दादा का सपना पूरा कर रहे हैं नील

नील नितिन मुकेश
Image caption नील नितिन मुकेश गायिकी में भी हाथ आज़मा रहे हैं

वर्ष 2007 में जॉनी गद्दार से बॉलीवुड में अपने सफ़र की शुरुआत करने वाले अभिनेता नील नितिन मुकेश अभिनय के ज़रिए अपने दादा और जाने-माने गायक मुकेश का सपना साकार कर रहे हैं.

नील नितिन की मानें तो उनके दादा चाहते थे कि वे फ़िल्मों में अभिनय करें. उनके सपने को पूरा करने के लिए ही उन्होंने अभिनय को अपना करियर चुना.

नील कहते हैं कि वे हर काम दिल से करते हैं. कोलकाता फ़ैशन वीक के सिलसिले में कोलकाता आए नील ने नरेंद्र की डिज़ाइनर ड्रेस पहन कर कैट वॉक किया.

इसी दौरान उन्होंने अपने फ़िल्मी सफ़र और भावी योजनाओं के बारे में बातचीत की. पेश है उसके प्रमुख अंश.

आपने गायिकी की अपनी खानदानी परंपरा को छोड़ कर अभिनय के क्षेत्र में उतरने का फ़ैसला क्यों किया?

मैं अपने दादाजी का सपना पूरा कर रहा हूँ. मैंने उनको देखा तो नहीं. लेकिन अपनी दादी से उनके बारे में काफ़ी कुछ सुना है.

दादी ने ही मुझे बताया था कि मेरे दादाजी ने भी करियर के शुरुआती दौर में अभिनय में हाथ आज़माया था. लेकिन वे अपने अभिनय से नहीं, बल्कि जादूई आवाज़ से मशहूर हुए.

वे चाहते थे कि मैं अभिनय करूँ. इसलिए मैंने अभिनय को अपना करियर बनाने का फ़ैसला किया.

तो क्या गायन से तौबा कर लेंगे?

नहीं, ऐसा नहीं है. मैंने अपने दादा या पिता की तरह गायक के तौर पर कोई प्रशिक्षण नहीं लिया है. लेकिन गायकी मुझे बेहद पसंद है. फ़िलहाल मैं अपनी फ़िल्म जेल को लेकर व्यस्त हूँ. हाल ही मैंने इसके एक गाने की रिकॉर्डिंग की है.

आपको रैंप पर चलना भी पसंद है?

हां, इसमें मुझे मज़ा आता है. डिज़ाइनर नरेंद्र ने करियर की शुरूआत से ही मेरा समर्थन किया है. यहाँ रैंप पर कैट वॉक के दौरान दर्शकों ने मुझे काफ़ी प्रोत्साहित किया.

इस शो के बाद एक लड़की ने मुझसे कहा कि वह मेरी ख़ातिर अपनी जान दे सकती है. नरेंद्र के डिज़ाइनर कपड़ों ने मुझे एक ख़ास पहचान दी है.

इस छोटे से सफ़र में दर्शकों की कोई ऐसी प्रतिक्रिया जो आपको याद हो?

हां, फ़िल्म न्यूयॉर्क रिलीज़ होने के बाद एक लड़की ने मुझे अपने ख़ून से पत्र लिखा था. यह अब तक मुझे मिली सबसे ख़तरनाक प्रतिक्रिया है.

आपके जीवन में कोई लड़की?

हाँ, मैं कॉलेज के दिनों से ही किसी को बेहद पसंद करता हूँ. मुझे उसकी ओर से हरी झंडी मिलने का इंतज़ार है.

उसके बाद ही मैं उनका नाम बताऊँगा. हाँ, इतना ज़रूर है कि वे फ़िल्म उद्योग से जुड़ी नहीं है.

अभिनय और गायन के अलावा फ़ुरसत में आप क्या करते हैं?

फोटोग्राफी. बहुत कम लोग जानते हैं कि मैंने फोटोग्राफी का विधिवत प्रशिक्षण लिया है.

मैंने किशोरावस्था में ही फोटोग्राफी सीखी थी. कबीर ख़ान और असीम मिश्रा के साथ न्यूयॉर्क में शूटिंग के दौरान भी मैंने उनसे फोटोग्राफी की तकनीकी गुर सीखे.

मैंने कोलकाता की काफ़ी तस्वीरें खींची है. जल्दी ही मैं यहाँ भारतीय जीवन और समाज पर एक प्रदर्शनी आयोजित करना चाहता हूँ.

चार्ल्स की शूटिंग से पहले आप नेपाल में चार्ल्स शोभराज से मिलना चाहते थे?

अभी इस बारे में कुछ कहना ठीक नहीं है. इसकी पटकथा पूरी नहीं हुई है. उसे पढ़ने के बाद ही मैं कोई फ़ैसला करूंगा. चार्ल्स से मुलाक़ात का फ़ैसला फ़िल्म के निर्माताओं को करना है.

आगे की क्या योजना है?

फ़िलहाल तो मैं जेल में व्यस्त हूँ. जल्दी ही अब्बास-मस्तान और केन घोष की फ़िल्मों पर काम शुरू हो जाएगा. यह साल तो व्यस्तता में ही गुज़रेगा.

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