समय के आगे मैं कुछ नही: गोविंदा

गोविंदा
Image caption गोविंदा की नई फ़िल्म 'डू नाट डिस्टर्ब' ज़ल्द ही रिलीज होने वाली है.

गोविंदा के दोस्त और उनके लिए लकी कहे जाने वाले निर्देशक डेविड धवन के साथ उनकी फिल्म पार्टनर हिट रही थी. आजकल उनके पास बाहरी निर्माता-निर्देशकों की दर्जन भर फ़िल्में हैं.

कुछ दिन पहले गोविंदा डेविड धवन के साथ अपनी फिल्म 'डू नॉट डिस्टर्ब' के लिए दिल्ली आए थे. इस दौरान उनसे उनकी फ़िल्मों और भविष्य की योजनाओं को लेकर बातचीत हुई.

आपके पास फिल्मों का अंबार है और कहा जा रहा है कि आप पूरी तरह वापस आ गए हैं. जबकि ‘सुख’ के समय ऐसा नहीं था?

मैंने जो समय देखा वो किसी को न देखना पड़े. मेरे पिता अपने समय के चमकते सितारे थे. फिर उनके सितारे बुलंद नहीं रहे. हमें अपना बंग्ला बेचकर विरार आना पड़ा. अपने पिता की तरह ही बॉलीवुड की चमकती फ़िजा छोड़कर मुझे राजनीति में आना पड़ा. अपनी फ़िल्म ख़ुद रिलीज़ करनी पड़ी. लगता था मेरे पिता का इतिहास दोहराया जा रहा है. मेरा परिवार एक दुर्घटना में बाल-बाल बचा. ऐसे में सफल वापसी सुखद अहसास है. हालाँकि मैंने जब 'सलामे इश्क' से दोबारा शुरुआत की तो लोगों ने कहा कि अब नहीं चलेगा. लेकिन अब दो साल से मुझे फुर्सत नहीं है.

राजनीति में असफलता और फ़िल्मों के बुरे हाल ने हिलाया नहीं आपको?

किस्मत से कौन जीत सकता है. समय के आगे कुछ नहीं. पर ईश्वर, मेरी माँ के आशीवार्द और लोगों के प्रेम ने मुझे नया जीवन दिया है. जब ‘पार्टनर’ हिट हुई तो लोगों ने मुझसे पूछना शुरू किया कि क्या मैं लौट आया हूँ. मैं समझ नहीं पाया कि लोग ऐसा क्यों पूछ रहे हैं. मैंने बस कुछ असफल फ़िल्में दी थीं. उनसे नाता नहीं तोड़ा था.

यानी डेविड आपके करियर के लिए संजीवनी बने और वो भी कामेडी के ज़रिए ही .जबकि उनकी फ़िल्मों का हाल भी कुछ बेहतर नहीं था?

(हंसते हैं) हमने कई हिट फ़िल्में दी हैं. पर सही मायनों में लोग ही सब कुछ होते हैं.जब लोग हमें पसंद करते हैं तो हम ख़ुश होते हैं और जब नकार देते हैं तो हमें उनपर नाराज़ होने का कोई अधिकार नहीं. हो सकता है मैंने कुछ ऐसे फ़िल्में चुनी जो लोगों को मेरी छवि और रुतबे से अलग लगीं. डेविड के साथ भी ऐसा हो सकता है. बेहतर कॉमेडी लोगों को हमेशा अच्छी लगती है .

'डू नॉट डिस्टर्ब' में आप, डेविड, सुष्मिता और लारा दत्ता फिर एक साथ काम कर रहे हैं जबकि आपकी पिछली फ़िल्म ‘लाइफ पार्टनर’ में लारा ने आपके साथ काम करने से मना कर दिया था?

ऐसी बात नहीं है. आपने 'लाइफ पार्टनर' देखी हो तो आपको पता चलेगा कि उसमे मेरे साथ अमृता राव ने जो भूमिका की है वह एक मेहमान भूमिका थी. लारा व्यस्त थीं. सो उन्होंने मना कर दिया होगा. जहाँ तक डेविड की बात है तो हम पुराने दोस्त हैं मैं उनके साथ हमेशा काम करता रहूँगा. सुष्मिता के साथ मैंने पहले भी 'क्योंकि मैं झूठ नहीं बोलता' जैसी फ़िल्में की हैं.

यह भी कहा जा रहा है की ‘पार्टनर’ की हॉलीवुड हिच की तरह यह फ़िल्म भी इसी नाम से बनी साठ के दशक की हॉलीवुड की नक़ल है?

नहीं. यह शुद्ध भारतीय परिवेश और पात्रों वाली फ़िल्म है. हॉलीवुड की फ़िल्म एक थ्रिलर फ़िल्म थी. इसमें चरित्रों के कई स्तर हैं. यह एक मज़ेदार फ़िल्म है और मैं चाहता हूँ कि इसे देखते समय आपको कोई डिस्टर्ब न करे. (हंसते हैं)

Image caption गोविंदा का मानना है कि राजनीतिक करियर में जितना हो पाया उन्होंने लोगों के लिए किया.

