पंकज आडवाणी के साथ एक मुलाक़ात

पंकज आडवाणी
Image caption पंकज कहते हैं कि उन्हें अंदाज़ा नहीं था कि वे इस मुक़ाम तक पहुँचेंगे

बीबीसी हिंदी सेवा के विशेष कार्यक्रम 'एक मुलाक़ात' में हम भारत के जाने-माने लोगों की ज़िंदगी के अनछुए पहलुओं से आपको अवगत कराते है. इस हफ़्ते हमारे मेहमान हैं वर्ल्ड बिलियर्ड्स चैंपियन पंकज आडवाणी.

पंकज साहब, आप युवा हैं, डैशिंग हैं, कामयाब हैं, दुनिया क़दमों पर और बिलियर्ड्स चैंपियन. कैसा लगता है?

बहुत अच्छा लगता है. ईश्वर ने मुझे बहुत कुछ दिया है. जब मैंने बिलियर्ड्स शुरू किया था तब अंदाज़ा भी नहीं था कि इस मुकाम तक पहुँच पाऊँगा. रही डैशिंग होने की बात तो ये महिला प्रशंसकों से पूछना पड़ेगा. लेकिन जब लोग आपकी प्रशंसा करते हैं और आपके बारे में अच्छी-अच्छी बातें करते हैं, तो अच्छा लगता है.

आपकी उम्र अभी महज़ 24 वर्ष है. इस उम्र में तो युवा कॉलेज खत्म कर नौकरी तलाश रहे होते हैं. और आपकी झोली में अब तक सात विश्व ख़िताब आ चुके हैं. इतनी कम उम्र में इतनी कामयाबी. कैसा लगता है?

मेरा मानना है कि इंसान जो भी हासिल करता है उसके ऊपर भी कोई है. हालाँकि मैं विश्व चैंपियनशिप जीत चुका हैं, तब भी मुझे लगता है कि मुझसे भी अच्छा खिलाड़ी कोई है. मैं हारता हूँ तब भी ज़्यादा निराश नहीं होता हूँ क्योंकि मुझे लगता है कि आगे और भी मौक़े मिलेंगे. थोड़ा किस्मत में भी यकीन रखता हूँ कि जो भी हमें मिलता है वो लिखा है.

आगे क्या-क्या लिखा है आपको मालूम है?

यही तो जीवन की ख़ासियत है कि आपको पता नहीं होता कि क्या होने वाला है. आपको पता नहीं कि ये ज़िंदगी आपको किस मोड़ पर लेकर जाएगी.

आप हमारे सवालों के जवाब इतने दार्शनिक अंदाज़ में दे रहे हैं. क्या आप वाकई ऐसा ही सोचते हैं?

मैं सच में ऐसा सोचता हूँ. जब भी मैं जीतता हूँ, तब मेरे मन में ऐसे ही ख़याल आते हैं. दरअसल, सबका अपना-अपना हुनर है. जब भी आपको मौक़ा मिलता है अपना हुनर दिखाने का तो अच्छा लगता है.

बीबीसी एक मुलाक़ात में आगे बढ़ें, अपनी पसंद का एक गाना बताएँ.

मुझे 'न्यूयॉर्क' फ़िल्म का गाना, ‘है जुनून, यारों जी भर के जी ले पल’ बहुत पसंद है.

पंकज आपके बचपन पर लौटते हैं. आपका बचपन कैसा था?

मेरा बचपन कुवैत में बीता. बचपन के चार साल वहीं बिताए. खाड़ी युद्ध तक हम कुवैत में ही थे. उसके बाद हम बैंगलौर आ गए. फिर मैं किस्मत पर लौटूँगा कि अगर हम अमरीका में छुट्टियां नहीं बिता रहे होते, खाड़ी युद्ध नहीं होता और हम बैंगलोर नहीं आते तो शायद आज ये सब कुछ नहीं होता. जब मैं छोटा था बहुत कम बातें किया करता था. जब खेलने लगा और लोगों से मिलने लगा तो ज़्यादा खुला.

