घरेलू हिंसा पर मित्तल वर्सेस मित्तल

मित्तल वर्सिज़ मित्तल
Image caption महिलाओं के ख़िलाफ़ घरेलू हिंसा पर बनी फ़िल्म मित्तल वर्सेस मित्तल का हाल ही में म्यूज़िक लॉंच हुआ

घरेलू हिंसा और एक महिला के उसके पति द्वारा ही बलात्कार के विषय पर बनी है फ़िल्म मित्तल वर्सेस मित्तल.

फ़िल्म में मुख्य भूमिकाओं में रोहित रॉय, रितुपर्णा सेनगुप्ता, रीमा लागू, सुचित्रा कृष्णमूर्ति, गुलशन ग्रोवर और अंजन श्रीवास्तव हैं.

इस फ़िल्म के मार्च में रिलीज़ होने की संभावना है.

फ़िल्म के निर्देशक करण राजदान का कहना है कि एक महिला के उसके पति द्वारा ही बलात्कार के बारे में वो भी 2004-2005 तक नहीं जानते थे.

करण राजदान कहते हैं, “मैंने इस बारे में अपनी विदेश यात्रा के दौरान पढ़ा. जब मैं भारत लौटा तब मैंने पता किया कि इस बारे में भारतीय कानून क्या है. मुझे ये जानकर हैरानी हुई कि इसके ख़िलाफ़ भारत में कोई कानून नहीं था.”

करण राजदान के फ़िल्म का निर्देशन करने के साथ ही इसकी कहानी और स्क्रीनप्ले भी लिखा है.

वो कहते हैं, “जब मैं इस फ़िल्म की स्क्रिप्ट लिख रहा था तब घरेलू हिंसा कानून 2005 पास हुआ. मुझे लगता है कि कानून ऐसा होना चाहिए जो महिलाओं को और ज़्यादा सशक्त करे.”

फ़िल्म में करण मित्तल का किरदार निभा रहे रोहित रॉय का कहना है कि फ़िल्म जिस विषय पर बनाई है वो भारत में बहुत आम है. हर चौथे-पांचवे घर में ऐसा होता है लेकिन कोई इस बारे में बात नहीं करता.

रोहित कहते हैं, “मैं करण मित्तल का किरदार निभा रहा हूं जिसे अंदाज़ा ही नहीं है कि वो अपनी पत्नी के साथ क्या कर रहा है. उसे लगता है कि शादी के बाद पत्नी, पति के लिए एक वस्तु हो जाती है जिसे वैसे ही करना होगा जैसा कि पति चाहता है. मैं जो हूं वहीं हूं लेकिन वो पत्नी के लिए ग़लत हो जाता है. लेकिन ये सही नहीं है. तो मित्तल वर्सेस मित्तल उसी लड़ाई के बारे में कहानी है.”

दो बार राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुकीं रितुपर्णा सेनगुप्ता कहती हैं, “एक औरत की ज़िंदगी में जो उतार-चढ़ाव आते हैं, उस बारे में एक झलक दिखाती है ये फ़िल्म.”

अपने किरदार मिताली मित्तल के बारे में रितुपर्णा कहती हैं, “मिताली अपनी शादी को बनाए रखने के लिए बहुत कोशिश करती है लेकिन एक समय आता है जब वो ख़ुद को ऐसे हालात में पाती है जहां उसकी ज़िंदगी पूरी तरह से तबाह हो गई है और वो जानती है कि अब कुछ ठीक नहीं होगा. तब वो कोर्ट में जाने का फ़ैसला लेती है और कैसे वो अपने वकील की मदद से मुक़ाबला करती है.”

रितुपर्णा ये भी कहती हैं कि फ़िल्म इस बारे में काफ़ी जानकारी देती है कि अगर एक औरत के साथ घरेलू हिंसा होती है तो उसके क्या परिणाम हो सकते हैं और उसका क्या उपाय है. वो कहती हैं कि आज की औरत की इस फ़िल्म से जागरुकता बढ़ेगी.

फ़िल्म के निर्देशक करण राजदान कहते हैं, “जब मैं फ़िल्म की शूटिंग कर रहा था तो मेरे इर्द-गिर्द कई ऐसी महिलाएं थीं जो मुझसे कहती थीं कि आपने ये कैसे लिखा, ये तो मेरी कहानी है. तो ये किसी एक महिला की कहानी नहीं बल्कि कई औरतों की सच्ची कहानी पर आधारित है. मैंने बतौर स्क्रीनप्ले राइटर, रितुपर्णा को उन सब का प्रतिनिधि बनाकर फ़िल्म में उतारा है.”

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