अपने ही प्रोडक्शन के बारे में क्या सोचते हैं. अपने भाई कीर्ति के साथ फिर फ़िल्में बनाएंगे. जबकि आपकी बेटी नर्मदा भी फ़िल्मों में आने की तैयारी कर रही है?

क्यों नहीं बनाएंगे. जहाँ तक मेरी बेटी की बात है तो हर माता-पिता अपने बच्चों को सफल देखना चाहते हैं. जब समय आएगा तो हम उसके बारे में भी बात करेंगे. मुझे पूरी आशा है लोगों को निराशा नहीं होगी.

लोगों का मानना है कि राजनीति में आने वाले सितारे उन्हें निराश ही करते हैं ?

नहीं. लोगों की अपेक्षाएं शायद ज़्यादा होती हैं . सुनील दत्त साहब के बारे ऐसा नहीं कहा जा सकता. दक्षिण के कई सितारों ने राजनीति में उदहारण पेश किए. मैं थोड़ा पीछे रह गया. लेकिन मुझसे जितना हो सकता था मैंने लोगों की सेवा की. अब भी कर रहा हूँ जबकि अब मैं राजनीति में नहीं हूँ. लोग अनावश्यक दखालंदाजी करते हैं. मेरा नाम कभी उन्होंने अंडरवर्ल्ड से जोड़ा और कभी मुझे लोगों को गुस्से में पीटने वाला कहा.

आपको कभी गंभीर अभिनेता नहीं माना गया. फ़िल्म समीक्षक भी आपकी फ़िल्मों के बारे में कड़वा ही लिखते रहे हैं. जब आपको सर्वश्रेष्ठ कॉमेडी अभिनेता का अवार्ड मिला तो आपने मना कर दिया?

हमेशा नहीं. कभी-कभी. लोग जैसा हूँ वैसे है पसंद करते हैं और मैं इसे बदलना नहीं चाहता. मैंने ‘मुक़ाबला’ जैसे फ़िल्में की और अब मणि रत्नम की ‘रावण’ से लोगों की धारणा बदल जाएगी.लोग असफल क्यों होते हैं, इसकी वजह कोई नहीं जानता. कोई भी हमेशा सफल नहीं रहता. ये लोगों की बातें हैं.

हमारे यहाँ कामेडी को हॉलीवुड के जिम कैरी या टोमी ली जोंस जैसा माना जाता तो ज़रूर लेता. सर्वश्रेष्ठ अभिनेता कैसे बना जाता है सब जानते हैं. (हंसते हैं) लोग मुझे सराहते हैं. मेरे लिए मेरा यही अवार्ड है. यदि ऐसा नहीं होता तो मैं दुबारा कभी सफल नहीं होता.

राजनीति मैं आपने भाजपा के दिग्गज नेता को हराया था. कांग्रेस में जाने की कोई ख़ास वजह थी?

मैंने नहीं लोगों ने हराया था. मेरे पिता महबूब साहेब के क़रीबी थे और मेरी माँ बनारस घराने की शास्त्रीय गायिका थीं. वे कांग्रेस से गहरे जुड़ाव वाले लोग थे. कांग्रेस में जाना मेरी नियति थी. राजनीति मेरा मिशन था और फ़िल्में मेरे खून में हैं. पर मैं राजनीति का ककहरा नहीं सीख पाया.

सुना है आपके घर में भी तो आपका कोई प्रशंसक नहीं है?

(हंसते हैं) इसमें मैं कुछ नहीं कर सकता. मेरी बेटी सलमान खान की फैन है और बेटा ऋतिक का. जबकि पत्नी शाहरुख़ की प्रशंसक हैं.

आपकी कविताओं और फ़िल्म लेखन का क्या हुआ और आपने दुबारा टीवी के बारे में नहीं सोचा?

पीछे छूट गए शौकों को पूरा करना अब मुश्किल काम हैं. समय नहीं. जब समय मिलता है तो कुछ पंक्तियाँ लिख लेता हूँ. टीवी बहुत समय लेने और थकाने वाला काम है. एक बार कर चुका हूँ बस वही काफ़ी है.

अब आपकी आने वाली फ़िल्मों का क्या हाल है?

अभी तो 'डू नॉट डिस्टर्ब' आ रही है. उसके बाद 'डोंटवरी', 'चाय गरम', 'लूट', 'दो लक्की', 'बन्दा ये बिंदास है', 'मस्ताना', 'रावण' , 'मैं और मिसेज खन्ना', 'शोमैन', 'नॉटी एट फोर्टी', 'अब दिल्ली दूर नहीं' और 'रन भोला रन' जैसी फ़िल्में आने वाली हैं.

संबंधित समाचार