जब अतिथि के जाने का हो इंतज़ार...

  • 2 मार्च 2010
अजय और कोंकणा फ़िल्म की निर्माता के साथ
Image caption फ़िल्म 'अतिथि तुम कब जाओगे' की स्टार कास्ट

भारतीय संस्कृति में मेहमान को भगवान का दर्जा दिया गया है लेकिन अगर ये ही मेहमान सिरदर्द बन जाये तो क्या हो?

नई फ़िल्म 'अतिथि तुम कब जाओगे' में कुछ ऐसा ही दिखाने की कोशिश की गई है.

ये अतिथि हैं परेश रावल और इन्हें बड़े पर्दे पर झेल रहे हैं अजय देवगन और कोंकणा सेन शर्मा.

अजय देवगन कहते हैं, "ये बात सही है कि मेहमान का हम हमेशा स्वागत करते हैं लेकिन जब ये मेहमान वापस जाने का नाम ही न ले तो परेशानी खड़ी हो जाती है. मेहमान की मर्यादा ख़त्म हो जाती है."

"हम फ़िल्म में ये नहीं कह रहे कि मेहमान का स्वागत न किया जाए, हम तो केवल ये कह रहे हैं कि उसे अपनी गरिमा और मर्यादा बनाये रखनी चाहिए और वक़्त से लौट जाना चाहिये."

'अतिथि तुम कब जाओगे' में अजय देवगन और कोंकणा सेन शर्मा एक मध्यमवर्गीय दम्पत्ति बने हैं जो बहुत मेहनत करके अपनी गृहस्थी चलाते हैं. और ऐसे में उनके घर में परेश रावल आकर जम जाते हैं और जाने का नाम ही नहीं लेते. इस दम्पत्ति को किन परेशानियों के ज़रिए गुज़रना पड़ता है, यही फ़िल्म की कहानी है.

कोंकणा सेन शर्मा कहती हैं, "फ़िल्म हल्की-फुल्की है और इसमें कई मनोरंजक मोड़ हैं. मैं और अजय समझ ही नहीं पाते कि हम अपने अतिथि से कैसे छुटकारा पाएँ."

"वो ज़माना चला गया जब लोग संयुक्त परिवार में रहते थे और उनके घर में कई मेहमान आते रहते थे. आज स्थिति अलग है. आज पति-पत्नी दोनों काम करते हैं और संयुक्त परिवार में नहीं रहते. ऐसे में एक हद से ज़्यादा मेहमान को रखना मुश्किल हो जाता है."

"मैंने अपने करियर में बहुत अलग-अलग तरह की भूमिकायें की हैं - चाहे वो 'मिस्टर एंड मिसेज़ अय्यर' हो या 'पेज 3' या फिर 'लाइफ़ इन ए मेट्रो'. लेकिन इस तरह की मसाला कॉमेडी फ़िल्म में काम करना भी मेरे लिये एक नया अनुभव है."

फ़िल्म के निर्देशक अश्विनी धीर कहते हैं, "हमारा मकसद है कि ये फ़िल्म सब लोग अपने परिवार और बच्चों के साथ मिलकर देखें. हमने 'अतिथि देवो भव:' वाली कहावत को व्यंग्यात्मक ढंग से देखने की कोशिश की है."

अतिथि तुम कब जाओगे पाँच मार्च को रिलीज़ हो रही है.

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