जब क्रिकेट के धुरंधरों ने गाना गाया

सुर की मल्लिका लता मंगेशकर संगीत के अलावा जिस चीज़ के लिए जुनूनी हैं वो है उनका प्रिय खेल क्रिकेट.

पच्चीस साल पहले भारत-वेस्टइंडीज़ क्रिकेट फ़ाइनल मैच लता मंगेशकर ने लॉर्डस से देखा था और उस गौरवशाली पल की साक्षी बनी थीं. मैच से पहले पूरी टीम को लताजी ने खाने पर बुलाया था.

बाद में टीम के लिए पैसा जुटाने के लिए उन्होंने विशेष कॉन्सर्ट भी किया था जिसमें सब खिलाड़ियों ने उनके साथ गाना गाया था.

विश्व कप से जुड़ी अपनी यादें लता मंगेशकर ने बीबीसी के साथ बाँटी.

आप 25 साल पहले लॉर्ड्स मैदान पर भारत-वेस्टइंडीज़ फ़ाइनल की साक्षी थी. आप लंदन में ही थी उस समय. किस तरह का मंज़र था उस दिन लॉर्ड्स पर.

माहौल तो कमाल का था. हम लोग तो बहुत ज़्यादा तनाव में थे कि कौन जीतेगा, मैच किस तरफ़ जाएगा. मैने पूरा मैच देखा था. फ़ाइनल मैच से एक दिन पहले मैने भारतीय टीम को लंदन में ही अपने यहाँ बुलाया था, खाना खिलाया था और शुभकामनाएँ दी थीं.

आपने कहा कि माहौल काफ़ी तनावपूर्ण था. आपको कब लगने लगा कि भारत मैच जीत सकता है.

जैसे-जैसे मैच का आखि़री दौर आया तो मुझे लगने लगा कि हम जीत सकते हैं. लेकिन आप तो जानती हैं कि क्रिकेट अनिश्चितताओं का खेल है. आप कुछ कह नहीं सकते हैं कि किस वक़्त पासा पल्ट जाए. लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं और हम लोग जीत गए

मैच से पहले पूरी टीम आपसे मिली, आपके यहाँ खाना खाया. उस समय टीम का मनोबल कैसा था.

उस दिन टीम यही कह रही थी कि वे लोग जीतेंगे. मुझे याद है कि मैने पूछा भी था उनसे कि आपको क्या लगता है. तब भी टीम को विश्वास था कि वो जीत जाएगी. आख़िरकर वो जीत भी गए, बहुत बड़ी बात थी.

विश्व कप में जीत के बाद आपने खिलाड़ियों के लिए भारत में विशेष कॉन्सर्ट किया था पैसे जुटाने के लिए क्योंकि क्रिकेट बोर्ड के पास शायद उस समय इतने पैसे नहीं थे. उस कॉन्सर्ट की कोई यादें

दरअसल मैं 1983 में मई महीने में लंदन में थी, छुट्टियाँ मनाने और मेरे घर के लोग भी थे साथ में. लंदन में ही मेरी मुलाकात एनकेपी सालवे साहब से हुई. जब भारतीय टीम जीत गई तो सालवे जी ने मुझसे कहा कि वे लोग इस जीत पर एक बड़ा प्रोग्राम करना चाहते हैं और क्या मैं वो प्रोग्राम करुँगी. मैने कहा ज़रूर करूँगी.

17 अगस्त को मैं दिल्ली गई और वो स्पेशल शो किया. उस शो में मुकेश भैया का बेटा था नीतिन मुकेश और सुरेश वाडेकर भी थे शायद. राजीव गांधी भी उपस्थित थे. बड़ा अच्छा शो हुआ था. सबसे अच्छी बात थी कि एक गाना था जो मेरे भाई ने बनाया था, सारे क्रिकेट खिलाड़ियों ने मेरे साथ वो गाना गाया था.

उसी कॉन्सर्ट में गाया था सबने ये गाना?

हाँ. कॉन्सर्ट का अंत ही उस गाने से हुआ था.

उन खिलाड़ियों में से वाकई में कोई अच्छा गाता था या फिर उनका कमाल बल्ले और गेंद पर ही चलता था.

गाते हैं, क्यों नहीं. हमारे पुराने क्रिकेट खिलाड़ियों में से कई ऐसे हैं जो अच्छा गाते थे. विश्व कप जीतने वाली टीम में से भी कई गाते हैं. अभी मुझे ठीक से याद नहीं है पर मेरे पास सब फ़ोटो पड़े हुए हैं. सुनील गावस्कर थे, सब लोगों ने मेरे साथ खड़े होकर गाना गाया था.

आपका पंसदीदा क्रिकेट खिलाड़ी कौन सा है?

सभी खिलाड़ी अच्छे हैं लेकिन सचिन मुझे सबसे अच्छा लगता है. उस टीम में से सुनील गावस्कर सबसे अच्छे लगते थे और साथ ही कपिल देव भी. वैसे तो हमारे यहाँ सारे क्रिकेटर अच्छे हैं. द्रविड़ भी अच्छे हैं. हाँ सबसे पंसदीदा सचिन है इसमें कोई शक़ नहीं. सबको पसंद है सचिन तो मैं क्यूँ पीछे रहूँ.

अभी तो ट्वेन्टी-ट्वेन्टी का दौर है. आईपीएल के बारे में आपका क्या ख़्याल है?

ठीक है मतलब हम तो उस ज़माने के लोग हैं जो टेस्ट क्रिकेट पसंद करते हैं या ज़्यादा से ज़्यादा वनडे क्रिकेट. अभी ये बीस ओवर वाला निकला है. वैसे देखते तो हैं हम लोग. चाहे बीस ओवर का खेल हो या फिर पांच ओवर मैच तो देखते हैं, घर के सभी लोग. हमारे घर में जितने बच्चे हैं वो सब तो कहते हैं कि सचिन क्रिकेट के भगवान हैं. इतना प्यार करते हैं वो सचिन से.

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