नंबरों के खेल में भरोसा नहीं-कैटरीना

कैटरीना कैफ़
Image caption कैटरीना को आशा है कि ‘अजब प्रेम की ग़ज़ब कहानी’ और ‘राजनीति’ से उनके करियर को नई दिशा मिलेगी.

सही ढंग से हिंदी नहीं बोल पाने की वजह से शुरूआती दौर में बालीवुड में अपना ख़ास मुक़ाम नहीं बना पाने वाली कैटरीना कैफ़ को अपनी आने वाली दो फ़िल्मों—‘अजब प्रेम की ग़ज़ब कहानी’ और ‘राजनीति’ से काफ़ी उम्मीदें हैं. उन्हें आशा है कि इन फ़िल्मों से उनके करियर को एक नई दिशा मिलेगी.

‘अजब प्रेम की ग़ज़ब कहानी’ में पहली बार कैटरीना ने अपने हमउम्र हीरो (रणवीर कपूर) के साथ काम किया है. अपनी अभिनय क्षमता के चलते ख़ासकर युवा पीढ़ी का क्रेज़ बन चुकी कैटरीना को नंबरों के खेल में भरोसा नहीं है. उनका कहना है, "मैं नंबर वन की होड़ में नहीं हैं. मेरा ध्यान फ़िलहाल अपनी हिंदी को और अच्छा करने और बेहतर अभिनय करने पर है."

पेश है उनसे बातचीत के प्रमुख अंशः

अजब प्रेम की ग़ज़ब कहानी’ की ख़ासियत क्या है? राजकुमार संतोषी के निर्देशन में काम करने का अनुभव कैसा रहा?

संतोषी एक बेहतरीन निर्देशक हैं. वह हर चीज़ को यथार्थ के चश्मे से देखते हैं. उनकी कल्पना लाजवाब है. उनकी फ़िल्मों के किरदार भी उनकी तरह ही ख़ुद को अभिव्यक्त करनेवाले और ऊर्जा से भरपूर होते हैं. यही इस फ़िल्म की ख़ासियत है.

इस फ़िल्म में अपका किरदार कैसा है?

फ़िल्म में मेरा किरदार हकलाता है. ऐसी भूमिका सही तरीक़े से निभाना हमेशा चुनौतीपूर्ण होता है. बेहतर यह है कि किसी किरदार को निभाने के लिए उसपर भरोसा करते हुए उसे महसूस किया जाए.

प्रकाश झा की ‘राजनीति’ आपकी महत्वपूर्ण फ़िल्म मानी जा रही है. इस फ़िल्म में आपने हिंदी में लंबे-लंबे संवाद बोले हैं?

मेरी याददाश्त अच्छी है. इसके अलावा बीते कुछ समय से मैंने व्याकरण और हिंदी सुधारने पर काफ़ी मेहनत की है. इसलिए भाषा और संवाद की समस्या नहीं थी. हर फ़िल्म और भूमिका की अपनी मांग होती है. उसे महसूस करना और अपनी जिंदगी से जोड़कर विश्वसनीय बनाना मायने रखता है. मैं अपनी तमाम फ़िल्मों में यही प्रयास करती हूं.

क्या फ़िल्म में आपका किरदार सोनिया गांधी से प्रभावित है?

ऐसा नहीं है. फ़िल्म में साड़ी पहनने की वजह से लोगों को लगता है कि मैं शायद सोनिया गांधी की भूमिका में हूं. लेकिन हक़ीकत कुछ और है. फ़िल्म में ऐसी कोई समानता नज़र नहीं आएगी.

खेलों में भी आपकी रुचि है?

Image caption ‘दे दनादन’ उनकी आने वाली फ़िल्म है.

मुझे बॉस्केट बाल पसंद है. खिलाड़ियों की एकता और टीम भावना से काफ़ी कुछ सीखा जा सकता है. बीते साल आईपीएल फ़ाइनल देखना एक यादगार अनुभव था.

आपकी आने वाली फ़िल्में?

मेरी अगली फ़िल्म प्रियदर्शन की ‘दे दनादन’ है. मैंने दूसरी फ़िल्म भी साइन की है. लेकिन फ़िलहाल इसके राज़ को खोल नहीं सकती.

अपने करियर में शायद पहली बार आपने अजब प्रेम....में हमउम्र हीरो के साथ काम किया है. क्या इसका अनुभव कुछ अलग रहा?

हां, पहले सेट पर मुझे अपने साथी कलाकारों को ‘सर’ कहना पड़ता था. लेकिन अजब प्रेम... की शूटिंग के दौरान मुझे ऐसा नहीं करना पड़ा. हमउम्र हीरो के साथ फ़िल्में करने पर अपने आप एक सहजता आ जाती है.रणबीर काफ़ी मस्त स्वभाव के हैं. उनमें कोई ईगो नहीं है. इसलिए उनके साथ काम करना काफ़ी आसान रहा.

आपको अब नंबर वन की दावेदार माना जा रहा है?

मेरा मकसद नंबर वन बनना नहीं बल्कि बेहतर अभिनय करना है. मैं सिर्फ अच्छी फ़िल्में करना चाहती हूं. मैं नंबरों के इस खेल में नहीं पड़ना चाहती.

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