एक मुलाक़ात लकी अली के साथ

लकी अली
Image caption लकी अली ने फ़िल्मों में अभिनय किया है और गाने भी गाए हैं

बीबीसी हिंदी सेवा के विशेष कार्यक्रम 'एक मुलाक़ात' में हम भारत के जाने-माने लोगों की ज़िंदगी के अनछुए पहलुओं से आपको अवगत कराते है. इस हफ़्ते हमारे मेहमान हैं गायक लकी अली.

सबसे पहले, आपके परिवार में एक से एक बढ़कर कलाकार रहे हैं. आपके पिता खुद इतने बड़े हास्य कलाकार थे, आपकी आंटी मीना कुमारी को ट्रेजेडी क्वीन कहा जाता है. बचपन में इन सबसे कैसे प्रभावित हुए?

दरअसल, मेरे पिता ने हमें कभी फ़िल्मों के लिए बढ़ावा नहीं दिया. हालाँकि मेरी खाला मीना कुमारी और माँ माधुरी फ़िल्मों में थी, लेकिन हमारे माता-पिता हमें फ़िल्मों से दूर रखते थे. हाँ कभी-कभी पिकनिक के तौर पर फ़िल्मों की रिकॉर्डिंग देखने के लिए चले जाया करते थे.

लेकिन कहीं न कहीं मन में ये शौक तो रहता ही होगा कि चलें देखते हैं, फ़िल्में आख़िर बनती कैसी हैं?

हाँ, बिल्कुल. कम से कम मुझे तो बहुत शौक था. मुझे गाना गाना पसंद था. मुझे याद है कि एक बार किशोर कुमार पड़ोसन का गाना रिकॉर्ड कर रहे थे. आर डी बर्मन भी वहां थे और उस हॉल में 150-200 म्यूजीशियन रहे होंगे. तो मुझे गाने का शौक था.

आपने पड़ोसन की बात कर रहे हैं तो वो कौन सा गाना था जो रिकॉर्ड हो रहा था?

वो गाना था ‘मेरे सामने वाली खिड़की में...’. इसके अलावा ‘एक चतुर नार’ भी मुझे पसंद है.

अच्छा ये बताएँ, आपके पिता महमूद की कौन सी फ़िल्म या भूमिका थी जो आपको बहुत पसंद थी?

मुझे मेरे पिता की बहुत सी भूमिकाएँ पसंद हैं. प्यार किए जा, दिल तेरा दीवाना, पड़ोसन, कुआंरा बाप, लव इन टोक्यो, ज़िद्दी, हमजोली और बहुत सारी फ़िल्मों में उनकी भूमिकाएँ मुझे बहुत पसंद हैं. वो चीज़ों को ठीक उसी तरह लेते थे, जैसा वे उन्हें देखते थे. जो उनके दिल में होता था, वही उनकी ज़ुबान पर भी होता था.

अच्छा लकी अली, अपने बचपन के बारे में कुछ बताएँ?

मेरे पिता कहते थे कि मैं बहुत मस्ती करता था. तब मैं महज ढ़ाई साल का रहा हूँगा, तब मुझे मसूरी के एक बोर्डिंग स्कूल भेज दिया गया. उस स्कूल में मैं सबसे छोटा था. जब मैं पहली बार घर वापस आया तो पिता के अलावा परिवार के सभी लोगों को भूल चुका था.

दरअसल, हुआ ये कि जब मैं बोर्डिंग से घर वापस जा रहा था तो मेरे दादा ने मुझे एक तस्वीर दिखाते हुए कहा कि ये तुम्हारे पिता हैं. जब हम मुंबई एयरपोर्ट में उतरे तो वहाँ मेरा पूरा परिवार खड़ा था, लेकिन मैंने सिर्फ़ अपने पिता को पहचाना.

हमारा बहुत बड़ा परिवार था. हम सब साथ में रहते थे. मैं तीन महीने के लिए घर आता था और फिर बोर्डिंग स्कूल चला जाता था. ये सिलसिला कोई 11 साल तक चला. फिर हम बैंगलोर चले गए. वहाँ हमारा फॉर्म हाउस था. रेस में दौड़ने वाले घोड़ों का फॉर्म भी था, कोई 150 घोड़े रहे होंगे. फिर जब पिताजी बीमार हो गए तो उन्होंने घोड़े का ये फॉर्म बंद करने के लिए कहा.

आप बोर्डिंग से आते थे तो क्या वापस जाते हुए कहते थे कि नहीं मुझे बोर्डिंग नहीं जाना?

मुझे हमेशा लगता था कि मैं मेहमान हूँ. थोड़े दिनों के लिए आया हूँ और फिर वापस चला जाऊँगा. लेकिन मेरे माता-पिता ने जो भी मुझे सिखाया मुझे उस पर गर्व है.

महमूद साहब आपको क्या ख़ास बात सिखाते थे?

