नकारात्मक भूमिकाएँ अब नहीं: मंदिरा

मंदिरा बेदी
Image caption मंदिरा बेदी ने अमरीका में भारत की ओर से ग्रैंड मार्शल की भूमिका निभाई

मंदिरा बेदी के जीवन की कहानी भी कुछ अजब गजब सी है और इसे पढ़कर शायद हमारे बहुत से मित्रों को एक नयी प्रेरणा मिले.

मंदिरा ऐड फिल्म मेकिंग में जाना चाहती थी पर भाग्य ने इन को अभिनेत्री बना दिया. अभिनय के सफर की शुरुआत तो टेलीविजन सीरियल शांति से हुई पर फिर मिली 'दिल वाले दुल्हनिया ले जाएँगें' तो छोटे परदे की मन्दिरा बड़े परदे की सह नायिका बन गई.

उसके बाद क्रिकेट कमेंटेटर बन कर एक नया इतिहास रच डाला. पिछले दिनों अमेरिका के शहर न्यूजर्सी में मन्दिरा बेदी को भारतीय स्वतंत्रता दिवस परेड में ग्रैंड मार्शल के लिए आमंत्रित किया गया और उनकी इसी यात्रा के दौरान मैंने भी एक छोटी यात्रा कर ली उनके इस अभिनय सफ़र की-

जब आप ने होश संभाला तो अभिनय के क्षेत्र में ही जाना है ऐसा ही सोचा था?

मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं था. मैने अपना पोस्टग्रेजुएशन मास मीडिया में किया है. मै ऐड फ़िल्ममेकिंग में या एडवरटाइज़िंग के क्षेत्र में जाना चाहती थी.

जब मै पढ़ाई कर रही थी उसी समय शांति के निर्देशक ने मुझको देखा और कहा कि हम शांति सीरियल के लिए एक स्क्रीन टेस्ट कर रहे हैं. ये भारतीय टेलिविज़न का पहला डे शो होगा तो हम चाहते हैं कि आप मुख्य भूमिका शांति के लिए ऑडीशन करें.

मेरा कोई फ़िल्मी आधार नहीं था. मेरे पापा उस समय आईसीआईसीआई बैंक में और भैया ह़ॉंगकॉंग बैंक में काम करते थे. मैने सोचा जब कोई बुला रहा है तो चलो चलते हैं. मेरे दो ऑडीशन हुए और बस इस तरह से मै शांति सीरियल में काम करने लगी.

छोटे परदे से आप ने बड़े परदे का रुख किया दिल वाले दुल्हनिया ले जाएँगें. ये फ़िल्म आप को कैसे मिली?

शांति सीरियल सफल हो गया था लोग मुझको थोडा जानने लगे थे. करण जौहर उस समय आदित्य चोपडा को असिस्ट कर रहे थे, उन्होंने मुझे फ़ोन किया( मुझे वो फोन आज भी याद है ) कहा कि एक पिक्चर है दिल वाले दुहानिया ले जायेंगे जिस में हिरोइन का रोल तो नहीं है हाँ उसी के जैसा है. शाहरुख़ के साथ है रोल. तो आप करना चाहेंगी? बस ऐसे मिल गया रोल.

शांति और डीडीएलजे, दोनों में बहुत सॉफ्ट रोल थे, ऐसे में 'सास भी कभी बहू थी' में मोना के रूप में नकारात्मक भूमिका आप ने कैसे स्वीकार कर ली?

एक अभिनेत्री के रूप में आप अलग अलग भूमिका करना चाहते हैं. जब मुझे ये रोल ऑफर हुआ तो उस समय तक मेरा शांति, डीडीएलजे और एक सीरियल 'औरत' आ चुका था तो जब इन सभी किरदारों से अलग कुछ करने का मौका मिला तो बस मैने मोना का रोल कर लिया. थोड़े परिवर्तन के लिए ये रोल किया पर अब कभी निगेटिव रोल नहीं करुंगी क्यों कि जब कभी कोई मिलता था यही कहता मंदिरा जी आप मिहिर को छोड़ दीजिये वो तुलसी से बहुत प्यार करता है.

भारत में क्या है कि लोग रोल को बहुत गंभीरता पूर्वक ले लेते हैं. नकारात्मक किरदार निभाने पर लोग उस व्यक्ति के बारे में गलत सोचने लगते हैं तो अब कोई नकारात्मक रोल नहीं करुंगी.

