ये कॉमेडी नहीं आसान : राजपाल

राजपाल यादव
Image caption राजपाल यादव इस समय सबसे सफल हास्य अभिनेताओं में से हैं

रुपहले पर्दे पर आपको हँसा-हँसा लोटपोट करने वाले राजपाल यादव असल ज़िंदगी में गंभीर व्यक्ति हैं जो देश और समाज के बारे में काफ़ी सुलझे हुए विचार रखते हैं.

बीबीसी से राजपाल यादव की बातचीत में सवालों का सिलसिला तो ज़ाहिर है उनकी कॉमेडी से ही शुरु होना था और हुआ भी.

उम्मीद थी कि हल्का-फुल्का और गुदगुदाने वाला जवाब देंगे लेकिन उन्होंने कहना शुरु किया, "प्ले लाइफ़ बट डोन्ट प्ले विद लाइफ़...तो चाहे कॉमिक रोल हो या सिरियस, पहले आंखों और दिल में उतरना चाहिए और फिर जो उसकी मानसिकता है उसको प्ले करने में ईमानदारी होनी चाहिए."

राजपाल यादव ने पिछले दसेक सालों में अस्सी से ज़्यादा फ़िल्में की हैं और वो जल्द ही एन. चंद्रा की आने वाली फ़िल्म 'ये मेरा इंडिया' में भी दिखेंगे.

उन्होंने शुरुआत में 'शूल' में एक छोटा-सा रोल किया और बाद में राम गोपाल वर्मा की नज़र में आये तो 'जंगल' में सिप्पा नाम का किरदार निभाया, जिसकी काफ़ी सराहना भी हुई.

धीरे-धीरे उनका करियर परवान चढ़ा और 2002 के बाद तो वह हर साल कई-कई फ़िल्मों में नज़र आने लगे. ख़ासकर निर्देशक प्रियदर्शन की कई फ़िल्मों में उन्होंने दमदार किरदार निभाए.

अभिनय में सच्चाई

बीबीसी ने उनसे पूछा कि उन्हें किस तरह के किरदार निभाने में मज़ा आता है. उन्होंने कहा कि कॉमेडी तो ठीक है और वो लोगों को ख़ूब हँसाते भी रहेंगे. लेकिन फ़िल्मों में कॉमेडी करते-करते ये नहीं होना चाहिए कि वो सिनेमा को उठाकर सड़कों पर ले आएँ, और सड़क को उठाकर सिनेमा में. हर चीज़ की एक गरिमा होती है.

राजपाल यादव 'मैं माधुरी दीक्षित बनना चाहती हूं' और 'मैं, मेरी पत्नी और वो' जैसी फ़िल्मों में केंद्रीय किरदार की भूमिका में भी रहे हैं. श्याम बेनेगल की 'बोस-द फ़ॉरगॉटन हीरो' में उन्होंने भगतराम तलवार का किरदार बख़ूबी निभाया.

यादव कहते हैं कि चाहे उन्होंने फ़िल्म में दो सीन किए हों या मुख्य भूमिका निभाई हो लेकिन जब जब उनके किरदार में सच्चाई रही तब तब उन्हें दर्शकों से प्रशंसा मिली.

वो कहते हैं, "मैं ख़ुद एक दर्शक हूँ और मैं दर्शकों के बारे में एक चीज़ जानता हूँ, वो ये कि अगर आप सच्चे मन से अभिनय करेंगे तो चाहे देर से ही क्यों ना मिले लेकिन सफलता ज़रुर मिलेगी."

राजपाल यादव ने 'हंगामा', 'भूल-भूल्लैया', 'मुझसे शादी करोगी', 'चुपके-चुपके','फिर हेराफेरी' और 'बिल्लू' जैसी कई फ़िल्मों में अपनी कॉमेडी को लोहा मनवाया है.

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