मुंबई के मिल मज़दूरों पर फ़िल्म

  • 22 अप्रैल 2010
फ़िल्म 'सिटी ऑफ़ गोल्ड' की टीम
Image caption 'सिटी ऑफ़ गोल्ड' मिल कर्मचारियों पर आधारित है

'वास्तव', 'अस्तित्व' और 'विरुद्ध' जैसी फ़िल्में बना चुके फ़िल्मकार महेश मांजरेकर की नई फ़िल्म का नाम है 'सिटी ऑफ़ गोल्ड' जो मुंबई के मिल मज़दूरों पर आधारित है.

फ़िल्म में दिखाया गया है कि कैसे एक समय मुंबई में मिल मज़दूर बहुत सक्रिय थे और मुंबई की प्रगति में उनका कितना बड़ा हाथ था. लेकिन आज उनका कोई नामोनिशान ही नहीं है.

फ़िल्म के अनुसार 80 के दशक में मिल मज़दूरों की हड़ताल के कारण कई मिल और फ़ैक्ट्रियां बंद होने लगीं और उसके बाद लोग उन्हें भूल ही गए.

निर्देशक महेश मांजरेकर कहते हैं, "ये फ़िल्म एक मराठी नाटक पर आधारित है और एक परिवार की कहानी दर्शाती है. इसे एक ऐसे शख्ख ने लिखा है जो ख़ुद एक मिल कर्मचारी रह चुके हैं."

वो बताते हैं,"इस फ़िल्म में कहानी से ज़्यादा अहम इसके किरदार हैं. इसमें दिखाया गया है कि कैसे मिलें बंद हो जाने के बाद कई परिवार बर्बाद हो गए."

महेश मांजरेकर कहते हैं कि इस फ़िल्म की स्क्रिप्ट पढ़ने से पहले उन्हें इस बात का एहसास ही नहीं था कि कैसे लोग मिलें बंद हो जाने के बाद एक तरह से तबाह हो गए.

महेश मांजरेकर चार साल बाद फिर से किसी फ़िल्म को निर्देशित कर रहे हैं और कहते हैं कि उन्हें इसी तरह की कहानी की तलाश थी.

फ़िल्म जुर्म की दुनिया को भी एक अलग नज़रिए से देखती है.

इस फ़िल्म में एक अहम किरदार निभाया है अभिनेत्री सीमा बिस्वास ने.

सीमा कहती हैं, "मैंने इस फ़िल्म में एक ऐसी औरत का किरदार निभाया है जो एक मिल मज़दूर की पत्नी हैं और उसके चार बच्चे हैं. मिल बंद हो जाने के बाद उनपर क्या कुछ गुज़रती और कैसे कुछ लोग ग़लत रास्ते पर निकल पड़ते हैं, यही फ़िल्म की कहानी है."

इस फ़िल्म में सीमा के अलावा विनीत कुमार, समीर धर्माधिकारी, सतीश कौशिक, कश्मीरा शाह और सचिन खेडेकर भी नज़र आएंगे.

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