रेसुल का ध्वनि से शब्दों तक का सफ़र

  • 18 मई 2010
रेसुल पोकुट्टी और ऐ आर रहमान
Image caption हाल ही में ऑस्कर विजेता साउंड इंजिनीयर रेसुल पोकुट्टी की आत्मकथा का विमोचन हुआ.

फ़िल्म ‘स्लमडॉग मिलियनेयर’ में साउंड डिज़ाइन के लिए ऑस्कर जीतने वाले भारतीय रेसुल पोकुट्टी की आत्मकथा ‘शब्दात्रापदम’ का हाल ही में विमोचन हुआ.

रेसुल पोकुट्टी से बीबीसी संवाददाता शाश्वती सान्याल ने बातचीत की.

अपनी आत्मकथा के बारे में रेसुल कहते हैं कि ये एक सफ़रनामा है. वो कहते हैं, “ये मेरे बचपन, स्कूल, कॉलेज, मुम्बई में पेशेवर ज़िंदगी और ऑस्कर मिलने तक की कहानी है. इसमें किस्सों के ज़रिये मेरी ज़िंदगी का फ़लसफ़ा है जिसे मैंने हल्के-फुल्के तरीके से कहने की कोशिश की है.”

रेसुल पोकुट्टी अभी चालीस साल के भी नहीं हैं. ऐसे में उनके आत्मकथा लिखने की बात कुछ हैरानी वाली भी है. इस बारे में रेसुल कहते हैं, “ लोगों को इस बात से हैरानी होती है कि इतनी कम उम्र में रेसुल ने आत्मकथा लिख दी है क्योंकि ये एक आम धारणा है कि लोग बड़ी उम्र में ही आत्मकथा लिखते हैं. ये किताब मैंने लिखी है इसलिए इसे आत्मकथा ही कहेंगे. लेकिन मैं इसे सफ़रनामे के तौर पर देखता हूं, मेरी ज़िंदगी का सफ़र.”

रेसुल आगे कहते हैं, “मुझे हमेशा ही लिखने का शौक रहा है. ऑस्कर्स मिलने के बाद पेन्गुइन पब्लिकेशन्स ने मुझसे आत्मकथा लिखने के लिए कहा. पहले तो मैंने इसे हंसी में उड़ा दिया लेकिन वो मेरे पीछे एक महीने तक पड़े रहे. उन्होंने कहा कि लोग मेरी कहानी जानना चाहेंगे. तब मैंने कहा कि मैं सिनेमा और ध्वनि पर लिखूंगा. मुझे इस किताब को लिखने में बहुत मज़ा आया.”

रेसुल की आत्मकथा के सह-लेखक बैजू नटराजन हैं. किताब मलयालम में है और इसका अंग्रेज़ी संस्करण अगले कुछ महीनों में बाज़ार में आ जाएगा. किताब के विमोचन पर आस्कर विजेता संगीतकार ए आर रहमान और गीतकार गुलज़ार भी मौजूद थे.

रेसुल इन दिनों दक्षिण भारतीय निर्देशक शंकर की फ़िल्म ‘रोबोट’, एक अमरीकन फ़िल्म और शाहरुख़ ख़ान की नई फ़िल्म ‘रा वन’ पर काम कर रहे हैं.

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