'किताब पर विवाद मीडिया की तरफ़ से'

  • 20 नवंबर 2009
ओम पुरी

ओम पुरी फ़िल्मी दुनिया के उन कलाकारों में हैं जिन्होंने जहां एक तरफ हिंदी फिल्म जगत में अपना ज़बरदस्त नाम कमाया है वहीं अंतरराष्ट्रीय सिनेमा में भी कामयाब रहे हैं.

लेकिन अब उनकी पत्नी नंदिता पुरी ने उनकी जीवनी लिखी है जिसकी वजह से वो काफ़ी चर्चा में है. अनलाइकली हीरो:ओम पुरी नाम की इस किताब के बारे में और सिनेमा में अपने करियर के बारे हाल ही में उन्होंने बीबीसी संवाददाता दुर्गेश उपाध्याय से एक लंबी बातचीत की.

पेश है बातचीत के मुख्य अंश -

ये जो आपकी बॉयोग्राफी आई है जिसे आपकी पत्नी नंदिता पुरी ने लिखा है,कैसी लगी आपको ये किताब.

मैने अभी ये किताब पूरी पढ़ी नहीं है,मैने कुछ हिस्से पढ़े हैं और जो पढ़े हैं वो अच्छे लगे.

नंदिता जी अच्छी लेखिका हैं उनकी पहले भी किताब छपी है कहानियों की, बीस साल से वो पत्रकार हैं और अभी एक ऐतिहासिक उपन्यास वो लिख रहीं हैं और मुझे पूरा भरोसा है कि वो भी अच्छी होगी.

इस किताब को लेकर कुछ विवाद भी हो गया है, आपकी प्रतिक्रिया जानना चाहेंगे..

कोई विवाद नहीं है, जो भी विवाद है वो मीडिया की तरफ से है, हमारा कोई विवाद नहीं है.

जो किताब है उसमें उन्होंने कुछ सनसनीखेज़ चीजें उठाईं और फिर उन्हें बार बार दोहराया और कुछ नहीं.

ऐसा माना जाता है आपकी शुरुआत समानान्तर सिनेमा से हुई तो सबसे पहले तो ये बताईये कि क्या आप इस तथाकथित समानान्तर और कमर्शियल सिनेमा के भेदभाव को मानते हैं?

जी नहीं,बिल्कुल नहीं.ये मीडिया का बनाया हुआ अंतर है.

अगर हम देखें पचास और साठ के दशक में जब विमल रॉय,वी.शांताराम और गुरुदत्त ने जो फिल्में बनाईं जो सामाजिक संदर्भ लेकर बनाईं गईं, उसे हम सिर्फ अच्छा सिनेमा कहते थे.

उस वक्त अलग अलग किस्मों की फिल्में जैसे ऐतिहासिक फिल्में,सामाजिक फिल्में,हास्य फिल्में लेकिन कहीं ये नहीं था कि ये समानान्तर फिल्म है वो कमर्शियल फिल्म.

अच्छा ये बताइये कि फिल्मों में कैसे शुरुआत हुई थी और कैसे थे वो दिन?

देखिए जब हम यहां आए थे तो हमारी यहां कोई पहचान नहीं थी यहां. बस इतना था कि तीन साल राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय और दो साल फिल्म एंड टेलीविज़न ऑफ इंडिया में.

फिल्म एंड टेलीविजन ऑफ इंडिया को लोग जानते थे राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय को कोई नहीं जानता था, आजकल सभी लोग जानते हैं और अब तो इंडस्ट्री में काफी लोग वहां से आकर काम कर रहे हैं.

लेकिन केवल मैं और नसीरुद्दीन शाह ही आए. हमारी शुरुआत तथाकथित समानान्तर फिल्मों से जिन्हें हम सामाजिक फिल्में कहते हैं उसी से हुई.

इन फिल्मों के लिए सिंथेटिक चेहरों की जरुरत नहीं होती और शायद हम उसमें फिट होते थे क्योंकि ऐसी फिल्मों में आम लोगों की बातें होतीं थीं. जो गोविंद निहलानी, सत्यजीत रे और श्याम बेनेगल बनाया करते थे जिसमें साधारण व्यक्तित्व होते थे.

