खोई पहचान की तलाश

  • 31 अगस्त 2009
फ़िल्म मोहनदास - ऐक्ट्रैस सोनाली कुलकर्णी

क्या हो अगर कोई आपकी पहचान चुरा कर आपकी नौकरी हथिया ले? इस सवाल का जवाब तलाश रही है इस सप्ताह रिलीज़ होने वाली फ़िल्म मोहनदास.

मध्य प्रदेश के एक गांव में मोहनदास नाम का एक नौजवान ग़रीबी से संघर्ष करते हुए पढ़ाई में हमेशा अव्वल रहता है और अपनी शिक्षा के बल पर उसे नौकरी मिलती है.

लेकिन कई बार दफ़्तर के चक्कर लगाने के बावजूद वो अपनी नौकरी ज्वाइन नहीं कर पाता. आख़िरकार उसे पता चलता है कि उसकी जगह किसी और को नौकरी पर रख लिया गया है. और ये शख़्स मोहनदास के नाम और पहचान का इस्तेमाल कर रहा है.

फ़िल्म के निर्देशक हैं मज़हर कामरान. कामरान की ये पहली फ़िल्म है लेकिन इससे पहले बतौर कैमरामैन सत्या, कौन, तरकीब, झंकार बीट्स और मस्ती जैसी फ़िल्में कर चुके हैं.

पहचान

फ़िल्म के निर्देशक मज़हर कामरान बताते हैं कि ये सामाजिक सरोकारों की फ़िल्म है. उन्होंने कहा कि पूरी कहानी एक व्यंग्य है जिसमें एक व्यक्ति अपनी पहचान वापिस लेने कि लिए जद्दोजहद्द करता है.

कामरान ने बीबीसी को बताया ‘ मीडिया के बारे में इस फ़िल्म मे काफ़ी कंमेंट्स हैं. साथ ही न्यायपालिका की भूमिका पर भी फोकस किया गया है. ये कहानी समकालीन भारत पर एक टिप्पणी है.’

फ़िल्म में मोहनदास का किरदार निभा रहे नकुल वैद ने बीबीसी को बताया कि ये फ़िल्म मोहनदास की पहचान को वापिस लेने के संघर्ष के अलावा भी बहुत कुछ कहती है.

वैद ने कहा कि इस फ़िल्म में मुख्य पात्र के संघर्ष के साथ-साथ मौजूदा भारत की व्यवस्था पर तीख़ी टिप्पणियां हैं.

भारत और इंडिया

मोहनदास में सुशांत सिंह भी हैं जो एक नकारत्मक भूमिका निभा रहे हैं.

सुशांत सिंह गंभीरता से कहते हैं ‘ ये फ़िल्म एक बिंब है. गांव का भारत आज भी पूछ रहा है कि इंडिया शाइनिंग में हमारा हिस्सा कहां हैं? हमें तो आज तक नज़रअंदाज़ किया गया है. उम्मीद है कि ऐसी कुछ फ़िल्में बनती रहेंगी ताकि लोगों को याद आता रहे कि हमारे बहुत सारे भाई-बंधु पीछे छूट गए हैं और उन्हें अपने साथ लाना ज़रुरी है’

फ़िल्म को देश के बाहर कुछ समारोहों में सराहा भी गया है जिससे फ़िल्म के निर्देशक मज़हर कामरान भी हैरान हैं.

उन्होंने बीबीसी को बताया ‘दिल्ली में एक फ़्रांसीसी फ़िल्म समीक्षक ने ये फ़िल्म देखी और उन्हें ये बेहद पसंद आई. मैं भी हैरान था. वहीं से इस फ़िल्म की अंतर्राष्ट्रीय यात्रा शुरु हुई.’

कामरान ने बताया कि ये फ़िल्म ऑस्ट्रिया, स्विटज़रलैंड और अमेरिका के सैन फ्रैंसिस्को में दिखाई जा चुकी है.

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