डी रामानायडू को दादा साहेब फाल्के सम्मान

दादा साहेब फाल्के पर जारी डाक टिकट
Image caption डी रामानायडू का जन्म 1936 में आंध्र प्रदेश के प्रकाशम ज़िले में हुआ था.

वरिष्ठ फ़िल्म निर्माता डी रामानायडू को साल 2009 का 'दादा साहेब फाल्के पुरस्कार' देने की घोषणा की गई है.

उन्होंने 47 साल के फ़िल्म करियर में तेलुगु, हिंदी, बंगाली, उड़िया, असमिया, मलयालम, तमिल, कन्नड, गुजराती, मराठी और भोजपुरी में 130 फ़िल्में बनाई हैं.

उन्हें यह पुरस्कार अक्तूबर में गोवा में आयोजित होने वाले भारत के अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म महोत्सव के दौरान दिया जाएगा. पुरस्कार के तहत एक स्वर्ण कमल, एक शाल और दस लाख रुपए की राशि दी जाती है.

'दादा साहेब फाल्के पुरस्कार' भारतीय भाषाओं की फ़िल्मों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्ति को केंद्र सरकार की ओर से दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान है.

साल 2008 में यह सम्मान मशहूर सिनेमेटोग्राफ़र वीके मूर्ति को दिया गया था. इसकी स्थापना 1969 में की गई थी.

फ़िल्मी सफ़र

आंध्र प्रदेश के प्रकाशम ज़िले में 1936 में पैदा हुए डी रामानायडू ने फ़िल्म ' अनुरागम' से फ़िल्मों की दुनिया में क़दम रखा था.

उन्होंने 1964 में आंध्र प्रदेश के करिश्माई अभिनेता और राजनेता एनटी रामा राव को लेकर फ़िल्म 'रामनुडु-भिनाडु' बनाई

थी, जो सुपर हिट हुई थी.

अपने 47 साल के फ़िल्म करियर में रामानायडू ने 130 फ़िल्में बनाईं. इनमें तेलगु भाषा की फ़िल्मों के साथ-साथ हिंदी, बंगाली, उड़िया, असमिया, मलयालम, तमिल, कन्नड, गुजराती, मराठी और भोजपुरी फ़िल्में भी शामिल हैं.

इसे देखते हुए उनका नाम गिनिज़ बुक आफ़ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज किया गया है.

उनकी बंग्ला फ़िल्म 'असुख' को 1999 में राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.

वेंकटेश, हरीश, वंसरी, आर्यन राजेश, तब्बू और खुश्बू जैसी कलाकारों का परिचय भी पहली बार रामानायडू ने ही दर्शकों से कराया था.

' प्रेमनगर' , ' दिलदार' और ' बंदिश' डी रामानायडू की प्रमुख हिंदी फ़िल्में हैं.

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