इंडियाज़ ग्रेट लाफ्टर शो में आप की मासूम हँसी का राज क्या है और वहां बैठने का अनुभव कैसा रहा?

दरअसल मै जिन के साथ वहाँ बैठी हूँ वे स्वयं हँसी के गुरु हैं. पहले शो से ले के अब तक वो इस शो की शोभा बढा रहे हैं. सारे प्रतिभागी सिद्धू जी से बहुत प्यार करते हैं तो उनके साथ बहुत मजा आता है.

जब भी मै ये शो करती हूँ तो सोचती हूँ कि मै बहुत खुशकिस्मत हूँ. कितना अच्छा काम है कि मै होस्ट नहीं कर रही हूँ मै बैठी हूँ और लोग स्टैड अप कॉमेडी कर रहे हैं. जीवन इससे अच्छा क्या होगा. इस को करने में मुझे सच में बहुत आनंद आया.

हमारे देश में बहुत प्रतिभा है. बहुत से प्रतिभावान कामेडियन हैं. स्टैंड अप कॉमेडी लाफ्टर चैलेंज से ही पॉपुलर हुई है वर्ना इस से पहले टीवी पर ऐसा कोई कांसेप्ट नहीं था.

कहीं आप लंबे बालों में दिखती हैं तो कहीं छोटे बालों में. बालों पर इतना प्रयोग क्यों करती हैं?

जैसा कि मैने पहले कहा कुछ परिवर्तन रोल में करने चाहिए. उसी तरह अपने लुक में भी कुछ बदलाव लाना चाहिए अब छोटे बाल बहुत हो गए. अब मै इनको बढ़ाने वाली हूँ.

ऐड में जाते जाते आप अभिनय में आ गई और फिर क्रिकेट में. ये कैसे हो गया?

जैसे मुझे शांति सीरियल मिला कुछ उसी तरह क्रिकेट के लिए भी हुआ. मै तो यही कहूँगी कि मैं सही समय में सही जगह पर थी. 2002 की चैम्पियन ट्रॉफी जोकि श्री लंका में हुई थी, भारत इंग्लैण्ड को हरा कर सेमी फाइनल में पहुंचा था तो मै सेमी फाइनल देखने श्रीलंका पहुँच गई.

उस चैम्पियंस ट्रोफी को सोनी टीवी दिखा रहा था. उन्होंने मुझसे पूछा कि आप यहाँ क्या कर रही है तो मैने कहा कि मैं तो मैच देखने आई हूँ.

उन्हें बहुत हैरानी हुई कि मै अपने पैसे से छुट्टी ले कर क्रिकेट देखने आई हूँ. फिर जब 2003 वर्ल्ड कप के लिए वो होस्ट ढूंढ रहे थे, उन्होंने मुझे फ़ोन किया और अपने ऑफिस में बुलाया. तब मुझे ये मुझे मालूम नहीं था कि मुझको क्यों बुला रहे हैं.

जब मै ऑफिस में पहुंची तो वहां 10 लोग इकठे थे. उन सभी ने मुझसे सवाल पूछने शुरू किए. करीब 20 से 25 सवाल पूछे फिर कहा कि हम वर्ल्ड कप के लिए एक होस्ट ढूंढ रहे हैं क्या आप करना चाहेंगी? बस इसके बाद मैने दो ऑडीशन दिए और मुझे ये ऑफ़र मिला.

प्रारंभ में आप की बहुत आलोचना हुई. आप कुछ कहना चाहेंगी?

इस से पहले किसी लड़की ने क्रिकेट होस्ट नहीं किया था और मुझे भी किसी ने होस्ट करते हुए नहीं देखा था तो मुझे मीडिया से बहुत सी नकारात्मक टिप्पणियां मिलीं.

ये क्या कर रही है, इस को कुछ आता नहीं है, वगैरा, वगैरा... ये टूर्नामेंट छह हफ्ते का था तो मुझे समय मिला की मैं लोगों की धारणाएँ बदल सकूँ. और धीरे धीरे लोगों की धारणाएँ बदलीं भी.

इस दौरान मैने बहुत कुछ सीखा भी. क्रिकेटर्स के बीच में बैठ के बातें करना बहुत ही सुखद अनुभव था .

आप का पसंदीदा क्रिकेटर कौन है?

