पिंकी की मुस्कान भारत में भी

  • 5 अक्तूबर 2009
पिंकी

वर्ष 2009 में शॉर्ट डाक्यूमेंट्री फिल्म श्रेणी में ऑस्कर पुरस्कार जीत चुकी फिल्म 'स्माइल पिंकी' इनदिनों मुंबई में दिखाई जा रही है. मुंबई के अलावा इस फिल्म का प्रीमियर भारत के चार और शहरों दिल्ली, चेन्नई, बंगलौर और वाराणसी में भी होने वाला है.

मुंबई में बीबीसी से बातचीत में फिल्म की निर्देशक मेगन माइलन ने बताया कि उन्हें इस बात की खुशी है कि स्माइल पिंकी के ऑस्कर पुरस्कार जीतने के बाद उनके उस मक़सद को काफी बल मिला है जिसमें वो लोगों को इस विकृति के बारे में बताना चाहते थे. ख़ासकर ये कि इस विकृति से मात्र एक घंटे की एक सर्जरी से निजात पाई जा सकती है.

उत्साह

मेगन माइलन न्यूयॉर्क की एक डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर हैं जो पहले भी सामाजिक मुद्दों पर आधारित दूसरी कई डॉक्यूमेंट्री फिल्मों का निर्माण कर चुकी हैं.

इससे पहले उन्होंने 'लॉस्ट ब्यॉज़ ऑफ सूडान' का निर्माण किया था जिसे दो एमी पुरस्कारों के लिए नामांकन मिला था.

माइलन ऑस्कर में मिली सफलता से बेहद उत्साहित हैं और चाहती हैं कि अब भारत में इस फिल्म को ज्यादा से ज्यादा लोग देख सकें.

इसीलिए उन्होंने भारत के पांच शहरों में इस फिल्म का प्रीमियर करने का फैसला किया है. उनका कहना है कि ऑस्कर हमारे लिए एक बेहद सुखद अनुभव रहा है, साथ ही इस विकृति के बारे में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक जागरुकता कायम करने में हमें मदद मिल पाई है..

पिंकी की कहानी

स्माइल पिंकी की कहानी उत्तर प्रदेश के जिले मिर्जापुर के एक छोटे से गांव की एक छह साल की बच्ची की है जिसको जन्म से ही होठों की विदीर्णता है.

उन्तालीस मिनट की इस डॉक्यूमेंट्री में उस बच्ची के जीवन से जुड़ी हुई समस्याओं की झलक को पेश किया गया है.

इस फिल्म ने तब लोगों का ध्यान अचानक अपनी तरफ खींचा जब इस साल फरवरी में लॉस एंजिल्स में हुए 81वें एकेडमी एवार्ड्स में इस फिल्म को ऑस्कर पुरस्कार से नवाज़ा गया..

पिंकी की सर्जरी कर चुके डा. सुबोध कुमार सिंह भी डाइरेक्टर मेगन माइलन के साथ इस फिल्म के प्रीमियर पर पांचों शहरों में साथ रहने वाले हैं.

विकृति

स्माइल ट्रेन नाम की स्वयंसेवी संस्था ने इस विकृति को जड़ से उखाड़ने का बीड़ा उठाया है और डा. सिंह स्माइल ट्रेन के वाराणसी स्थित सेंटर के प्रमुख हैं.

बीबीसी से बातचीत में उन्होंने ने उम्मीद जताई कि स्माइल पिंकी के जरिए वो लोगों में इस विकृति के प्रति जागरुकता बढ़ाने में पूरी तरह से कामयाब होंगे. होठों की विदीर्णता की इस विकृति का इलाज पूरी तरह से संभव है और हमारी कोशिश है कि लोगों को इसके बारे में जानकारी हो.

उन्होंने ये भी कहा कि होठों की विदीर्णता एक आम सी विकृति है जो कि हर सात सौ लोगों में से एक व्यक्ति को होती है लेकिन ये विकृति किसी भी इंसान के आत्मविश्वास को हिला कर रख देती है और उसके जीवन को बुरी तरह से प्रभावित करती है.

डॉ. सिंह चाहते हैं कि लोगों को पता लगे कि मात्र एक घंटे की सर्जरी से इसको दूर किया जा सकता है. उनके अनुसार पूरे देश भर में 250 सर्जन देश के अलग अलग हिस्सों में स्थित स्माइल ट्रेन के 160 केन्द्रों पर सर्जरी के जरिए लोगों को इस विकृति से निजात दिलाने में जुटे हुए हैं..

संबंधित समाचार