कमला लक्ष्मी को अमरीकी पुरस्कार

कमला लक्ष्मी नारायणन
Image caption कमला लक्ष्मी को पहले पद्मभूषण मिल चुका है.(फ़ोटो-नैशनल हेरिटेज फ़ेलोशिप)

भरतनाट्यम नृत्यांगना कमला लक्ष्मी नारायणन को अमरीका में लोककला के क्षेत्र में अपने अभूतपूर्व योगदान के लिए देश के सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया है.

अमरीका में भरतनाट्यम को पहली बार ये पुरस्कार मिला है.

भारतीय मूल की कमला लक्ष्मी नारायणन अमरीका का प्रतिष्ठित एनईए नेशनल हेरिटेज फ़ेलोशिप पुरस्कार पानेवाले उन नौ लोगों में शामिल हैं जिन्हें इस वर्ष ये पुरस्कार दिया गया है.

पारंपरिक लोककला के क्षेत्र में दिया जाने वाला ये अमरीका का सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार है.

इस वर्ष के पुरस्कारों की ख़ास बात ये है कि अमरीकी संस्कृति को बढ़ावा देने के क्षेत्र में योगदान के लिए दिए जाने वाले इस पुरस्कार से सम्मानित नौ लोगों में से पाँच लोग ऐसे हैं जो मूल रूप से अमरीकी नहीं हैं.

इस बार ये पुरस्कार पानेवालों में ड्रम बजाने वाले घाना के एक ड्रमर और ताड़ के पत्तों से टोकरी बुनने वाले अफ़्रीकी मूल के व्यक्ति शामिल हैं.

भरतनाट्यम की पर्याय

कमला लक्ष्मी नारायणन भरतनाट्यम की विश्व प्रसिद्ध नृत्यांगना हैं.

भारत में उन्हें सिर्फ़ 'कमला' के नाम से जाना जाता है जहाँ उनकी पहचान भरतनाट्यम के पर्याय के तौर पर बनी हुई है.

वो भरतनाट्यम के उस 'वज़ुवूर' घराने से ताल्लुक़ रखती हैं जो उनके गुरू वज़ुवूर रामैया पिल्लई ने शुरू किया था.

कमला लक्ष्मी नारायणन का जन्म 16 जून 1934 को तमिलनाडु के मयूरम में हुआ था.

उन्होंने पाँच साल की उम्र में नृत्य सीखना शुरु किया और पहले कथक से शुरूआत की.

1939 में रिलीज़ हुई हिंदी फ़िल्म 'रामराज्य' में भी उन्होंने काम किया था.

बाद में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद उनका परिवार भारत के दक्षिण के राज्य तमिलनाडु चला गया जहाँ उन्होंने भरतनाट्यम सीखना शुरू किया.

70 के दशक के आख़िर में कमला लक्ष्मी अमरीका चली गईं जहाँ उन्होंने 'श्री भारत कमलालय नृत्य विद्यालय' की स्थापना की.

वो न्यूयॉर्क और न्यूजर्सी में पिछले 30 सालों से भरतनाट्यम सिखा रहीं हैं.

हाँलाकि उनकी उम्र 70 से ज़्यादा की हो चली है लेकिन वो अब भी भरतनाट्यम के क्षेत्र में काफ़ी सक्रिय हैं और अपने शिष्यों को भरतनाट्यम सिखा रही हैं.

कमला लक्ष्मी नारायणन को 1970 में पद्मभूषण से भी सम्मानित किया गया था.

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