जब बैंगलोर पहुँचे तो कैसा लगा. और बिलियर्ड्स कैसे शुरू किया?

दरअसल, तब मैं बच्चा था. इसलिए बहुत ज़्यादा फर्क़ मालूम नहीं था. रही बात बिलियर्ड्स की तो तब मैं 11 साल का था जब मैंने पहली बार ये खेल खेला. इसके बाद मैंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. हालाँकि पढ़ाई और खेल में संतुलन बिठाना मुश्किल था, लेकिन मेरे परिवार ने मुझे बहुत बढ़ावा दिया और उनकी वजह से ही मैं यहाँ तक पहुँचा हूँ.

मुझे याद है कि नब्बे के दशक में बिलियर्ड्स पार्लर की बाढ़ सी आई थी. लेकिन भारत में तो क्रिकेट का क्रेज़ रहा है. तो क्या आपका मन नहीं किया क्रिकेट खेलने का?

मैं टेनिस बॉल से क्रिकेट खेला करता था. जब पहली बार मैंने लेदर बॉल को देखा तो मुझे डर लगा और मैंने क्रिकेट छोड़ दिया. बिलियर्ड्स और स्नूकर बस किस्मत से ही मुझसे जुड़ गया.

बिलियर्ड्स महंगा खेल है. तो बचपन में आपको पैसे की दिक्कत नहीं थी, क्या इसीलिए बिलियर्ड्स खेलते रहे?

मैं इस बात से सहमत नहीं हूँ कि बिलियर्ड्स महंगा खेल है. आप गीत सेठी, विल्सन जोन्स या मुझे ही ले लीजिए. हम सब मध्यम वर्ग परिवार से ही आए हैं. मेरे ख़्याल से बिलियर्ड्स महंगा खेल नहीं है. हाँ सुविधाओं की समस्या हो सकती है. मैं तो ये कहूँगा कि बिलियर्ड्स और स्नूकर के मुक़ाबले बैडमिंटन कहीं महंगा खेल है.

बीबीसी एक मुलाक़ात में आगे बढ़ें, आपकी पसंद का गाना बताएँ?

‘किस्मत कनेक्शन’ का गाना ‘इज़ दिस लव’ मुझे अच्छा लगता है. जब मुझे कोई ख़ास मिलेगा तो मैं उन्हें ये सुनाना चाहूँगा. इसके अलावा ‘जग सारा, जग सारा’

बिलियर्ड्स भारत में बहुत लोकप्रिय नहीं है. फिर भी इस खेल में गीत सेठी, विल्सन जोन्स और आप खुद चैंपियन हैं. इसकी क्या वजह है?

मेरा मानना है कि इसकी वजह ये है कि हम भारतीय मानसिक रूप से बहुत मज़बूत हैं. हम लोग सोचते हैं कि जो भी होता है अच्छे के लिए होता है. अगर कुछ गलत होता भी है तो हम मानते हैं कि हमारा वक़्त भी आएगा. तो उन सब खेलों में जहां एकाग्रता और धैर्य की ज़रूरत होती है, वहाँ हम अच्छा प्रदर्शन करते हैं.

आपने इस खेल में पेशेवर बनने की कब सोची?

जब मैं 16 साल का था और वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप में सेमीफ़ाइनल में पहुँचा तो ख़्याल आया कि मैं तो ख़िताब भी जीत सकता हूँ. दो साल बाद ही जब फिर चीन में सीनियर वर्ल्ड स्नूकर चैंपियनशिप में मैंने जीत दर्ज की तो मेरा आत्मविश्वास बुलंदियों पर पहुँच गया और मुझे लगा कि मैं खेल को प्रोफेशनली खेल सकता हूँ.

आपने 2003 में 18 साल की उम्र में विश्व ख़िताब जीता था. इस जीत का जश्न आपने कैसे मनाया?

