अकेले फ़िल्म देखने का इनाम पांच लाख

रामगोपाल वर्मा
Image caption वर्मा की फ़िल्म अकेले में देखने के लिए इनाम तो है लेकिन शर्तें कड़ी हैं

अगर आप एक हिंदी हॉरर फ़िल्म को सिनेमाघर में अकेले बैठकर बिना डरे देख पाएं तो आप पांच लाख रुपए जीत सकते हैं. फ़िल्म है निर्माता राम गोपाल वर्मा की फूंक-2.

वर्मा की चुनौती कुछ यूं है, “जो भी ये कहता है कि वो अकेले फूंक-2 देख सकता है उसे अकेले सिनेमा हॉल में बैठाया जाएगा, और अगर आप आख़िर तक देखते रहें तो वो इनाम जीत सकता है”

लेकिन ये इतना आसान नहीं जितना कि लगता है. इस चुनौती की स्वीकारने वाले दर्शक डर रहे हैं या नहीं इसपर बारीकी से नज़र रखी जाएगी.

राम गोपाल वर्मा कहते हैं, “ इस चुनौती को हम थोड़ा वैज्ञानिक बना रहे हैं. हम चुनौती स्वीकराने वाले व्यक्ति के दिल की धड़कनों पर ईसीजी द्वारा नज़र रखेंगे. और अगर वो व्यक्ति डरेगा तो हमें उसकी बढ़ी हुई ह्रदय गति से पता चल जाएगा. ईसीजी के मॉनिटर को मीडिया और जो भी देखना चाहे वो शो के दौरान देख भी सकता है.”

इतना ही नहीं ये सुनिश्चित करने के लिए कि व्यक्ति शो के दौरान अपनी आंखें बंद तो नहीं कर रहा है, एक नाइट विज़न कैमरा उस पर निगाह रखेगा.

फूंक श्रृंखला की पहली फ़िल्म में भी ऐसी ही चुनौती रखी गई थी.

फ़िल्म

Image caption फूंक तो वर्मा ने ख़ुद निर्देशित की थी लेकिन फूंक-2 का निर्देशन मिलिंद गडगकर

निर्माता राम गोपाल वर्मा ने 'फूंक' तो ख़ुद निर्देशित की थी लेकिन 'फूंक-2' के निर्देशन का जिम्मा उन्होंने मिलिंद गडगकर को दिया है.

ख़ुद 'फूंक' का निर्देशन नहीं करने पर राम गोपाल वर्मा कहते हैं, “मिलिंद 'फ़ूंक' में भी मेरे साथ थे और 'फूंक- 2' का सारा कंसेप्ट उन्हीं का था इसलिए निर्देशन उन्होंने ही किया.”

वर्मा कहते हैं कि एक हॉरर फ़िल्म बनाने का एक अलग तरीका है जिसमें कलाकारों के अभिनय के अलावा भी कई तत्त्व फ़िल्म को डरावनी बनाने में सहायक होते हैं.

उन्होंने कहा कि मेक-अप, कैमरा, एडिटिंग और बैकग्राउंड संगीत का किसी भी हॉरर फ़िल्म को कामयाब बनाने में बड़ा हाथ होता है

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