'मेरी पहली पसंद कविता है'

प्रसून जोशी
Image caption तारे ज़मीन के गाने प्रसून जोशी ने ही लिखे थे.

प्रसून जोशी हिंदी फ़िल्म जगत के उन चंद गीतकारों में शामिल हैं जिन्होंने बहुत कम समय में अपना एक ख़ास मुकाम हासिल किया है. विज्ञापन जगत से अपने करियर की शुरुआत करने वाले प्रसून ने पिछले कुछ सालों में कई बेहतरीन गीत लिखे हैं.

हाल ही में उन्हें आमिर ख़ान की चर्चित फ़िल्म तारे ज़मीन पर में शानदार और दिल को छू जाने वाले गीतों के लिए सर्वश्रेष्ठ गीतकार के तौर पर राष्ट्रीय पुरस्कार से भी नवाज़ा गया है. हाल ही में उन्होंने बीबीसी से एक लंबी बातचीत की..

प्रसून जी, सबसे पहले तो राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने के लिए बहुत-बहुत बधाई. क्या कहना चाहेंगे?

बहुत शुक्रिया आपका. वैसे तो हर पुरस्कार मेरे लिए मायने रखता है लेकिन बड़ा अच्छा लगता है जब आपकी सरकार आपको कोई सम्मान देती है.

अगर तारे ज़मीन पर के गीतों की बात की जाय तो काफी संजीदगी से लिखे गए थे वो,कैसा अनुभव रहा था उन गीतों को लिखने का?

बड़ा सुखद अनुभव रहा था उन गीतों को लिखने का क्योंकि बच्चों के लिए पहले मैने इतना कभी सोचा नहीं था. ये फ़िल्म केवल डिक्लैशिया बीमारी के बारे में नहीं थी. इस फिल्म में बच्चे का मां-बाप के साथ रिश्ते के बारे में बातचीत थी. मां-बाप की कैसी सोच होनी चाहिए अपने बच्चे के बारे में वो बात की गई थी. इस फ़िल्म के बारे में लिखते हुए ख़ुद मेरे दिमाग की खिड़की खुल गई थी तो हां, मैं कह सकता हूं कि इन गीतों को लिखते समय काफी कुछ सीखने को मिला है..

प्रसून जी मैं अगर आपको शब्दों का जादूगर कहूं तो गलत नहीं होगा. तो ये बताइए कि क्या ये एक पैदाइशी गुण था या इसे बाद में निखारा है.

देखिए मुझे ठीक से याद नहीं है कि मैंने कब लिखना शुरु किया है. तो हां आप कह सकते हैं कि मुझमें ये पैदाइशी था. जब से मुझे होश है तब से मैं लिख रहा हूं, चाहे कहानी लिखूं,कविताएं लिखूं,लेख लिखूं या कभी मैं नाटक लिखता था तो ये सब शुरु से ही था.गीतकार बनना, कहानीकार बनना और विज्ञापनों के लिए लिखना ये सब बाद की बातें होती हैं. धीरे-धीरे आपको लोग मौका देते हैं लेकिन लिखने की एक जो चाहत थी वो मेरे अंदर हमेशा से थी.

ये बताइए कि बचपन कैसा था. आप पहाड़ों में पले बढ़े तो क्या ये भी एक वजह है कि इसकी वजह से आपके लेखन में उतनी सृजनात्मकता है?

ज़रुर,ये सच है कि मैं पहाड़ों में पला बढ़ा और प्रकृति के प्रति हमेशा मेरा प्रेम रहा. वो हमेशा मुझे एक स्वछंदता का एहसास कराती है. पेड़ों पर झूले डालना,जंगलों में दौड़ना,सुबह उठकर चिड़ियों की चहचहाहट सुनना..और ये सब चीजें कहीं न कहीं मेरे लिखने में बहुत काम आई हैं तो हां, इन सब बातों का मेरे ऊपर प्रभाव है मैं इससे इनकार नहीं कर सकता.

आप गीतकार हैं, स्क्रीनप्ले लिखते हैं,विज्ञापन लिखते हैं,कहानियां भी लिखते हैं. ये बताइए कि इनमें से कौन सी ऐसी चीज हैं जिसे लिखना या करना आपको सबसे ज्यादा पसंद है?

दरअसल ये बातें बाद में आती हैं. मुझे ऐसा लगता है कि मनुष्य जो महसूस करता है कोई भी चीज उसे पूरी तरह से अभिव्यक्त नहीं कर सकता.चाहे वो गीत हो कविता हो या और कुछ तो जो भी मैं कहने की कोशिश कर रहा हूं. ये सब उसी भावना को आप तक पहुंचाने की एक कोशिश है. इसीलिए एक दूसरे में मिल जाने की जो चाहत होती और अपने को सूक्ष्म रुप में व्यक्त करने की जो इच्छा होती है उसके लिए मैं हर माध्यम के जरिए लोगों तक पहुंचने की कोशिश करता हूं. हां अगर आप इन सब चीजों में पूछें तो सबसे ज्यादा करीब कविता है.

अच्छा ये बताइए कि विज्ञापन जगत में किस तरह से आना हुआ.

मैं जब अपना एमबीए कर रहा था. तभी मुझे पता चला कि विज्ञापन लिखने में आपको अपने विचारों को खुले रुप में व्यक्त करने की आजादी होती है तो फिर मैं धीरे-धीरे करके इस क्षेत्र से जुड़ गया. आप देखेंगे कि आज कल कविता लिखने वालों की उस तरह से पूछ नहीं है जैसी कि होनी चाहिए. तो ज्यादातर लोग किसी न किसी दूसरे व्यवसाय से जुड़कर अपने इस हुनर को जिंदा रखे हुए हैं और कविताओं को पाल रहे हैं.

तो मैंने भी धीरे-धीरे इस काम को शुरू किया और बाद में कई विज्ञापन लिखे, फिल्मों के लिए गीत लिखे. लोगों को मेरा काम पसंद आया. मैं कह सकता हूं कि फिर धीरे-धीरे मेरे लिए एक रास्ता बन गया जहां मुझे खुशी होती है कि मैं जो काम करता हूं वो लोगों तक सीधे पहुंचता है. इसी तरह से मुझे लगा कि विज्ञापनों के ज़रिए मैं अपने लेखन को आगे बढ़ा सकता हूं. यही वजह थी कि मैंने विज्ञापन को अपनाया.

हाल ही में आपने आमिर खान का एक एनिमेटेड विज्ञापन किया है जो ख़ासा चर्चित हो रहा है. कैसे आया था ये विचार दिमाग में और आमिर खान की क्या प्रतिक्रिया रही?

जी हां कोक के विज्ञापन के लिए ये कॉन्सेप्ट ऐसे आया था कि हम सब अपनी टीम के साथ बैठकर ये सोच रहे थे कि क्या नया किया जाए. फिर ख़याल आया कि हमारी नई पीढ़ी कंप्यूटर गेम बहुत ज्यादा खेलती है तो क्यूं न आमिर को एक एनिमेटेड लुक दिया जाए और ये दिखाया जाए कि कैसे उनका किरदार कंप्यूटर गेम में खो जाता है और फिर बाद में जब उसे होश आता है तब वो असल जिंदगी में वापिस आता है. तो हमने इसे जोड़कर कहानी बना दी.बाद में आमिर को भी ये विचार काफी पसंद आया.वो बस ये जानना चाहते थे कि उनका एनिमेटेड वर्जन कैसा दिखेगा तो हमने उन्हें वो दिखाया और उन्हें वो काफी अच्छा लगा.

संबंधित समाचार