शरमन की 'अल्लाह के बंदे'

Image caption आने वाली फ़िल्म 'अल्लाह के बंदे' में शरमन हास्य भूमिका से हटकर गंभीर किरदार में दिखेंगे

'गोलमाल' 'ढोल' और '3 इडियट्स' जैसी फ़िल्मों में हास्य भूमिकाएं करने के बाद अब अभिनेता शरमन जोशी एक गंभीर भूमिका में दिखेंगे फ़िल्म 'अल्लाह के बंदे' में.

फ़िल्म बाल अपराध और बाल सुधार गृह में बच्चों पर हो रहे अत्याचार की कहानी है.

फ़िल्म के म्यूज़िक लॉन्च के मौके पर पत्रकारों से बात करते हुए शरमन ने कहा "बहुत कमाल की फ़िल्म बनी है. मुझे अपने रोल के लिए पहले से कोई तैयारी नहीं करनी पड़ी, क्योंकि फ़िल्म की स्क्रिप्ट ने ही मेरा मार्गदर्शन किया. इसी वजह से मेरे लिए ये भूमिका निभाना आसान हो गया."

फ़िल्म में संगीत दे रहे हैं कैलाश खेर और नरेश-परेश की जोड़ी. तीनों ने मिलकर 'कैलासा' नाम से एक बैंड बनाया है.

कैलाश कहते हैं "फ़िल्म बहुत ज़बरदस्त है. ये लोगों को सोचने पर मजबूर कर देगी. हमें जब भी ऐसे चुनौती से भरे प्रोजेक्ट करने का मौका मिलता है, तो हम उसे लपक लेते हैं."

फ़िल्म के लेखक और निर्देशक हैं फ़ारुक कबीर और इसमें नसीरुद्दीन शाह भी एक अहम भूमिका निभा रहे हैं.

फ़िल्म 12 साल के दो लड़कों की कहानी है, जो झोपड़ पट्टी में रहते हैं, और नशीली दवाओं के कारोबार में फंस जाते हैं. उन्हें एक हत्या के आरोप में बाल सुधार गृह भेज दिया जाता है, जहां उनके लिए ज़िंदगी बड़ी मुश्किल हो जाती है.

बाल सुधार गृह का वार्डन और दूसरे लोग उन दोनों पर अत्याचार करते हैं. जिससे सुधरने के बजाय वो और भी ख़तरनाक कामों को अंजाम देने के बारे में सोचने लगते हैं

संबंधित समाचार