'सलीम से अलग थी दिलीप कुमार की शख़्सियत'

लता मंगेशकर
Image caption फ़िल्म 'मुग़ल-ए-आज़म' के पचास साल पूरे होने पर लता मंगेशकर ने बांटी यादें

'प्यार किया तो डरना क्या' सहित फ़िल्म 'मुग़ल-ए-आज़म' के दूसरे कामयाब गाने गाने वाली महान गायिका लता मंगेशकर ने इस फ़िल्म से जुड़ी यादें बीबीसी के साथ बांटी.

फ़िल्म में दिलीप कुमार ने शहज़ादे सलीम का किरदार अदा किया.

लता कहती हैं "दिलीप साहब का चेहरा-मोहरा और व्यक्तित्व बिलकुल आधुनिक था. वो ऐतिहासिक किरदार से बिलकुल अलग था. लेकिन उन्होंने बहुत ही ज़बरदस्त काम किया."

लता के मुताबिक दिलीप साहब गोरे हैं लेकिन उनको मेक-अप करके थोड़ा काला चेहरा किया गया, क्योंकि सलीम थोड़े काले थे.

सिर्फ़ दिलीप ही नहीं लता दीदी ने पृथ्वीराज कपूर, दुर्गा खोटे और मधुबाला के अभिनय की भी जमकर तारीफ़ की.

पृथ्वीराज कपूर के बारे में लता मंगेशकर कहती हैं "वो अकबर के किरदार में खूब जंचे. उनका व्यक्तित्व, डील-डौल बिलकुल उस किरदार के हिसाब से फ़िट था."

इस फ़िल्म के मशहूर गाने 'प्यार किया तो डरना क्या' के बारे में लता मंगेशकर ने कहा "गाना बना तो अच्छा था ही, के. आसिफ़ साहब ने इसका फ़िल्मांकन भी बहुत अच्छा किया. सितारा देवी ने गाने को कोरियोग्राफ किया, और मधुबाला ने बहुत सुंदर नृत्य किया."

लता ने बताया कि इस गाने का आख़िरी हिस्सा, जिसमें मधुबाला शीशे के कई टुकड़ों में नाचते हुए नज़र आतीं हैं, उन्होंने महबूब स्टूडियो में खड़े होकर गाया था. जहां इस गाने के लिए बहुत महंगा सेट लगाया गया था.

फ़िल्म का संगीत नौशाद ने दिया था, जो लता मंगेशकर को अपनी बहन मानते थे. लता ने बताया कि फ़िल्म के एक-एक गाने के लिए नौशाद साहब के घर पर कई-कई घंटो की रिहर्सल होती थी. पहले बिना संगीत के वो गाना गवाते थे, फिर संगीत के साथ रिहर्सल होती थी.

मुग़ल-ए-आज़म 5 अगस्त 1960 को रिलीज़ हुई थी, और इसने बॉक्स ऑफ़िस के कई रिकॉर्ड तोड़ दिए थे. के. आसिफ़ इसके निर्देशक थे.

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