शास्त्रीय गायिका गंगूबाई का निधन

गंगूबाई हंगल
Image caption संघर्ष और परिश्रम से भरे जीवन में पांच दशकों तक गंगूबाई अर्स पर छाई रहीं

भारतीय शास्त्रीय संगीत की सुप्रसिद्ध गायिका गंगूबाई हंगल का जुलाई 2009 में निधन हो गया. वे 97 वर्ष की थीं और

हृदय रोग से पीड़ित थीं.

उन्होंने 50 साल से अधिक समय तक संगीत की सेवा की और इस दौरान भारतीय शास्त्रीय संगीत को नई ऊँचाई तक पहुँचाया.

वर्ष 1913 में कर्नाटक के एक गाँव हंगल में जन्मी गंगूबाई को उनकी माँ ने सुर की शुरूआती शिक्षा दी थी. बाद में उन्होंने संगीत की शिक्षा 'किराना घराने' के गुरू सवाई गंधर्व से ली.

गंगूबाई ने अपनी कला के प्रदर्शन की शुरुआत किशोरावस्था में मुंबई में स्थानीय समारोहों और गणेश उत्सवों में गायकी से की थी.

शास्त्रीय संगीत को बेहतरीन योगदान के लिए उन्हें अनेक सम्मान और पुरस्कार मिले जिनमें पद्म भूषण, तानसेन पुरस्कार, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्रमुख हैं.

असाधारण गायिका

गंगूबाई अपने ख़ास अंदाज़ और प्रस्तुति के लिए जानी जाती रहेंगी. शास्त्रीय गायन के मील के कुछ प्रमुख स्तंभों की जब चर्चा होगी तो उनका नाम पहली श्रेणी में रखा जाएगा.

जिसने भी उन्हें एक बार गाते सुना होगा वो पल उसे हमेशा साथ रहेगा. छोटी कद काठी की गंगूबाई की आवाज इतनी वजनदार और ठहरी हुई थी कि एक एक स्वर और कान पर हाथ रखकर खीची गई तान आसमान को भेद देते थे.

किराना घराना के ही जाने-माने गायक पंडित छन्नूलाल मिश्र उन्हें याद करते हुए कहते है, "मुझे बहुत दुख है कि इतनी महान कलाकार गुजर गई. वे बहुत पुरानी कलाकार थी. उनकी गायकी का अंदाज बहुत बेहतरीन था. बहुत अलग..सबसे खास बात तो ये कि उनके गाने का और प्रस्तुति का तरीका बहुत गंभीर था. गंभीर औऱ मर्दाना आवाज मे वो गाती थी. उनको सुनते हुए ऐसा लगता था कि कोई पुरूष गा रहा है. उन्होंने बड़ी तपस्या की और इस मुकाम पर पहुँचीं".

आधे से अधिक सदी तक भारतीय संगीत को अपने अनूठे अंदाज़ और दम से धनी करती गंगूबाई हंगल का जन्म एक केवट के परिवार में हुआ था.

उनका कलाकार के रूप में सफ़र बहुत सारी चुनौतियो से भरा था.

अपनी आत्म कथा मे वे लिखती हैं कि किस तरह लोग उन्हें गानेवाली कह कर ताने मारा करते थे ...कैसे उन्होंने जातीय और लिंग बाधाओ को पार किया और किराना उस्ताद सवाई गंधर्व से हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की तालीम ली.

गंगूबाई हंगल की गायकी की कई खास बेमिसाल बातों मे से एक यह थी कि वे हर राग को धीरे धीरे खोलती थी... बिल्कुल, जैसे सुबह की हर किरण पर एक-एक पंखुंडी खुलती हो. बहुत स्थिरता और गहराई के साथ ..उनकी गायकी की धार रसिको को हमेशा कसक से भर देगी.

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