दरअसल, वो वक़्त दीवाली का था. 25 अक्टूबर 2003 का दिन था. तब कई अख़बारों ने लिखा था ‘पंकज का देश को दीवाली का तोहफा’. मुझे बहुत अच्छा लगा कि इस जीत को लोग इतनी तवज्ज़ो दे रहे हैं. वो जीत इस मायने में भी ख़ास थी कि मैंने फ़ाइनल में पाकिस्तानी प्रतिद्वंद्वी को हराया था.

आपके परिवारवालों ने कभी आपके खेल का विरोध किया?

मैंने जब बिलियर्ड्स शुरू किया तो शुरू में मेरी मां थोड़ी चिंतित थी. लेकिन जब उन्होंने देखा कि बिलियर्ड्स को लेकर मैं इस कदर गंभीर हूँ. तो उन्होंने कभी मुझसे सवाल नहीं किए मैं कि खेल को इतना वक़्त क्यों दे रहा हूँ. तो परिवार का समर्थन मेरे लिए बहुत अहम रहा.

इतनी कामयाबियों के बाद अब आप जब किसी टूर्नामेंट में उतरते हैं तो क्या किसी तरह का दबाव रहता है?

बेशक, उम्मीदें तो रहती ही हैं. लेकिन ये उम्मीदें मुझे खुद से होती हैं. जब मैं खेलने के लिए जाता हूँ तो मैं ये नहीं सोचता कि लोगों को मुझसे क्या उम्मीदें हैं. मैं मानता हूँ कि अगर मैं इस टूर्नामेंट में अपनी तैयारियों का 80 फ़ीसदी प्रदर्शन भी कर पाया तो अच्छा होगा. अगर जीत मिली तो मैं इसे बोनस के रूप में लेता हूँ.

और हार को किस रूप में लेते हैं?

हार-जीत तो सिक्के के दो पहलू हैं. जब आप हारते हैं तब भी आपको कुछ सीखने को मिलता है. आप ये जानने की कोशिश करते हैं कि कहाँ कमी रह गई. तो हार-जीत के अपने-अपने नफ़ा नुक़सान हैं.

बड़े मैच से पहले खुद को कैसे तैयार करते हैं?

ये वक़्त बहुत अहम होता है. फ़ाइनल मुक़ाबले से पहले आप क्या सोच रहे होते हैं, ये बहुत मायने रखता है. मैं कोशिश करता हूँ कि खेल के बारे में इतना न सोचूँ. दोस्तों या खिलाड़ियों से दूसरी चीज़ों पर बातें करता हूँ. बहुत सोचने से आप पर दबाव बनता है और आपका प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है.

मैं कोशिश करता हूँ कि खेल के बारे में सकारात्मक सोचूँ. मैं अपने दिमाग में इसे रख लेता हूँ.

इतनी कामयाबी और शोहरत के बाद भी क्या कभी दिमाग में आता है कि इस देश में तो क्रिकेट ही सब कुछ है. कुछ जलन होती है?

जलन तो नहीं. लेकिन मेरा मानना है कि दूसरे खेल संघों को बीसीसीआई से सीखना चाहिए कि खेलों को कैसे लोकप्रिय करना चाहिए. प्रायोजक कैसे ढूँढे जाएँ, टेलीविज़न कवरेज कैसे मिले, ये सब सीखने की ज़रूरत है. बीसीसीआई ने क्रिकेट को काफ़ी प्रोत्साहित और लोकप्रिय किया है.

जहाँ तक प्रदर्शन का सवाल है तो मेरे ख़्याल से निशानेबाज़ी, मुक्केबाज़ी, बैडमिंटन, टेनिस, बिलियर्ड्स में खिलाड़ी इस समय क्रिकेट से अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं.

कुछ क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी, रॉबिन उथप्पा तो आपके दोस्त भी हैं. इनसे क्या गपशप होती है?