वो मुझसे नमाज़ पढ़ने के लिए कहते थे. उनका कहना था कि हम जो भी काम करते हैं वो सीढ़ी की तरह है. जब आप ऊपर चढ़ रहे हो तो सबकी इज़्ज़त करो. अगर ऊपर अपनी जगह बना सकते हो तो ज़रूर बनाओ. लेकिन अगर जगह नहीं बना पाए तो नीचे आते वक़्त लोग आपको बहुत इज्जत देंगे.

तो ऐसा नहीं है कि जैसा महमूद साहब फ़िल्मों में दिखते थे वैसे नहीं थे, बल्कि बहुत सोचने-विचारने वाले थे?

वो ज़मीन से जुड़े इंसान थे. उन्होंने जो भी किया अपने दम पर किया. हालाँकि उनके पिता मुमताज़ अली काफी प्रसिद्ध कलाकार थे. पहले लोग कहते थे कि वे मुमताज़ अली के बेटे हैं. और बाद में वो दिन भी आया जब लोग ये कहते थे कि मुमताज़ अली महमूद साहब के पिता हैं.

कुछ ऐसा ही मेरे साथ भी हुआ. न्यूयॉर्क में जब मेरे पिता ने मुझे अवॉर्ड दिया तो मैंने लोगों को बताया कि ये मेरे पिता हैं.

और जब आप बोर्डिंग वापस लौटते थे तो दूसरे बच्चे आपके साथ कैसा व्यवहार करते थे?

मैं उस स्कूल में इकलौता सैलेब्रेटी का बेटा था. मेरे कई अच्छे दोस्त थे. स्कूल के बाद हालाँकि उनसे संपर्क तो नहीं रहा, लेकिन मुझे उनकी याद अब भी है. लड़कों को पता था कि मैं महमूद का बेटा हूँ, लेकिन व्यवहार कुछ विशेष नहीं था.

तो आपने 13 साल की उम्र में संगीत सीखना शुरू किया?

मेरी सौतेली मां, जो कि अमेरिका से हैं, उन्होंने मुझे गिटार दिया. फिर मैंने खुद गिटार सीखने की कोशिश की. मुझे उम्मीद नहीं थी कि मैं गायक या संगीतकार बनूँगा.

मैं संगीत को प्यार करता हूँ, लेकिन ये मेरा जीवन नहीं है. जीवन में कुछ और भी करना चाहता हूँ. मैं धुन में नहीं रहता हूँ. धुन मुझ तक चलकर आती हैं. मैं धुन के साथ रहता हूँ.

संगीत की तरफ आपका रुझान कैसे हुआ?

संगीत का शौक तो मुझे था ही. मैंने कुछ गाने बनाए थे. मैंने सोचा कि एलबम बनाया जाए. मैं रिकॉर्डिंग कंपनियों के पास गया तो उन्होंने कहा कि ये गाने पॉपुलर नहीं हैं, इसलिए एलबम नहीं बनेगा. फिर में अमिताभ बच्चन की एबीसीएल के पास गया. वहाँ मेरे गाने लगभग छह महीने तक पड़े रहे. मैंने फिर इन्हें वापस मांगा और एक नई कंपनी बीएमजी को ये गाने दिए. उन्होंने कहा कि हम एलबम रिलीज़ तो करेंगे, लेकिन आपको खुद ही वीडियो बनाने होंगे. तो इस तरह ये एलबम निकला.

आपकी एलबम सुनो के बाद आप चार-पाँच साल के लिए गायब से हो गए. क्या हो गया था?

मेरे पिता के इंतकाल के बाद मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ. मैं अपने पिता को कुछ करके दिखाना चाहता था. तो मैं इन सालों में गाने तो रिकॉर्ड करता रहा, लेकिन मैंने इन्हें रिलीज़ नहीं किया. मैं खुद इनकी स्क्रीनिंग करता रहा. फिर मैंने नया एलबम जारी किया. 19 सितंबर को मैंने एलबम ऑनलाइन जारी किया. आप इसे मोबाइल या कंप्यूटर पर डाउनलोड कर सकते थे, लेकिन इसकी सीडी बाज़ार में उपलब्ध नहीं है.

ऐसा क्यों किया आपने?

ऐसा इसलिए, क्योंकि इसमें म्यूजिक रिकॉर्ड कंपनियां शामिल हो जाती हैं. वो सीडी तो बेचते हैं, लेकिन कलाकार को पैसा नहीं देते. उनसे हिसाब माँगना पड़ता है. तो एक कलाकार के लिए ऐसा करना बहुत ख़राब लगता है कि वो अपने गानों के लिए हिसाब माँगे. तो इस कारण मैंने इस एलबम को ऑनलाइन जारी किया.

आप संगीत भी खुद ही तैयार करते हैं?

