अब 'मॉनसून वेडिंग' ब्रॉडवे पर

सबरीना धवन
Image caption मॉनसून वेडिंग फ़िल्म की पटकथा लेखिका सबरीना धवन अब उसका नाट्य रूपांतर कर रही हैं

मीरा नायर की मशहूर फ़िल्म ‘मॉनसूम वेडिंग’ के नाट्य रूपांतर को अब न्यूयॉर्क के मशहूर ब्रॉडवे थिएटर में प्रस्तुत करने की तैय्यारियां ज़ोर शोर से हो रही हैं.

फ़िल्म ‘मॉनसूम वेडिंग’ दिल्ली के एक पंजाबी परिवार में हो रही शादी के इर्द गिर्द घूमती कहानी है. इसकी पटकथा लिखने वाली सबरीना धवन ही इस नाटक को भी लिख रही हैं.

ब्रॉडवे पर दिखाए जाने वाले ‘मॉनसूम वेडिंग’ नाटक के बारे में सबरीना धवन कहती हैं कि वह फ़िल्म से काफ़ी अलग होगा.

स्क्रिप्ट लिखने में व्यस्त सबरीना धवन ने बीबीसी से एक विशेष बातचीत में बताया, “ब्रॉडवे पर मॉनसून वेडिंग को काफ़ी अलग अंदाज़ में दर्शाया जाएगा. स्टेज पर उसका शो फ़िल्म से काफ़ी फ़र्क़ होगा”.

नाट्य लेखन मुश्किल

सबरीना धवन कहती हैं,“मैं पहली बार स्टेज का कोई नाटक लिख रही हूं. स्टेज के लिए बिलकुल अलग तरह से सोचना पड़ता है. अब इस नाटक में बहुत सी कहानियां नई होंगी, पात्र कम होंगे, तो उसी हिसाब से स्क्रिप्ट भी लिखनी पड़ रही है”.

“आप सोचेंगे कि नाटक लिखना मुश्किल नहीं होगा क्योंकि फिल्म की स्क्रिप्ट तो तैयार है, कहानी तो है, लेकिन नाटक लिखना बहुत फ़र्क़ होता है. फ़िल्म में तो लोकेशन बहुत सी हो सकती हैं, लेकिन इस तरह के ब्रॉडवे नाटक में डॉयलाग से ज़्यादा महत्व संगीत का होता है. और मंच पर संगीत नाटक में कैसे धमाल हो और मंच का प्रयोग कैसे किया जाए यह सब सोचकर लिखना पड़ता है”.

सबरीना धवन का कहना है कि फ़िल्म में तो अंग्रेज़ी के सबटाइटल लग जाते हैं लेकिन स्टेज पर वैसा नहीं हो सकता इसलिए ‘मॉनसून वेडिंग’ नाटक में पात्र अधिकतर अंग्रेज़ी भाषा का ही प्रयोग कर रहे होंगे.

वो कहती हैं,“स्क्रिप्ट लिखते वक़्त मेरे लिए इस बात से ऐडजस्टमेंट करना भी बहुत मुश्किल हो रहा है कि जो पात्र फ़िल्म में अंग्रेज़ी नहीं बोल रहे थे वह अब अंग्रेज़ी में बोलेंगे. इसलिए काफ़ी कुछ बदलना पड़ रहा है”.

नाटक में अभिनय

Image caption अभी तय नहीं है कि कौन से फ़िल्मी कलाकार मॉनसून वेडिंग नाटक में अभिनय करेंगे

इस नाटक में सारे कलाकार देसी होंगे और क़रीब 20 कलाकार होंगे.

अभी यह तय नहीं हो पाया है कि नसीरुद्दीन शाह इस नाटक में मुख्य भूमिका निभाएगे या नहीं. क्योंकि यह नाटक कई सालों तक चलने के लिए तैयार किया जा रहा है और शायद इतना समय हिंदी फ़िल्मों के कलाकारों के पास न हो कि वह न्यू यॉर्क में ही रहें और रोज़ाना शो करें.

लेकिन फ़िल्म में भूमिका निभाने वाले कई कलाकारों को इसके ब्रॉडवे संस्करण में भी शामिल किया जाएगा.

वैसे इस नाटक में काम करने के इच्छुक भारतीय मूल के अमरीकी कलाकारों की सैकड़ों अर्ज़ियां मीरा नायर के पास आई हैं.

अब मीरा नायर उस सूची में से कलाकारों को छांट रही है. हालांकि मॉनसून वेडिंग नाटक के ब्रॉडवे थियेटर में आने में अभी एक साल से अधिक समय लग सकता है.

फ़िल्म लेखन ज़ोरों पर

सबरीना धवन कहती हैं कि उनका स्टेज के अलावा फ़िल्म लेखन का काम भी ज़ोरों से चल रहा है.

उन्होने ‘डिज़नी’ और ‘फ़ॉक्स’ जैसी कई बड़ी बड़ी हॉलीवुड कंपनियों के साथ काम किया है.

वो कहती हैं, “पहले सिर्फ़ अमरीका में बसे देसी लोगों के बारे में ही स्क्रिप्ट लिखने को कहा जाता था, लेकिन अब फ़र्क़ आ रहा है और कोई भी स्क्रिप्ट लिखने का ज़िम्मा सौंपा जाता है”.

लेकिन भारतीय निर्देशकों की जो हिंदी फ़िल्में ऑस्कर के लिए आती हैं उन्हे हार का मुंह क्यों देखना पड़ता है. इस पर सबरीना धवन का कहना है कि ऑस्कर की अपनी अलग दुनिया है और वह अपने हिसाब से ही फ़िल्मों को तौलते हैं.

वो कहती हैं, “ऑस्कर का जो ग्रुप फ़िल्मों को चुनता है वह ऐसे वृद्ध लोगों से भरा है जो अपनी ही दुनिया के सीमित दायरे में सोचते हैं. इसलिए अन्य देशों की फ़िल्मों को पुरस्कार मिलना बहुत ही मुश्किल होता है”.

अब वो कश्मीर पर आने वाली एक ब्रिटिश फ़िल्म की कहानी लिख रही हैं.

उन्होंने विशाल भरद्वाज के साथ बॉलीवुड फ़िल्में जैसे ‘कमीने’ और ‘इश्क़ किया’ की कहानी लिखी थी और अब वो भारद्वाज के साथ कई अन्य हिंदी फ़िल्मों की कहानी भी लिख रही हैं.

लेकिन वो कहती हैं कि फ़िल्म लेखन कोई आसान काम नहीं है और इसमें कामयाबी के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ता है.

वो कहती हैं, “भई, मैंने तो अपने मां बाप से झगड़ा करके फ़िल्म लेखन का काम चुना था, लेकिन अब मेरा तीन साल का एक बेटा है और मैं नहीं चाहती कि वह भी संघर्ष करे. इसलिए वो सिर्फ़ डॉक्टर ही बनेगा, कलाकार नहीं. मैं चाहती हूं कि उसका जीवन संघर्ष से न भरा हो”.

सबरीना धवन न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय में फ़िल्म लेखन पढ़ाती भी हैं और भविष्य में फ़िल्म निर्देशन भी करना चाहती हैं.

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