ऑस्कर के बाद कान पहुंची ‘कवि’

ग्रेग हैल्वी
Image caption अमरीकी निर्देशक ग्रेग हैल्वी की फ़िल्म 'कवि' इस वर्ष कान फ़िल्म महोत्सव में दिखाई जा रही है.

अमरीकी ग्रेग हैल्वी पेशे से तो फ़िल्म निर्देशक हैं लेकिन उनका सपना दुनिया भर में ग़ुलामी के शिकार बच्चों का पुनर्वास है.

हैल्वी की फ़िल्म ‘कवि’ इस साल 'कांस फ़िल्म महोत्सव' के 'शॉर्ट फ़िल्म कॉर्नर' में दिखाई जाएगी. 63 वां कान फ़िल्म महोत्सव, फ्रांस में 12 मई से शुरु हो चुका है और 23 मई तक चलेगा.

‘कवि’ एक छोटे से भारतीय लड़के की कहानी है जो स्कूल जाना चाहता है और क्रिकेट खेलना चाहता है लेकिन वो ग़रीब है इसलिए उसे ईंटों की भट्टी में काम करना पड़ता है.

निर्देशक ग्रेग हैल्वी से बीबीसी की शाश्वती सान्याल ने फ़ोन पर लॉस एंजलीस में बात की.

ग्रेग हैल्वी कहते हैं, "इस फ़िल्म के मुख्य कलाकार सागर सालुंके को फ़िल्म में काम करने के बाद टीवी में एक्टिंग करने का मौका मिला. फ़िल्म के सह निर्माताओं की मदद से एक मराठी स्कूल में सागर की सारी पढ़ाई के खर्चे का इंतज़ाम हो सका. मैं चाहूंगा कि दुनिया भर में ऐसे कई बच्चों का पुनर्वास करवा सकूं.”

Image caption फ़िल्म 'कवि' ईंट की भट्टी पर काम करने वाले भारतीय बच्चे की कहानी है.

ये फ़िल्म इस वर्ष ऑस्कर्स में शॉर्ट फ़िल्म कैटगरी में नामांकित हुई थी और इसे छात्र वर्ग में एक पुरस्कार भी मिला था.

हालांकि ‘कवि’ कई नामी-गिरामी फ़िल्म महोत्सवों का हिस्सा रह चुकी है लेकिन ग्रेग हैल्वी कहते हैं कि उनका मक़सद सिर्फ़ एक प्रभावशाली फ़िल्म बनाना था.

ग्रेग हैल्वी कहते हैं, "ये विषय मेरे दिल के बेहद क़रीब है और मेरा मक़सद सिर्फ़ यही था कि इस मुद्दे पर एक प्रभावशाली फ़िल्म बनाऊं. लेकिन अकादमी पुरस्कार मिलने के बाद इस फ़िल्म का कान में जाना एक सपने के पूरे होने जैसा है."

ग्रेग हैल्वी को भारतीय दर्शकों से मिली सराहना ने बहुत प्रोत्साहित किया. वो कहते हैं, "मेरी फ़िल्म 'कवि' ने कई भारतीय फ़िल्म महोत्सवों में कई पुरस्कार जीते हैं. और एक विदेशी निर्देशक होने के नाते मुझे इस बात ख़ुशी है कि भारतीयों को मेरी फ़िल्म पसंद आई."

हैल्वी लगभग सात साल पहले भारत आए थे और फिर यहां आने की ख़्वाहिश इस फ़िल्म के ज़रिए पूरी हुई.

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