कौन पूरी करता है रितेश की ख़्वाहिशें?

  • 30 अक्तूबर 2009

अलादीन,जिन्न,जादुई चिराग....बचपन से ही ये फंतासीनुमा कहानी लोग सुनते आए हैं.

अब निर्देशक सुजॉय घोष ने इसे नए कलेवर में बड़े पर्दे पर पेश किया है जहाँ अलादीन बने हैं रितेश देशमुख और उनके जिनीयस यानी जिनी के रोल में हैं अमिताभ बच्चन जो अलादीन की तीन ख़्वाहिशें पूरी करते हैं.

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रितेश ने बीबीसी से बात की और ये भी बताया कि असल ज़िंदगी में वे किसे मानते हैं अपना जिनी जो उनकी हर इच्छा को पूरा करता हो.

बहुत से लोग अलादीन की कहानी सुन कर सब बड़े हुए हैं. लेकिन बतौर फ़िल्म आज की पीढ़ी के हिसाब से किस तरह फ़िल्म को दिखाया गया है.

हाँ कहने को तो अलादीन की कहानी काफ़ी पुरानी है लेकिन फ़िल्म में इसे नए तरीके से दिखाने की कोशिश की गई है. इस फ़िल्म का अलादीन बचपन से ही लैम्प से नफ़रत करता है, अलादीन और जिनी का रिश्ता भी अलग नज़रीए से दिखाया गया है. अलादीन जिनी से तीन ख्वाहिशें पूरी करने को कहता है.वो लैम्प उसके पास कैसे आता है, क्यों आता है, पूरी कहानी के पीछे राज़ क्या हैं ये सब बहुत दिलचस्प है. कहानी वो नहीं है जो हम बचपन से सुनते आए हैं. कहीं न कहीं ये फ़िल्म बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देती है.

लगभग हर एक्टर अमिताभ बच्चन के साथ काम करना चाहता हैं. आपने तो वर्ल्ड टूयर भी किया उनके साथ. कैसा है अमित जी के साथ काम करना,पहला शॉट, उनके सामने डायलॉग बोलना...

बचपन से ही उनकी फ़िल्में देखकर बड़ा हुआ हूँ तो उनके साथ काम करने को लेकर पहले से ही काफ़ी उत्साहित था. मेरी नज़र में ही इज़ द कूलेस्ट एक्टर. उम्र में हमसे बड़े हैं और अनुभवी हैं लेकिन कभी उन्होंने ये बात हम पर ज़ाहिर नहीं होने दी कि वे हमसे सीनियर हैं. हमेशा घुलमिल कर काम करते थे. ये उनका बड़प्पन है. उनकी ये आदत बहुत सराहनीय हैं.

और संजय दत्त भी हैं आपके साथ. वे काफ़ी शर्मीले हैं, मीडिया से कम ही बात होती है उनकी.

संजय दत्त इस फ़िल्म में विलेन के रोल में है- रिंगमास्टर बने हैं. वे मीडिया में ही शर्मिले हैं हम लोगों से तो ख़ूब मस्ती करते हैं, काफ़ी मज़ा आया उनके साथ.

आपको करीब छह साल हो गए फ़िल्मों में.किस तरह से देखते हैं अब तक के अपने करियर को.

अभी बहुत कुछ करना बाकी है, बहुत कुछ सीखना बाकी है. जो मैने काम अभी तक किया है उससे बेहतर करने की कोशिश करूँगा. कोशिश रहेगी कि और अच्छा काम करूँ, कुछ अलग करूँ. अब तक जो हुआ सो हुआ, वो बीत चुका है, अब भविष्य के बारे में सोचना है.

अलादीन फैंटसी फ़िल्म है,बड़े बजट की है. आपने कॉमेडी फ़िल्में भी की हैं. आपको फ़िल्म के लिए राज़ी करवाने के लिए किन खा़स बातों का होना ज़रूरी है.

स्क्रिप्ट ही सबसे ज़रूरी है, अगर स्क्रिप्ट अच्छी है और निर्देशक में भरोसा हो कि वो इसके साथ न्याय करेंगे तो मुझे लगता है कि फ़िल्म कर लेनी चाहिए.

आपने शायद पहली बार फैंटसी फ़िल्म की है. कितना अलग होता है इस तरह की फ़िल्म में काम करना.

चुनौती यही है कि कहानी में काफ़ी कुछ फैंटसी में ही चलता है जैसे फ़िल्म एक काल्पनिक शहर में बसी है. आपको नहीं पता वो शहर कहाँ है कैसा है, बस आपको विश्वास करना पड़ता है. इस तरह की फ़िल्म में स्पेशल इफ़ेक्टस होते हैं जो कमाल के हैं. वियुजल के हिसाब से ऐसी ग़ज़ब की फ़िल्म मैने हिंदुस्तान में नहीं देखी है.

फ़िल्म में अमिताभ बच्चन आपके जिनी हैं यानी कोई ऐसा जो आपकी ख्वाहिशें पूरी करता है, आपकी मदद करता है. असल ज़िंदगी में इस रोल में किसको देखते हैं.

मुझे लगता है कि हमारे माँ-बाप ही ऐसे होते हैं जो आपकी सारी ख़्वाहिशें पूरी करते रहते हैं. बचपन से लेकर बड़े होने तक वे हमारी इच्छाओं को पूरा करने की कोशिश करते रहते हैं. वे मेहनत करते रहते हैं कि हमें खुश रख सकें. मुझे लगता है कि असल ज़िंदगी में हमारे माँ-बाप ही हमारे जिनी होते हैं.

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