स्टीरियोटाइप पसंद नहीं:गुरिंदर चड्ढा

भारत हो या ब्रिटेन या फिर अमरीका, महिला फ़िल्मकारों की गिनती आज भी कम ही है. भारतीय मूल की ब्रितानी फ़िल्मकार गुरिंदर चड्ढा ने बतौर निर्देशक अपनी अलग पहचान बनाई है.

वे कहती हैं कि अपनी फ़िल्मों में उन्हें महिलाओं को और एशियाई समुदाय को किसी स्टीरियोटाइप में बाँधकर पेश करना पसंद नहीं है.

उनकी नई फ़िल्म इट्स ए वंडरफुल आफ़टरलाइफ़ ब्रिटेन में हाल ही में रिलीज़ हुई है और भारत में ये हय मर जावाँ के नाम से मई में रिलीज़ होगी.

फ़िल्म में शबाना आज़मी एक अनोखे क़ातिल के रोल में हैं. ईस्ट इज़ ईस्ट के जिमी मिस्त्री और हैप्पी गो लकी के लिए गोल्डन ग्लोब जीत चुकी सैली हॉकिंस ने भी काम किया है. पेश है उनसे बातचीत के मुख्य अंश

इट्स ए वंडरफ़ुल आफ़टरलाइफ़ जैसी ‘किलर कॉमेडी’ लिखने और बनाने के बारे में कैसे सोचा?

दरअसल मैं एक टीवी प्रोग्राम देख रही थी जिसमें 100 सर्वश्रेष्ठ पारिवारिक फ़िल्मों की सूची थी. इसमें मेरी फ़िल्म बेंड इट लाइक बेकम भी शामिल थी. प्रोग्राम में बेंड इट लाइक बेकम से पंजाबी शादी का दृश्य दिखाया जा रहा था. मुझे पूरे ताम-झाम वाली भारतीय शादी को फ़िल्माना बहुत पसंद है.

मैने सोचा कि ऐसा कोई दृश्य अब मैं दोबारा अपनी किसी फ़िल्म में नहीं दिखा सकती क्योंकि वो अपने-आप को दोहराने जैसे हो जाएगा. यही सब सोचकर मैं उदास सी हो गई.

लेकिन बाद में मैने सोचा कि शायद मैं अब भी भारतीय शादी का सीन नई फ़िल्म में दिखा सकती हूँ पर मुझे तरीका थोड़ा बदलना होगा. वहीं सी शुरुआत हुई इस फ़िल्म की. मेरी नई फ़िल्म में एक सीन है जहाँ भारतीय शादी हो रही है लेकिन वहाँ से वो कॉमेडी-हॉरर कहानी बन जाती है. ये एक सुपरनेचुरल, कॉमेडी है.

आपने शबाना आज़मी को लिया है. अपने लंबे करियर में उन्होंने लगभग हर तरह के किरदार किए है. लेकिन ऐसा किरदार शायद ही निभाया हो जहाँ वो उन तमाम लोगों का क़त्ल कर देती हैं जो उनकी बेटी को शादी के लिए नकार देते हैं.

शबाना ग़ज़ब की कलाकार हैं. मुझे हमेशा लगता था कि मेरी फ़िल्मों में ऐसा कोई किरदार ही नहीं होता जो मैं उन्हें दे सकूँ क्योंकि वे लगभग हर तरह का रोल कर चुकी हैं. फिर मैने सोचा कि शायद शबाना ने एक सिरीयल किलर का रोल कभी नहीं किया और न ही ब्रिटेन में साउथॉल की एक पंजाबी महिला का किरदार.

उन्होंने बहुत ही अच्छा काम किया. वे पंजाबी महिला के किरदार में बिल्कुल रच-बस गई थीं. अपना वज़न भी बढ़ाया उन्होंने. हालत ये थी कि जब हम साउथहॉल में शूटिंग कर रहे थे तो लोग उन्हें कोई आम पंजाबी महिला समझकर उनके पास से निकल जाते थे.

एक महिला ने ज़रूर आकर पूछा कि क्या आप शबाना आज़मी हैं, आप तो बहुत ख़ूबसूरत हुआ करती थीं? ये दर्शाता है कि शबाना ने ख़ुद को किरदार में कितना ढाल लिया था.

फ़िल्म में आपने सेंदिल को लिया है जो टीवी ड्रामा हीरो के लिए अमरीका में काफ़ी मशहूर हैं. फ़िल्म की हीरोइन गोल्डी एक नई लड़की है. काफ़ी दिलचस्प कलाकारों का मिश्रण है.

इस फ़िल्म की हीरोइन एक ऐसे लड़की है जो मोटी है, उसकी उम्र हो रही है और शादी नहीं हो रही. ये रोल गोल्डी ने किया है जिसे लोग अभी ज़्यादा नहीं जानते.

वहीं सेंदिल काफ़ी काफ़ी हैंडसम हैं और मशहूर हैं जो अच्छी बात है. तो ये मेल बढ़िया रहा फ़िल्म के लिए.

फ़िल्म में कुछ संदेश भी देने की कोशिश है?

ये बहुत ही दर्शक-प्रिय फ़िल्म है.कॉमेडी तो है ही ये फ़िल्म थोड़ी से आध्यात्मिक भी है. मेरी फ़िल्मों में महिलाओं को एक अलग नज़रीए से दिखाया जाता है.मैं फ़िल्म के ज़रिए कहना चाहती हूँ कि हीरोइन बनने के लिए आपका ज़ीरो साइज़ होना ज़रूरी नहीं. इस फ़िल्म में हीरोइन को जैसे दिखाया गया है वो हॉलीवुड की टिपिकल हीरोइन से एकदम अलग है.

एशियाई महिलाओं ने ब्रितानी समाज में अपनी जगह बनाई है. आप देखिए ब्रिटेन में भारतीय महिलाओं ने कितनी तरक्की की है- बैंकिंग में, उद्योग जगत में, राजनीति में. एशियाई महिलाओं का ब्रिटेन में अहम योगदान रहा है. मैं उनके पूरे चरित्र को फ़िल्मों के ज़रिए लोगों के सामने लाना चाहती हूँ.

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