सच्ची कहानी पर आधारित है 'अंतरद्वंद्व'

'अंतरद्वंद'
Image caption फ़िल्म 'अंतरद्वंद्व' को 55वां राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुका है

नई फ़िल्म 'अंतरद्वंद्व' के निर्देशक सुशील राजपाल का कहना है कि उन्होंने एक सच्ची घटना से प्रभावित होकर ये फ़िल्म बनाई.

राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुकी 'अंतरद्वंद्व' बिहार के कुछ इलाक़ों में होने वाली 'पकड़वा शादी' यानी दूल्हों के अपहरण पर आधारित है. इन्हें पकड़कर ज़बरदस्ती इनकी शादी करवा दी जाती है.

सुशील कहते हैं, "मेरे एक दोस्त के साथ सचमुच ऐसा हुआ है. मुझे इस फ़िल्म की कहानी लिखने की प्रेरणा इसी घटना से मिली."

असल कहानी में थोड़ा फेरबदल किया गया है ताकि लोगों को इसे आसानी से समझाया जा सके.

सुशील राजपाल का कहना है कि फ़िल्म में बिहार की भाषा और सभ्यता को भी अच्छी तरह से दर्शाया गया है.

"ऐसा नहीं है कि बिहार में हर जगह ऐसा होता है. सिर्फ़ कुछ ही इलाक़े हैं जहां दुल्हों का अपहरण प्रचलित है. ये ज़्यादातर गांवों में होता है इसलिए बाहर के लोगों को इस बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं है. इसका मुख्य कारण है दहेज देने से बचना."

इस फ़िल्म में मुख्य भूमिका निभाई है राज सिंह चौधरी ने जो इससे पहले 'गुलाल' और 'द वेटिंग रूम' जैसी फ़िल्मों में दिख चुके हैं.

राज कहते हैं, "मेरा किरदार एक ऐसे लड़के का है जो दिल्ली से बिहार अपने माता-पिता से मिलने जाता है और जब वो वापस जा रहा होता है उसका अपहरण कर लिया जाता है. फिर इसे तरह-तरह की यात्नाएं देकर उसकी शादी कर दी जाती है."

राज कहते हैं कि इस फ़िल्म को करने से पहले उन्हें भी इस तरह के अपहरणों के बारे में मालूम नहीं था.

उनका कहना है, "मुझे उम्मीद है कि इस फ़िल्म को देखकर लोगों में इस मुद्दे को लेकर जानकारी बढ़ेगी. मैं समझता था कि ऐसा 80 के दशक में ही होता था लेकिन मुझे बताया गया कि पिछले साल ही क़रीब 1300 ऐसे केस दर्ज हुए हैं. जो लोग ऐसा करते हैं शायद वो भी इस बारे में सोचें."

'अंतरद्वंद्व' रिलीज़ के लिए तैयार है और इसके बाक़ि कलाकारों में शामिल हैं स्वाति सेन, अखिलेंद्र मिश्रा और विनय पाठक.

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