कमज़ोर होती हैं हिंदी फ़िल्में: ओमपुरी

  • 15 सितंबर 2010
ओम पुरी

हिंदी फ़िल्मों के जाने-माने अभिनेता ओमपुरी का मानना है कि हिंदी फ़िल्में कहानी के स्तर पर बेहद कमज़ोर होती हैं, और विदेशी फ़िल्मों की तुलना में अभी बहुत पीछे हैं.

ओमपुरी ने बीबीसी से हुई बातचीत में कहा, "हम विदेशी फ़िल्मों की नकल करते हैं और उनका रीमेक बना देते हैं. हमारी फ़िल्में गुणवत्ता के मामले में बहुत पीछे हैं."

ओमपुरी की ब्रिटिश फ़िल्म 'वेस्ट इज़ वेस्ट' टोरंटो फ़िल्म फ़ेस्टिवल में दिखाई गई.

कई भारतीय फ़िल्में अब अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म समारोहों में दिखाई जा रही हैं तो क्या ये उपलब्धि नहीं है, इस सवाल पर ओमपुरी कहते हैं "विदेश में भी हमारी फ़िल्मों के ज़्यादातर दर्शक भारतीय ही होते हैं. जब तक हम नाच, गाने के मायाजाल से बाहर नहीं निकलेंगे, हमारी फ़िल्मों को विदेशी नहीं देखेंगे."

ओमपुरी ने कला और व्यावसायिक, दोनों ही तरह की फ़िल्मों में नाम कमाया. लेकिन उन्हें कई बातों का मलाल भी है.

ओम कहते हैं "व्यावसायिक सिनेमा ने मुझे धन के सिवा और कुछ नहीं दिया. मेरी पहचान तो कला सिनेमा से बनी. हां, व्यवसायिक फ़िल्मों ने मेरा घर ज़रूर चलाया, लेकिन तकलीफ़ इस बात की है कि मेरा और भी बेहतर इस्तेमाल हो सकता था."

फ़िल्म 'वेस्ट इज़ वेस्ट' की बात करें तो ये 1999 में आई ओमपुरी की मशहूर फ़िल्म 'ईस्ट इज़ ईस्ट' का सीक्वेल है. जिसमें उन्होंने एक पाकिस्तानी नागरिक का किरदार अदा किया है, जो विदेश में रहता है.

'वेस्ट इज़ वेस्ट' में अब ओमपुरी का किरदार वापस अपने देश लौटता है, लेकिन उसके पुराने दोस्त उससे मुंह फेर लेते हैं.

इससे पहले आमिर ख़ान की 'धोबी घाट' भी टोरंटो फ़िल्म फ़ेस्टिवल में दिखाई गई, जहां उसे ख़ूब वाहवाही मिली.

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