इनके साथ मेरे बहुत अच्छे दोस्ताना संबंध हैं. महेंद्र सिंह धोनी जब बैंगलोर आते हैं तो उनसे मुलाक़ात होती है. उथप्पा मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं. उन्होंने मानसिक रूप में मुझे बहुत सहारा भी दिया है. हम दोनों एक-दूसरे को समझते हैं. हम लोग कोशिश करते हैं कि खेल के अलावा भी दूसरे मुद्दों पर चर्चा करें.

इंटरव्यू के शुरू में आपने कहा था कि मैं कितना डैशिंग हूँ इस बारे में तो महिला प्रशंसक ही बता सकती हैं. लेकिन आजकल की लड़कियाँ तो आसानी से इजहार कर देती हैं?

हाँ कभी-कभी लड़कियाँ आपको मिलती हैं और कहती हैं कि मैं अच्छा लग रहा हूँ. लेकिन उन्हें पता रहता है कि मेरी प्राथमिकता क्या है. मैं खेल पर ज़्यादा ध्यान देता हूँ.

कहने का मतलब ये है कि एक खिलाड़ी या सेलेब्रिटी के लिए ये जानना बहुत ज़रूरी है कि कौन आपके स्टेटस की वजह से आपके साथ है या फिर कौन सिर्फ़ मेरे ख़ातिर मेरे साथ है. ये फर्क जानना मेरे लिए बहुत मुश्किल है.

बीबीसी एक मुलाक़ात में आगे बढ़ें, आपकी पसंद का गाना?

'दिल बोले हड़िप्पा' का गाना मुझे बहुत पसंद है. इसके अलावा 'बिल्लू बार्बर' का गाना ‘तू बेबी बड़ी फिट-फिट’ भी अच्छा लगता है.

बिल्लू बार्बर के इस गाने में दीपिका पादुकोण है. बैंगलोर की ही है वो भी?

हाँ वो यहीं की हैं. मैं उनसे एक बार मिल चुका हूँ. मुझे थोड़ा कॉम्लैक्स मिला. क्योंकि वो मुझसे लंबी थी और ज़्यादा बुरा इसलिए भी लगा कि लंबी होने के बावजूद उन्होंने हील भी पहन रखी थी. तो सिर्फ़ हाय-बाय ही हुई. ये बात तब की है जब वो मॉडल थी. इसके बाद वो मुंबई चल गई और स्टार बन गई.

तो कम उम्र में ज़्यादा कामयाबी से क्या ये भी होता है कि समय से पहले ज़्यादा अक्ल भी आ जाती है. आपकी मासूमियत वक्त से पहले चली जाती है?

मैं आपसे सहमत हूँ. कम उम्र में ही ज़्यादा परिपक्व हो गया हूँ. जिन खिलाड़ियों के साथ मैं खेल रहा हूँ वो 30-35 साल के हैं. तो उनके साथ रहने से मैं वक़्त से पहले परिपक्व हो गया हूँ.

अच्छा पंकज ये बताएँ. हम बिलियर्ड्स चैंपियन पंकज को तो जानते हैं, लेकिन एक बेटे, भाई और व्यक्ति के रूप में कैसे हैं आप?

मेरी राशि सिंह है. मैं जब लोगों को ये बताता हूँ तो वे कहते हैं कि आप अपनी राशि के हिसाब से सही हैं. मैं जिद्दी हूँ. जीत को लेकर मेरी भूख है. मुझे लगता है कि खिलाड़ी में किलर इंस्टिंक्ट का होना बहुत ज़रूरी है.

आपका पसंदीदा शौक क्या हैं?

जब भी टाइम मिलता है मैं गाने सुनना पसंद करता हूँ. इसके अलावा मुझे फ़िल्में देखना भी पसंद है. लव आजकल, कमीने, दिल बोले हड़िप्पा अभी देखना बाकी है. रनबीर कपूर, शाहिद कपूर की फ़िल्में देखना पसंद है.

