जब दुनिया ने कहा जय हो..

करीब दो साल पहले लंदन के बीबीसी स्टूडियो में शशि थरूर का आना हुआ (जो तब राजनयिक थे अब भारत के विदेश राज्य मंत्री हैं).बीबीसी को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि भारत को सुपरपावर नहीं महान साफ़्टपावर बनना चाहिए और इसमें भारत की सांस्कृतिक विविधिता बड़ी भूमिका निभा सकती है.

वर्ष 2009 में जिस कदर भारतीयों ने कला और मनोरंजन की दुनिया में ग्लोबल स्तर पर नाम कमाया, उसी देखकर साफ़्टपावर की बाद याद हो आई.

इस साल संगीतकार एआर रहमान संगीत की दुनिया में सैलाब बन कर आए और देखते ही देखते पूरी दुनिया पर छा गए.

भारत ने तो 1992 में फ़िल्म रोज़ा के साथ चेन्नई के रहमान का हुनर पहचान लिया था लेकिन 2009 में पूरी दुनिया चेन्नई के मोत्ज़ार्ट की जय हो करती हुई नज़र आई. बाफ्टा, गोल्डन ग्लोब और ऑस्कर जीतकर रहमान ने इतिहास रच दिया. ऐसा करने वाले वे पहले भारतीय बने.

ऑस्कर स्पीच भी उन्होंने अपने ही अंदाज़ में दी. उन्होंने कहा था, "देयर इज़ ए फ़ेमस डॉयलॉग इन इंडिया- मेरे पास माँ है...अगर मेरे पास कुछ भी नहीं है तो भी यहाँ मेरा पास माँ है. मैं अपनी माँ का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं. पूरी ज़िंदगी मेरे सामने दो विकल्प थे-नफ़रत या प्यार. मैने प्यार को चुना. और आज मैं यहाँ तक पहुँच गया हूँ."

भले ही तमाम अंतरराष्ट्रीय समारोहों के मेज़बान ठीक से रहमान के नाम का उच्चारण भी न कर पाए हों, रहमान को रहमन बोल रहे हों, लेकिन हर छोटे बड़े आयोजन में उन्हें सम्मानित करने की होड़ नज़र आई. जय हो वो गान बना जो देश, भाषा, संस्कृति, सरहद को लाँघते हुए एक अंतरराष्ट्रीय स्लोगन बन गया.

'जय हो' पर थिरकते फ़िलिपींस के क़ैदियों का वीडियो यू ट्यूब पर ज़बरदस्त हिट हुआ तो स्पेन के गायकों द्वारा गाया जय हो के वीडियो ने भी ख़ूब हिट बटोरे,

रहमान 2009 में टोस्ट ऑफ़ हॉलीवुड रहे और वे कुछ हॉलीवुड फ़िल्मों में संगीत भी दे रहे हैं. हालांकि कुछ लोग मानते हैं कि रहमान ने 'जय हो' से बेहतर संगीत भारतीय फ़िल्मों में दिया है और दुनिया ने उन्हें देर से पहचाना. ख़ैर देर आए दुरुस्त आए.

ग्रैमी में नामांकन

भारत हमेशा से अपने गीत-संगीत के लिए जाना जाता रहा है. पिछली बार उस्ताद ज़ाकिर हुसैन ने ग्रैमी जीता तो इस बार उस्ताद अमजद अली खान और एआर रहमान ग्रैमी के लिए नामांकित हुए हैं.

2009 में आठ ऑस्कर जीतने वाली फ़िल्म स्लमडॉग मिलियनेयर ने मिस्टर इंडिया यानी अनिल कपूर को भी अंतरराष्ट्रीय मंच दिया. स्लमडॉग के आने के बाद वे अमरीका के मशहूर टीवी शो 24 में काम कर रहे हैं.

इसी फ़िल्म ने चंद और सितारों को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई. स्लमडॉग में लतिका के छोटे से किरदार के ज़रिए भारत की फ़्रीडा पिंटो अपनी पहली ही फ़िल्म में छा गईं. 2009 की तमाम अवॉर्ड समारोहों में रेड कार्पेट पर उनका जलवा रहा. वे वुडी ऐलन जैसी हॉलीवुड के निर्देशकों के साथ काम कर रही हैं. उन्होंने भले ही एक भी पुरस्कार न जीता हो लेकिन सबसे ख़ूबसूरत, सबसे सेक्सी...ऐसी तमाम सूचियों में उनका नाम रहा. उनके और देव पटेल के फ़ोटो हर टैबोलॉयड के कवर पेज पर रहे.

रसूल पोकुट्टी ने स्लमडॉग के लिए साउंड मिक्सिंग का ऑस्कर जीतकर इस विधा को भारत में पहचान दिलाई.

नन्हे सितारे

दो नन्हें भारतीय सितारों को भी इस साल पूरी दुनिया ने सर आँखों पर बिठाया- स्लमडॉग के बाल कलाकार अज़हर और रूबीना. असल ज़िंदगी में झुग्गियों में रहने वाले इन बच्चों का ऑस्कर तक का सफ़र किसी सुंदर सपने से कम नहीं था. लेकिन ऑस्कर से लौटने के बाद दोनों का सामना एक फिर हकीकत से हुआ.

ख़बर आई कि दोनों की झुग्गियाँ तोड़ दी गई हैं क्योंकि वे अवैध हैं. दावे और वादे हुए कि बच्चों को नया घर दिया जाएगा, दोनों के लिए जय हो ट्रस्ट बनेगा. इन आरोपों से सनसनी मच गई कि रूबीना के पिता ने पैसों के लिए उसे बेचने की कोशिश की. ख़ैर अब अज़हर को नया फ्लैट मिल गया है. दोनों बच्चों के हॉलीवुड की फिल्म में एंथनी हॉप्किंस के साथ काम करने की भी ख़बरे हैं.

इसी साल पेरिस के मशहूर सलों ड्यू सिनेमा फ़ेस्टिवल में अमिताभ बच्चन की फ़िल्मों का रेट्रोस्पेक्टिव भी आयोजित हुआ और उन्हें दुबई फ़िल्म फ़ेस्टिवल में लाइफ़टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड मिला.

लता मंगेशकर को फ़्रांस ने अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिया.

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