अपने कैरिएर के शुरुआती पन्द्रह सालों में मैने ऐसी ही फिल्मों में काम किया फिर धीरे-धीरे कमर्शियल सिनेमा में कदम रखा, क्यों कि समानान्तर फिल्मों में धन नहीं था और अच्छा जीवन जीने के लिए इसकी काफी जरुरत होती है इसीलिए धीरे धीरे कमर्शियल सिनेमा करने लगा. मैं दोनों ही तरह की फिल्मों का शुक्रगुज़ार हूं.

ओमपुरी साब,ये बताईये कि पहली फिल्म कैसे मिली थी और कैसा अनुभव रहा था?

पहली फिल्म मेरी जो थी जब मैं फिल्म इंस्टीट्यूट में पढता था और पहला वर्ष पास कर गया था. वो बच्चों की एक फ़िल्म थी जिसे चिल्ड्रन्स फिल्म सोसाइटी ने बनाई थी जिसका निर्देशन किया था बीबी कारंत ने और उसका नाम था 'चोर चोर छुप जा'. तो ये थी मेरी पहली फिल्म.

फिल्मों में रुचि क्या बचपन से थी या बड़े होने पर ये शौक विकसित हुआ?

देखिए बचपन में कुछ नाटकों में हिस्सा तो जरुर लिया था लेकिन तब तक ये तय नहीं था कि फिल्मों में ही जाना है.

दरअसल मेरी फ़ौज में जाने की इच्छा थी लेकिन जब मैं कॉलेज में आया तो धीरे धीरे फ़ौज में जाने का बुखार उतरता गया और फिल्मों की तरफ रुझान बढता गया.

वहां पर एक हरपाल टिवाना और उनकी पत्नी का थिएटर ग्रुप था कलामंच नाम से, उन्होंने मुझे अपने यहां काम करने की दावत दी और मैंने उनके साथ मिलकर कई नाटकों में काम किया और आखिरकार राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय आ गया.

आप ऐसे कलाकार हैं जिन्होंने देश ही नहीं बाहरी फिल्मों में भी काफी काम किए हैं, तो ये बताइये कि अंतर्राष्ट्रीय फिल्मों से कैसे जुड़ाव शुरु हुआ?

वर्ष 1981 में आक्रोश आई थी. उसके बाद एक टेलीविजन सीरियल बना था ज्वैल इन द क्राउन.

उस समय जेनिफर कपूर,शशि कपूर जी की पत्नी उन्होंने मेरा नाम सुझाया था और मैने उस सीरियल के तीस एपिसोड्स में काम किया था तो वो मेरा पहला परिचय था अंतरराष्ट्रीय कला जगत से.

उसके बाद गांधी आई उसमें हिस्सा लिया और फिर सिटी ऑफ ज्वॉय आई जो कि एक बड़ी अमरीकन फ़िल्म थी जिसमें अमरीकन स्टार था पेट्रिक स्वेज़ी जिनका हाल ही में निधन हुआ है. उस फिल्म में मेरा बड़ा रोल था और उसमें मुझे काफ़ी सराहना मिली.

अच्छा ये बताइये कि इतने लंबे कैरिएर में आपने कई नामचीन कलाकारों के साथ काम किया है, किसका काम आपको बेहतरीन लगा?

देखिए, सराहना मैं उसकी करता हूँ जो लगातार अच्छा काम करे. लगातार अच्छा काम करने वालों में कमल हासन और आमिर खान हैं साथ ही नसीरुद्दीन शाह को तो मैं अपने जैसा ही मानता हूं.

आने वाले दिनों में कौन कौन सी फ़िल्में देखने मिलेंगी?

अभी हाल ही में कुर्बान जिसमें कि सैफ अली खान और करीना कपूर मुख्य भूमिका में हैं वो आएगी और बीबीसी द्वारा बनाई जा रही फिल्म वेस्ट इज वेस्ट की भी शूटिंग शुरु होने वाली है.

ये फिल्म पहली फिल्म, ईस्ट इज ईस्ट का सिक्वल है और एक अंग्रेजी फिल्म है जिसकी कुछ शूटिंग पंजाब में और कुछ हिस्सा इंग्लैंड में शूट होना है.

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