फ़िल्में थिएटर में देखना पसंद है या घर में?

फ़िल्में देखने का मज़ा थिएटर में ही है. ‘जब वी मेट’ मुझे बहुत अच्छी लगी. ये मेरी पसंदीदा फ़िल्मों में से एक है. ये फील गुड मूवी थी.

आपकी पसंदीदा अभिनेत्री कौन है?

कैटरीना कैफ़ मेरी पसंदीदा अभिनेत्री है. मेरी उनसे मुलाक़ात तो नहीं हुई. लेकिन मैंने उन्हें मुंबई एयरपोर्ट पर देखा था.

आपको ये तो पता है कि उनके ब्वॉयफ्रेंड को गुस्सा भी बहुत आता है?

सलमान खाने के बारे में कहूँ तो मैंने सुना है कि वो बहुत अच्छे हैं और उन्हें अक्सर गलत समझा जाता है.

ग्लैमर और स्पोर्ट्स साथ-साथ चलते हैं. आप कभी-कभी मॉडलिंग तो करते ही हैं. क्या कभी एक्टिंग भी करेंगे?

अभिनय के बारे में मैंने सोचा है. लेकिन इसके लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है. लेकिन इसमें शक नहीं कि ग्लैमर और स्पोर्ट्स साथ-साथ चलते हैं. जुलाई में जब बैंगलोर फैशन वीक हुआ था तो मुझे बुलाया गया था. तब मैं रैंप पर चला था और मुझे अच्छा लगा था.

खेल के साथ क्या आप ये भी ध्यान रखते हैं कि आपका सूट कैसा होना चाहिए?

नहीं. ऐसा तो नहीं है. मैं सूट पर तो फ़िलहाल इतना ध्यान नहीं दे रहा हूँ. लेकिन आगे चलकर मैं ज़रूर डिज़ाइनर के सूट पहनना पसंद करूँगा.

बीबीसी एक मुलाक़ात में आगे बढ़ें, उससे पहले अपनी पसंद के और गाने बताएँ?

'चक दे इंडिया' का गाना मुझे पसंद है. इसके अलावा 'ओम शांति ओम' का गाना ‘आंखों में तेरी अजब सी अदाएँ हैं’, भी मुझे अच्छा लगता है.

तो रोमांटिक हैं आप?

हाँ बिल्कुल. मैं भावुक हूँ, लेकिन खेल में भावनाएँ दिखाने का मौक़ा नहीं मिलता. कुछ खिलाड़ी अपनी भावनाओं का इज़हार करते भी हैं और ये देखना मजे़दार लगता है.

ड्रीम गर्ल की आपकी तलाश जब पूरी होगी तो आप उसे कैसे प्रोपोज़ करेंगे?

मैं उसे पेरिस के आइफ़ल टॉवर के ऊपर प्रोपोज़ करना चाहूँगा. मैं ज़्यादा घुमा फिराकर नहीं बल्कि सीधे-सीधे अपने प्यार का इज़हार करना चाहूँगा.

आपको खेल रत्न, विश्व खिताब और बहुत कुछ मिल चुका है. और क्या हासिल करना चाहते हैं?

मैं युवाओं को इस खेल को खेलने के लिए प्रेरित करना चाहूँगा. मेरे लिए खुशी की बात होगी कि अधिक से अधिक लोग इस खेल को बतौर पेशेवर लें. मैं आने वाली चैंपियनशिपों में अच्छा प्रदर्शन करना चाहूँगा.

और फ़िल्मों में कोई भूमिका मिले तो वो भी करना चाहेंगे?

हाँ बिल्कुल.

और किस अभिनेत्री के साथ फ़िल्म करना चाहेंगे. क्या कैटरीना कैफ़?

नहीं कैटरीना और दूसरी अभिनेत्रियां तो मुझसे थोड़ी बड़ी लगती हैं. अमृता राव जैसी अभिनेत्री के साथ फ़िल्म करना चाहूँगा.

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