आध्यात्म से जुड़ा है मेरा संगीत : रहमान

ए आर रहमान
Image caption ए आर रहमान ने दो ऑस्कर पुरस्कार जीते हैं और अब वो भारतीय संगीत का दायरा बढ़ा देना चाहते हैं

संगीतकार ए आर रहमान मानते हैं कि उनका संगीत आध्यात्म से जुड़ा है और कहते हैं कि सूफ़ी शैली ने उन्हें बहुत प्रभावित किया है.

हाल ही में बीबीसी की टीम ने संगीतकार ए आर रहमान के साथ सिडनी, ऑस्ट्रेलिया में कुछ दिन गुज़ारे और उनके संगीत के साथ-साथ उनके व्यक्तित्व के कुछ अनछुए पहलुओं से रू-ब-रू हुए.

रहमान ने बातचीत में कहा, "सूफ़ी शैली इस्लाम का एक आध्यात्मिक अंग है जो आपार प्रेम और सर्वव्यापकता से जुड़ा है. मैं इससे बहुत प्रभावित हूं."

दो ऑस्कर पुरस्कार जीत चुके रहमान ने ऑस्कर समारोह में कहा था कि उनके पास प्यार और नफ़रत में से एक को चुनने का विकल्प था और उन्होंने प्यार को चुना.

रहमान ने बीबीसी से कहा, "जीवन में बहुत नकारात्मक चीज़ें सामने आती रहती हैं. मैंने फ़ैसला किया है कि मैं सकारात्मक रवैया रखूंगा."

ये पूछे जाने पर कि वो इस्लाम धर्म को लेकर चल रहे विवाद के बारे में क्या सोचते हैं, रहमान ने कहा, "हर कोई धर्म को अपने-अपने तरीक़े से देखता है. मैं ऐसे कई लोगों को जानता हूं जो हिंसा के बिलकुल ख़िलाफ़ हैं और इंसानियत को सही राह दिखाना चाहते हैं."

ए आर रहमान का आज दुनिया भर में नाम है. उनके पास दौलत और शोहरत दोनों ही हैं लेकिन उनका जीवन हमेशा ऐसा नहीं था. उनके पिता की मृत्यु तब हुई जब रहमान बहुत छोटे थे. उन्हें स्कूल छोड़ना पड़ा ताक़ि वो परिवार की रोज़ी-रोटी कमाने में मदद कर सकें.

"उस समय मैंने इस बारे में ज़्यादा नहीं सोचा. मुझे लगा जीवन ऐसा ही होता है. लेकिन अब जब पीछे मुड़कर देखता हूं तो लगता कि मैंने बहुत कुछ खोया लेकिन बहुत कुछ पाया भी. मेरे पास मेरा संगीत था और मैंने इसपर अपना ध्यान बनाए रखा. मेरी मां हम सबका सबसे बड़ा सहारा थीं."

इतनी सफलता मिलने के बाद भी रहमान काफ़ी नम्र दिखते हैं. तो इस तरह के व्यक्तित्व के पीछे क्या कारण है.

"मैं एक दक्षिण भारतीय हूं और दक्षिण भारतीय बहुत सीधे-सादे लोग होते हैं. फिर मैं सूफ़ियाना शैली से भी बहुत प्रभावित हूं जो कि प्रेम और करुणा पर आधारित है."

"मैं हमेशा अपने दिमाग़ में ये बात रखता हूं कि अगर मैं अगला गाना नहीं बना पाया तो मैं ख़त्म हो जाऊंगा. ये चुनौती हमेशा मेरे सामने रहती है."

रहमान भारतीय संगीत की सीमाएं बढ़ा देना चाहते हैं. वो कहते हैं कि भारत में संगीत के नाम पर सिर्फ़ फ़िल्मी संगीत ही लोकप्रिय है. वो विदेशों में चल रहे ब्रॉडवे, सिंफ़नी और ऑपेरा की तर्ज पर भी भारत में कुछ करना चाहते हैं. उनके हिसाब से कला की कोई सीमा नहीं होनी चाहिए.

संबंधित समाचार