आमिर के बाद 'नो वन किल्ड जेसिका'

  • 31 अक्तूबर 2009
राजीव खंडेलवाल
Image caption निर्देशक राजकुमार गुप्ता की पहली फिल्म आमिर 2008 की सफल फिल्मों में से एक थी.

नवोदित निर्देशक राजकुमार गुप्ता ने अपनी पहली ही फ़िल्म आमिर से अलग पहचान बनाई. और अब वो अपनी अगली फ़िल्म की तैयारी कर रहे हैं जिसका नाम है ‘नो वन किल्ड जेसिका’.

बीबीसी के साथ बात-चीत में राजकुमार गुप्ता ने बताया कि ‘नो वन किल्ड जेसिका’ टाइम्स ऑफ इंडिया अख़बार में छपी हेडलाइन से प्रेरित है. ये पूछे जाने पर कि क्या ये फिल्म जेसिका लाल हत्याकांड के बारे में है, राजकुमार ने कुछ भी साफ-साफ कहने से इंकार कर दिया.

उन्होंने कहा, “मैं सिर्फ इतना ही कहूंगा कि फिल्म में आप वो टाइटिल देखेंगे जिसके बाद कहानी बिल्कुल अलग दिशा में चली जाती है. लेकिन फि़ल्म किस बारे में है, इसके लिये आपको फिल्म के रिलीज़ होने तक इंतज़ार करना पड़ेगा.”

सफलता

राजीव खंडेलवाल स्टारर आमिर वर्ष 2008 की चुनिंदा सफल फिल्मों में से एक थी. उसे दर्शक और आलोचक सभी ने पसंद किया. लेकिन राजकुमार गुप्ता की मानें तो उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनकी पहली ही फिल्म इतनी सराही जाएगी.

उन्होंने कहा, “फिल्म की कहानी लिखते समय और फिल्म बनाते वक्त ये ज़रुर सोचा था और विश्वास था कि एक अच्छी फिल्म बना रहे हैं. लेकिन ये नहीं सोचा था कि आमिर 2008 की बेहतरीन फिल्मों में से एक बन जाएगी.”

अपेक्षाएं

पहली ही फिल्म जब इतने ऊंचे मापदंड निर्धारित कर दे तो भविष्य के लिए उस फिल्ममेकर से अपेक्षाएं बढ़ जाती हैं जिससे उस पर दबाव भी बन जाता है. आमिर की सफलता के बाद राजकुमार गुप्ता के साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ था.

वो कहते हैं कि सिर्फ दर्शक ही नहीं बल्कि ख़ुद फिल्ममेकर की भी अपने से अपेक्षाएं बढ़ जाती हैं और वो उसी के बारे में सोचने लगता है. इससे बचने के लिए उन्होंने तो अपने घर से फिल्म आमिर के पोस्टर्स तक हटा दिए.

छोटे बजट की सफल फिल्में

हाल ही में ऐ वेडन्सडे, लक बाय चांस, ओय लकी लकी ओय, मुम्बई मेरी जान, देव डी और खोसला का घोंसला जैसी नए निर्देशकों की छोटी बजट की फिल्मों को दर्शकों और आलोचकों ने सराहा है.

इस बारे में राजकुमार कहते हैं, “नए निर्देशक में ज़्यादा जोश होता है क्योंकि वो उसकी पहली फिल्म होती है और वो उसमें बढ़िया से बढ़िया काम करना चाहता है. साथ ही फिल्म की सफलता उसकी कहानी और ट्रीटमेंट पर भी निर्भर करती है.”

राजकुमार कहते हैं, “इसके अलावा अब दर्शकों भी जागरुक हो रहे हैं और वो अलग-अलग तरह की फिल्में पसंद कर रहे हैं.” राजकुमार गुप्ता इस रुझान को अच्छा मानते हैं और ख़ुश हैं कि वो हिंदी सिनेमा में आ रहे बदलाव का हिस्सा हैं.

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