डबल रोल करना चाहती हैं सोहा अली ख़ान

सोहा अली ख़ान

सोहा अली ख़ान को हाल ही में दर्शकों ने इमरान हाशमी के साथ फ़िल्म ‘तुम मिले’ में देखा था.

2004 में सोहा ने अपने फ़िल्मी करियर की शुरुआत ‘दिल मांगे मोर’ से की थी और तब से आज तक उन्होंने पंद्रह से ज़्यादा फ़िल्में की हैं. वो अपने करियर से काफ़ी ख़ुश हैं.

सोहा कहती हैं, “मुझे जिस तरह के रोल करने और सुधीर मिश्रा, राकेश ओमप्रकाश मेहरा, रितुपर्णो घोष जैसे अच्छे निर्देशकों के साथ काम करने के मौके मिल रहे हैं, मैं चाहती हूं कि आने वाले साल में भी ऐसे ही मौके मिलते रहें.”

सोहा का कहना है, “मेरी ख़्वाहिश थी कि मैं ऐक्टर बनूं और मैं आज वो कर रही हूं इसलिए मैं ख़ुश हूँ. लेकिन मैं महत्वाकांक्षी भी हूं और अभी मुझे बहुत आगे जाना है.”

सोहा का कोई एक ड्रीम रोल नहीं है. वो कहती हैं, “मैं एक ऐसा किरदार निभाना चाहूंगी जो पूरी तरह से न तो अच्छा है और न ही बुरा है. अगर किरदार थोड़ा नकारात्मक हो तो ज़्यादा दिलचस्प होगा.”

सोहा कहती हैं, “मैंने किसी ख़ास रोल के बारे में सोचा नहीं है लेकिन हां, डबल रोल करना चाहूंगी. इसे करने में बहुत मज़ा आएगा.”

तो कैसे रोल चुनती हैं सोहा? इस बारे में सोहा कहती हैं,सबसे पहले तो कहानी में कुछ दम होना चाहिए.लेकिन मेरे लिए सबसे अहम मेरा रोल होता है. मैं ये देखती हूं कि क्या मैं इस रोल से कुछ सीखूंगी या फिर उस रोल के ज़रिए छाप छोड़ पाउंगी.”

सोहा के बड़े भाई सैफ़ अली ख़ान अब प्रोड्यूसर भी बन गए हैं और उनकी पहली प्रोड्क्शन लव आजकल काफ़ी सफल रही. सैफ़ की फ़िल्म में काम करने के बारे में सोहा कहती हैं, “अगर मुझे सैफ़ के साथ काम करने का मौका मिला तो मुझे अच्छा लगेगा. मैं चाहती हूं कि मुझे जो कुछ भी करना है मैं ख़ुद ही करुं. हमारे परिवार में सभी बहुत स्वतंत्र हैं. हां भावनात्मक स्तर पर हम हमेशा एक दूसरे के लिए मौजूद होते हैं.”

निजी ज़िंदगी

सोहा अली ख़ान के पिता मंसूर अली ख़ान पटौदी पूर्व क्रिकेटर हैं. उनकी मां शर्मिला टैगोर और बड़े भाई सैफ़ अली ख़ान अभिनेता हैं. सोहा कहती हैं कि पूरे परिवार को एक साथ समय बिताने का मौका बहुत कम मिलता है. इसलिए वो पल जब सारा परिवार एक साथ होता है, वो उन्हें बहुत अच्छे लगते हैं.

हर व्यक्ति को किसी-न-किसी काम से डर लगता है. सोहा कहती हैं कि वो ज़िंदगी में कभी भी बंजी जंपिंग नहीं करना चाहतीं. सोहा कहती हैं, “मुझे ऊंचाई से डर लगता है. मुझे समझ नहीं आता कि लोग कैसे कूद सकते हैं.”

ऐसा नहीं है कि बंजी जंपिंग से डरनी वाली सोहा ने कभी भी कोई जोखिम वाला काम न किया हो. इस बारे में सोहा बताती हैं, “ मैंने इंग्लैंड से पेरिस तक हिचहाइकिंग की है. हालांकि मैं एक दोस्त के साथ थी मगर फिर भी थोड़ा डरी हुई थी. ये हिचहाइकिंग एक चैरिटी के लिए पैसा जमा करने के लिए की गई थी. लेकिन मैं किसी को भी अनजान लोगों के साथ गाड़ी में बैठने की सलाह नहीं दूंगी.”

सोहा को घूमने का बहुत शौक है और वो चाहती हैं कि हर साल दुनिया की एक नई जगह देखें.

अपनी सबसे अमूल्य चीज़ों में सोहा किताबों का नाम लेती हैं. वो कहती हैं, “मेरे घर में बहुत बड़ी लाइब्रेरी है और मेरी किताबें मेरे दिल के बहुत करीब हैं.”

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