है. मुझे लगा कि जैसे घर पर मेरा परिवार है, वैसे ही यह भी एक परिवार है.

अभिषेक बच्चन के अलावा आप घर में किसके सबसे नज़दीक हैं?

इस सवाल का जवाब मैं कभी नहीं दे पाई. शादी से पहले भी लोग पूछते थे कि माँ के ज़्यादा क़रीब हैं या पिताजी के. इस सवाल का कोई जवाब नहीं हो सकता है. हमारे परिवार में सबके बीच बहुत ज़्यादा प्यार है.

जया बच्चन सास के रूप में कैसी हैं?

जब मैं कहती हैं कि शादी के बाद मुझे सास-ससुर के रूप में माँ-बाप मिले हैं तो यही सच्चाई है.

लगातार लोग परिवार के बारे में सवाल पूछते हैं तो कैसा लगता है?

हमारे परिवार से लोग प्यार करते हैं, इसलिए उनकी जिज्ञासाएं भी हैं. आप सवालों के ज़रिए लोगों की जिज्ञासा शांत करने की कोशिश करते हैं लेकिन कई बार सवालों का जवाब देना मुश्किल हो जाता है. कई बार भावनाओं को वाक्य में इजहार करना कठिन हो जाता है.

अमिताभ और जया बच्चन की ज़बरदस्त फ़िल्मी जोड़ी थी. आपको क्या लगता है अभिषेक और आपकी जोड़ी ऐसी ही होगी या फिर ज़्यादा अलग-अलग काम करने का इरादा है?

देखिए परिवार में तुलना करने का तो कोई सवाल ही नहीं है. साथी कलाकार के रूप मैंने और अभिषेक ने हमेशा काम करना पसंद किया है. अब तो दोनों हो जाएगा काम के काम हो जाएंगे और साथ समय बिताने का मौक़ा भी मिल जाएगा.

हम दो फ़िल्में साथ करने वाले हैं जिसकी घोषणा बाद में होगी. हमें इस बात की ख़ुशी है कि साथ काम करने का मौक़ा मिलेगा. अभिषेक जैसे अच्छे अभिनेता के साथ काम करने का अनुभव हमेशा मज़ेदार रहता है.

शादी से पहले और अब में कुछ अलग लगता है?

देखिए आगे बढ़ना जीवन का हिस्सा है. क्या बदला है और क्या अलग है, ये सब आकलन करना आपलोगों का काम है.

शादी से क्या सीखते हैं?

शादी के बाद सिर्फ़ आपका जीवन नहीं रह जाता है, परिवार बन जाता है.'मैं' ख़त्म हो जाता है और उसकी ज़गह ‘हम’ ले लेता है. रिश्तों में समर्पण आ जाता है.

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