नहीं रहे श्यामानंद जालान

श्यामानंद जालान
Image caption श्यामानंद जालान कोलकाता में हिंदी रंगमंच के जाने-माने निर्देशक और अभिनेता थे.

रंगमंच की जानी-मानी हस्ती, अभिनेता और निर्देशक श्यामानंद जालान का मंगलवार की शाम को अंतिम संस्कार कर दिया गया. सोमवार की देर रात कोलकाता के एक नर्सिंग होम में निधन हो गया था.

वे एक साल से कैंसर की बीमारी से जूझ रहे थे. महानगर के तमाम नाट्यकारों और नाट्य संस्थाओं ने जालान के निधन पर गहरा शोक जताते हुए उनको श्रद्धांजलि दी है. जालान के परिवार में उनकी पत्नी और छह बच्चे हैं.

कोलकाता में जन्मे जालान ने अपने स्कूल के दिनों से ही नाटकों में अभिनय शुरू कर दिया था. पंद्रह साल की उम्र में उन्होंने पहली बार ‘नया समाज’ नामक एक नाटक में अभिनय किया था. वर्ष 1951 में महज 17 साल की उम्र में जालान ने पहली बार ‘एक थी राज़कुमारी’ नामक एक बाल नाटक का निर्देशन किया था.

1934 में एक पारंपरिक मारवाड़ी परिवार में जन्मे जालान ने हिंदी नाटकों के अलावा बांग्ला नाटकों में भी काम किया था.

जीवन

उन्होंने वर्ष 1972 में पश्चिम बंग नाट्य उन्नयन समिति के नाटक ‘तुगलक’ में शंभू मित्र, देवब्रत दत्त और रुद्रप्रसाद सेनगुप्ता जैसे जाने-माने बांग्ला नाटककारों के साथ काम किया था. 1955 में उन्होंने ‘अनामिका’ की स्थापना की थी.

Image caption श्यामानंद जालान ने नृत्य और नाटक के प्रति समर्पित संस्था ‘पदातिक’ की स्थापना थी.

उसके बाद ही कोलकाता में गंभीर हिंदी नाटकों के मंचन का दौर शुरू हुआ. नाटकों के अलावा जालान ने फिल्मों और टीवी सीरियलों में अभिनय और निर्देशन किया. इनमें श्याम बेनेगल की ‘आरोहण’, एम. एस. सथ्यू की ‘कहाँ कहाँ से गुजर गया’ और रोनाल्ड जोफ की ‘सिटी ऑफ जॉय’ उल्लेखनीय हैं.

थिएटर के अलावा वे अन्य क्षेत्रों में भी सक्रिय रहे. पेशे से वकील रहे जालान ‘संगीत नाटक अकादमी’ के उपाध्यक्ष, ‘कत्थक केंद्र’, ‘साइंस सिटी’ और कोलकाता के ‘बिरला इंडस्ट्रियल एंड टेक्नॉलाजिकल म्यूजियम’ के अध्यक्ष रहे.

उन्होंने नृत्य और नाटक के प्रति समर्पित संस्था ‘पदातिक’ की स्थापना की. जालान ने इब्सेन, ब्रेख्त, रवींद्रनाथ टैगोर, बादल सरकार के नाटकों का हिंदी रूपांतर किया था. जालान ने महाश्वेता देवी के उपन्यास ‘हज़ार चौरासी की माँ’ को नाट्य रूप दिया.

‘आषाढ़ का एक दिन’ (1960) और ‘आधे अधूरे’ (1970) के जरिए उन्होंने नाट्यप्रेमियों के दिल में अपनी विशिष्ट जगह बना ली थी. अनामिका की स्थापना से पहले तक वे नाट्यकार तरुण राय के थिएटर सेंटर में उनके सचिव के तौर पर काम करते थे.

निर्देशक

निर्देशक के तौर पर वे संवाद और पटकथा को काफी अहमियत देते थे. वे रिहर्सल के दौरान लेखक को भी मंच पर मौजूद रहने को कहते थे.

Image caption रोनाल्ड जोफ की प्रसिद्ध फ़िल्म ‘सिटी ऑफ जॉय’ में भी अभिनय किया है.

लहरों के राजहंस के रिहर्सल के दौरान इसके लेखक मोहन राकेश ने जालान के नाट्य समूह के साथ तीन सप्ताह बिताए थे. मोहन राकेश ने बाद में कहानी में कुछ फेरबदल भी किया था.

नाट्य निर्देशक प्रताप जायसवाल ने श्यामानंद जालान के निधन पर शोक प्रकट करते हुए कहा है कि ‘श्यामानंद जालान का निधन राष्ट्रीय रंगमंच के लिए एक बड़ा नुकसान है.

कोलकाता के हिंदी रंगमंच को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित और प्रतिष्ठित करने में उनकी ऐतिहासिक भूमिका रही. वे पदातिक मिनीयेचर थिएटर के माध्यम से इंटीमेट थिएटर की शुरुआत करने वाले पुरोधा थे.’

नाट्य समीक्षक प्रेम कपूर ने श्यामानंद जालान को कोलकाता का ‘ग्रेटेस्ट शोमैन’ बताते हुए कहा है कि उनका जाना हिंदी रंगमंच की अपूरणीय क्षति है. कपूर कहते हैं कि ‘जालान एक प्रयोगधर्मी नाट्य निर्देशक थे. हज़ार चौरासी की माँ, लहरों के राजहंस जैसे कई यादगार नाटक उन्होंने दिए. रंगमंच को हुए इस नुकसान की भरपाई संभव नहीं है.’

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