हाँ मैं और मेरी यूनिट संगीत तैयार करती है. एलबम ‘सुनो’ से ही ये यूनिट मेरे साथ है.

फिर बीच में आपने फ़िल्मों में अभिनय भी किया?

हाँ, मैंने सुर में अभिनय किया. ऐसी कुछ फ़िल्में होती हैं जो लीक से हटकर होती हैं. इसकी कहानी भी अच्छी थी और गाने भी. आजकल तो लोगों का ज़ोर इस बात पर है कि तीन दिन में कितना कमा सकते हैं.

आपको अभिनय पसंद है या गाना?

मुझे संगीत और गाना अधिक पसंद है. संगीत एक सफर की तरह है. अभिनय मेरे लिए एक चुनौती की तरह है.

एक गाने के लिए तो आपको पार्श्वगायकी का फ़िल्मफेयर पुरस्कार भी मिला है?

हाँ, लेकिन मैंने इसे लिया नहीं. क्योंकि मैं अवॉर्ड आदि पर यकीन नहीं करता. मैं चाहता हूँ कि लोगों से मुझे सम्मान और आदर मिले. मैं इसे कई सालों से देख रहा हूँ. मेरे पिता को चार फ़िल्मफेयर अवॉर्ड मिले.

मैं मौजूदा बॉलीवुड का हिस्सा नहीं बनना चाहता. आज तो सिनेमा प्रपोजल जैसा बनता है. मैं इस बाज़ार का हिस्सा नहीं बनना चाहता.

मेरे लिए सबसे बड़ा पुरस्कार ये है कि आपके काम को लोगों ने पसंद किया और आपको प्यार दिया.

आपने इतने गाने गाए हैं. लेकिन आपका पसंदीदा गाना?

मुझे मेरे सारे गाने पसंद हैं. मैं उन्हें तभी जारी करता हूँ, जब उन्हें पसंद करता हूँ.

आपके पसंदीदा संगीत निर्देशक?

भारतीय संगीतकारों में एसडी बर्मन, आरडी बर्मन, मदनमोहन, शंकर जयकिशन, लक्ष्मीकांत प्यारेलाल, रवि मुझे पसंद हैं. आज के संगीत निर्देशकों में मुझे विशाल शेखर, एआर रहमान पसंद हैं.

पार्श्वगायकों में कौन पसंद है?

मौजूदा गायकों में मुझे सोनू निगम, कुणाल, शान, केके पसंद हैं. नए पार्श्वगायकों में माउली दवे बहुत प्रतिभावान हैं.

आपका आदर्श गायक है कोई?

नहीं मेरा कोई आदर्श नहीं है और न ही कभी कोई मेरा आदर्श बनेगा.

आपको लगता है कि किसी ख़ास अभिनेता के साथ आपकी आवाज़ फिट बैठती है?

सही कहूँ तो मुझे ये कुछ अजीब सा लगता है. मैं नहीं समझता कि मेरी आवाज़ किसी ख़ास अभिनेता पर फिट बैठती है.

लकी अली के इतने चाहने वाले हैं. कौन से कॉम्प्लीमेंट हैं जो आपको याद हैं?

एक ऐसा कॉम्प्लीमेंट है जो मुझे बहुत याद है कि आपने सुर में बेसुरा गाया है.

लकी अली के और क्या शौक हैं?

मुझे खेती करना पसंद है. मैं लड़कियों की शिक्षा के लिए कुछ करना चाहता हूँ. बंगलौर में मैंने स्कूल खोला है. क्योंकि मेरा मानना है कि अगर आप एक लड़की को पढ़ाते हैं तो पूरे परिवार को शिक्षित करते हैं, जबकि अगर एक लड़के को पढ़ाते हैं तो सिर्फ़ एक को शिक्षित करते हैं.

आपका स्कूल बंगलौर में है, आप मुंबई में है. आप अपना समय कैसे बाँटते हैं?

मैं बंगलौर जाता हूँ. न्यूज़ीलैंड भी जाता हूँ. मेरा परिवार न्यूज़ीलैंड में ही रहता है. दरअसल, मेरी पत्नी न्यूज़ीलैंड की ही हैं. मेरा बेटा 13 साल का है और बेटी 11 साल की है. वे वहीं पढ़ाई करते हैं. पढ़ाई ख़त्म करने के बाद वे वापस भारत आएँगे.

इसके अलावा कन्सर्ट के लिए भी जाते रहते हैं. अभी एक महीना पहले ही हम चीन गए थे फिर मॉरीशस भी गए.

आप खुद को कैसे परिभाषित करेंगे?

मैं खुद को अभी तक ढूँढ रहा हूँ. जब तक जीवन है तब तक आप खुद को ढूँढते रहते हैं. मैं बहुत गंभीर किस्म का इंसान नहीं हूँ, लेकिन बातों को बहुत गंभीरता से लेता हूँ.

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