युगों में पैदा होता है एक रफ़ी: प्यारे लाल

रफ़ी
Image caption मुहम्मद रफ़ी भारतीय गायकों में ऊंचा स्थान रखते हैं

हिंदुस्तान के सर्वश्रेष्ठ गायकों में से एक मोहम्मद रफ़ी 31 जुलाई 1980 को सबको अलविदा कह गए थे. उनकी 30वीं पुण्यतिथि पर फ़िल्म इंडस्ट्री में उनके साथ काम कर चुके उनके साथियों ने उन्हें याद करते हुए श्रद्धांजलि दी.

रफ़ी के सबसे छोटे बेटे शाहिद रफ़ी ने उनकी याद में म्युज़िक एकैडमी खोलने का निर्णय लिया है.

इंडस्ट्री में रफ़ी का सफ़र पिछले चार दशकों तक था. उन्होंने भारत की 11 भाषाओं में 28,000 गीत गाए. इनमें हिंदी गाने, कव्वाली, क्लासिकल, ग़ज़ल और भजन भी थे.

सुनिए: मोहम्मद रफ़ी की पुण्यतिथि पर विशेष

रफ़ी ऐसे कलाकार थे, जिनकी आवाज़ ने न सिर्फ़ गीत को बल्कि फ़िल्म और संगीतकारों को भी मान्यता दिलाई.

संगीतकार ख़य्याम मानते हैं कि रफ़ी ने उनके संगीत में जो गीत गाए, वो इतने प्रसिद्ध हुए कि सबने उन्हें पहचाना.

खय्याम कहते हैं कि एक दिन उनके पास रफ़ी के बड़े भाई हामिद आए और कहा, "मैं रफ़ी के लिए कुछ ऐसी धुनें तैयार करूं जो सबसे अलग हो जिससे उनकी आवाज़ और कला और निखरे."

खय्याम कहते हैं, "इसके बाद हमने गीतकार दाग दहेलवी की कुछ गज़लें चुनीं और हमने काम शुरू किया. रफ़ी 18 दिनों तक हर दिन रिहर्सल करते थे कि उसके बाद वो गज़लें इतनी प्रसिद्ध हुईं कि फिर हर गज़ल गायक ने उनकी तरह गाना शुरू कर दिया."

गज़ब किया तेरे वादे पर ऐतबार किया

तमाम रात क़यामत का इंतज़ार किया.

खय्याम ने उन गज़लों के बाद रफ़ी के साथ भजनों की धुनें भी तैयार कीं, "तेरे भरोसे नंद लाला."

महान कलाकार

खय्याम कहते हैं, "रफ़ी एक महान आत्मा थे, वो बड़े सीधे और अच्छे इंसान थे. उनकी आवाज भगवान की देन थी. वो किसी भी धुन को काफ़ी जल्दी सीख जाते थे."

रफ़ी जब ज़िंदा थे, उस वक्त उनकी आवाज़ में अनवर गाने लगे थे.

अनवर कहते हैं, "इस इंडस्ट्री में उनकी तरह के ऐसे कलाकार हैं जो रफ़ी की आवाज की नकल करके अपनी रोजी रोटी चला रहे हैं."

अनवर कहते हैं, "एक दिन संगीतकार शंकर जयकिशन ने मुझसे कहा कि एक गीत है जो मुझे रफ़ी के साथ गाना है." अनवर कहते हैं कि यह सुनकर उन्हें बहुत खुशी हुई लेकिन काफ़ी नर्वस भी हुए कि इतने बड़े कलाकार के सामने वो कैसे गा सकते हैं?

बकौल अनवर, "यह मेरे लिए किसी भी अवार्ड से बढ़कर था."

सुनिए: बीबीसी आर्काइव से - रफ़ी से बातचीत

अनवर कहते हैं, "रफ़ी साहब की सबसे बड़ी कला थी कि वो जिस कलाकार के लिए गाते थे, उसी की आवाज़ बन जाते. लोगों को लगता कि वो कलाकार ख़ुद गा रहा है."

ख़ुद शम्मी कपूर मानते हैं कि पर्दे पर अभिनय करते समय ऐसा महसूस होता था कि वे खुद गा रहे हैं.

जॉनी वॉकर पर फ़िल्माया गया फ़िल्म प्यासा का गीत-"सर जो तेरा चकराए या दिल डूबा जाए, आ जा प्यारे पास हमारे काहे घबराए"- ऐसा लगता है कि इसे जॉनी वाकर ने ख़ुद गाया है.

बड़े दिल के

गीतकार हसन कमाल ने रफ़ी के आखिरी दिनों में उनके साथ काफ़ी समय बिताया था.

वो कहते हैं, "फ़िल्म पैगाम में मैं गाने लिख रहा था. एक दिन रफ़ी साहब के पास गया और पूछा कि क्या आप गीत गाएंगे लेकिन मेरे फ़िल्म निर्माता के पास पैसा कम है. वो सिर्फ़ आपको ढाई हज़ार ही दे सकते हैं." वे बताते हैं कि रफ़ी ने गाने गाए लेकिन इसका पैसा नहीं लिया.

कमाल कहते हैं कि मैं जब भी उनसे कहता कि आपने बहुत अच्छे गाने गाए तो वो आसमान की तरफ़ उंगली उठाकर कहते कि यह सब उसकी वजह से है.

संगीतकार प्यारे लाल कहते हैं कि उनकी फ़िल्म दोस्ती का गीत 'चाहूँगा मैं तुझे सांझ सबेरे' उन्हें अच्छा नहीं लगा था लेकिन रफ़ी ने कहा कि यह अच्छी धुन है, फिर इसी के बूते हमें पहला फ़िल्म फ़ेयर अवार्ड मिला और दुनिया ने हमारी जोड़ी को जाना.

प्यार लाल कहते हैं कि रफ़ी ने जब भी उनके गाने गाए, वो काफ़ी प्रसिद्ध हुए, जैसे-"तेरे प्यार ने मुझे ग़म दिया, तेरे ग़म की उम्र दराज़ हो" और "वो जब याद आए, बहुत याद आए."

प्यारे लाल कहते हैं कि रफ़ी जैसे कलाकार कई जन्मों में भी नहीं पैदा होते.

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