भारतीय अभिनेता ज़्यादा क़ाबिल: अनुपम खेर

  • 9 जून 2010
अनुपम खेर
Image caption कोलंबो में आईफ़ा के दौरान अनुपम खेर ने एक ऐक्टिंग कार्यशाला की.

हिंदी सिनेमा के जाने-माने अभिनेता अनुपम खेर मानते हैं कि भारतीय अभिनेता दुनिया के अन्य अभिनेताओं से ज़्यादा क़ाबिल हैं.

अनुपम खेर कहते हैं, “मैं मानता हूँ कि भारतीय अभिनेता दुनिया के किसी भी अन्य देश के अभिनेताओं से ज़्यादा काबिल है क्योंकि उन्हें लंबे समय तक उस तरह की एक्टिंग करनी पड़ती है जिसमें उनका बतौर एक्टर विश्वास नहीं होता है.''

वो मिसाल देते हैं,'' अमिताभ बच्चन ने कुली में जो ऑमलेट बनाते हुए योगा करने का सीन किया है, मुझे नहीं लगता कि रॉबर्ट डी नीरो भी वो कर सकते थे.''

हाल ही में कोलंबो में आइफ़ा के दौरान अनुपम खेर ने एक अभिनय कार्यशाला की जहाँ उन्होंने अभिनय के बारे में गुर सिखाए और अपने अनुभव बांटे.

अनुपम ये भी मानते हैं कि मौजूदा दौर ज़्यादा अच्छा है.

वो कहते हैं, “आज फ़िल्मों में एक्टिंग करना बहुत आसान है. लेकिन जब मैं 1984 में फ़िल्मों में आया, वो दौर प्रशिक्षित एक्टर के लिए सबसे ख़राब था. उस वक्त ऐसी चीज़े करनी पड़ती थीं जो हास्यास्पद होती थीं.”

अनुपम खेर कहते हैं, “हालांकि पिछले कुछ वर्षों में कई बड़े बजट की फ़िल्में फ़्लॉप हुई हैं लेकिन फिर भी हिंदी सिनेमा में एक बदलाव आया है. और ये बदलाव इसलिए आया है क्योंकि दर्शकों में बदलाव आया है. दर्शक की एक्टिंग की समझ आज पहले से ज़्यादा है. साथ ही मल्टीप्लेक्स के आने से भी फ़र्क पड़ा है. आज हम भेजा फ़्राई, खोसला का घोसला, मैंने गांधी को नहीं मारा जैसी फ़िल्में बना सकते हैं और उम्मीद कर सकते हैं कि फ़िल्में ठीक-ठाक कमाई करेंगी.”

राष्ट्रीय नाट्य अकादमी से अभिनय का प्रशिक्षण लेने वाले अनुपम खेर ने थिएटर में भी अपनी अलग पहचान बनाई है.

उनका कहना है, “एक अच्छा या बुरा एक्टर कहीं भी हो सकता है चाहे वो टीवी हो, थिएटर या फिर सिनेमा. थिएटर पूरी तरह एक्टर का माध्यम है जबकि सिनेमा डायरेक्टर का माध्यम है. थिएटर में स्टेज पर निर्देशक का कोई रोल नहीं रहता. लेकिन सिनेमा में आप बेहतरीन एक्टिंग कर भी लें लेकिन अगर निर्देशक को वो पसंद नहीं आया तो वो सीन कट जाएगा.''

वो कहते हैं कि सिनेमा बहुत सारी बातों का मिश्रण है.

संबंधित समाचार