अभी तो महेंद सिंह धोनी मुझे बहुत अच्छे लगते हैं. वो एक प्रतिभावान खिलाड़ी हैं और बहुत अच्छे इंसान भी हैं. इतनी कम उम्र में उन्होंने टीम के वरिष्ठ खिलाडी और जूनियर खिलाडियों की इज्जत प्राप्त की है.

इन का टेम्परामेंट बहुत अच्छा है और ये बहुत अच्छे कप्तान हैं.राहुल द्रविड़, सचिन और शेन वार्न भी मुझे बहुत पसंद है.

क्या आप ने कभी क्रिकेट खेला भी है?

मेरे यहाँ स्कूल में लड़कियों के लिए क्रिकेट नहीं था पर मैने बिल्डिंग में लड़कों के साथ बहुत क्रिकेट खेली है. मैने गली क्रिकेट बहुत खेली है. जब से मै क्रिकेट से जुडी तो सोनी टीवी में एक कार्यक्रम आता था तो मैंने उस में अलग अलग जगह पर जा के लड़कियों के साथ क्रिकेट खेला है.ये भी बहुत रोचक अनुभव था.

अभिनय और क्रिकेट से हट के आप क्या करती हैं?

मै बहुत पढ़ती हूँ. एक्सरसाइज़ करती हूँ, मझे पेंटिंग का बहुत शौक है तो कभी कभी वो भी करती हूँ. मुझ को बहुत बाहर जाना होता है तो जब भी समय मिलता है मैं अपने पति के साथ बिताती हूँ.

आप ने कहा आप पेंटिंग करती है किस तरह की पेंटिंग करती हैं?

मै पॉटरी करती हूँ तो उस में पाट बन जाने के बाद पेंट करना होता है मैने अपने घर के लिए हाथ से बने टाइल्स लगाए हैं .मेरी पेंटिंग ग्राफिक होती है.

मीरा बाई नॉट आउट में आप ने अनिल कुंबले के साथ काम किया है. उनके साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा और अनिल कुंबले ही क्यों, कोई और क्यों नहीं?

अनिल कुंबले के साथ काम कर के मुझे बहुत मजा आया. अनिल कुंबले बहुत ही सज्जन इंसान हैं. इस फ़िल्म में जो लड़की है वो अनिल की फैन है हम ने सोचा थोडा अलग रखते हैं क्यों कि सचिन का तो हर कोई फैन होता है पर ये लड़की खास अनिल कुंबले की फैन है.

पिक्चर मुझे बहुत पसंद है बहुत अच्छी बनी भी थी पर इस को रिलीज़ करने में थोडी देर हो गई जब बनी थी तभी रिलीज़ करना था. ये तो बनने के साल भर के बाद रिलीज़ हुई थी .

शांति से ले कर मीराबाई नौट आउट तक इतने सालों में आप में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है आप आज थोडा और जवान दिखती है. अपनी इस सुंदरता और मासूमियत को आप ने कैसे बरक़रार रखा है?

मेरे बाल बदलते रहते हैं न इस लिए (हँसने लगती हैं ). यदि आप कॉस्मेटिक सर्जरी की बात कर रहीं है तो मै किसी भी अप्राकृतिक चीज़ पर विश्वास नहीं करती. मै जो भी करती हूँ उस को आनंद ले के करती हूँ और जब बोर होने लगती हूँ तो एक अंतराल ले लेती हूँ और कुछ नया आने तक इंतजार करती हूँ.

थोड़े समय का ब्रेक बहुत जरुरी होता है. थोड़े समय के लिए चेहरे पर मेकअप नहीं होना अच्छा होता है.

आप अभिनय,पेंटिंग, होस्टिंग हर क्षेत्र में बहुत अच्छी हैं तो आप के माता पिता को आप पर गर्व होता होगा?

पता नहीं. शायद करते होंगे. मै जब क्रिकेट से जुडी तब मेरे पिता को लगा कि हाँ अब मै कुछ कर रही हूँ वरना उस से पहले कहते थे कि टेलिविज़न में कुछ करती है.

आप का भविष्य का प्रोजेक्ट क्या है?

एक सीरियल है पर अभी उस में कुछ बातें बाक़ी हैं जब तक सब फ़ाइनल न हो जाये कुछ कहना उचित नहीं है. उस के अगले महीने से शुरू होने की उम्मीद है.

संबंधित समाचार