'नकल होती हैं ज़्यादातर भारतीय फ़िल्में'

  • 18 अक्तूबर 2010
जॉन अब्राहम
Image caption जॉन अब्राहम की आने वाली फ़िल्म 'झूठा ही सही' एक रोमांटिक कॉमेडी है

हिंदी फ़िल्मों के मशहूर अभिनेता जॉन अब्राहम कहते हैं कि ज़्यादातर भारतीय फ़िल्में मौलिक नहीं होतीं, और विदेशी फ़िल्मों की नकल होती हैं.

बीबीसी से ख़ास मुलाक़ात में जॉन कहते हैं, "हम अपनी अलग पहचान तब तक नहीं बना पाएंगे, जब तक कि हम विदेशी फ़िल्मों की नकल करते रहेंगे. अपनी अलग पहचान बनाने के लिए हमें मौलिक फ़िल्में बनानी होंगी."

हालांकि जॉन अब्राहम जल्द ही रिलीज़ होने वाली अपनी फ़िल्म 'झूठा ही सही' को बिलकुल मौलिक फ़िल्में बताने से भी नहीं चूकते. जॉन अब्राहम के शब्दों में, "ये फ़िल्म किसी भी फ़िल्म की कॉपी नहीं है. इसकी कहानी बिलकुल मौलिक है, और ये एक बेहद मज़ेदार फ़िल्म बन पड़ी है."

फ़िल्म 'झूठा ही सही' के बारे में जॉन ने बताया कि ये एक रोमांटिक कॉमेडी है, जिसमें वो लंदन के एक बुक स्टोर में काम करने वाले व्यक्ति का किरदार निभा रहे हैं.

फ़िल्म में कई ब्रिटिश कलाकारों और ब्रिटिश एशियाई लोगों ने काम किया है. फ़िल्म के निर्देशक अब्बास टायरवाला हैं, जो 'जाने तू या जाने ना' जैसी कामयाब फ़िल्म का निर्देशन कर चुके हैं. फ़िल्म की अभिनेत्री हैं पाखी, जो निर्देशक अब्बास टायरवाला की पत्नी हैं.

आने वाली फ़िल्में

अपनी अगली फ़िल्मों के बारे में बात करते हुए जॉन ने बताया कि लंदन में 'दोस्ताना 2' की शूटिंग चल रही है, जो उनकी कामयाब फ़िल्म 'दोस्ताना' का सीक्वेल है. इसके अलावा जॉन जल्द ही अपनी एक और कामयाब फ़िल्म 'जिस्म' के सीक्वेल की स्क्रिप्ट पढ़ेंगे.

दर्शकों की पसंद के बारे में बात करते हुए जॉन अब्राहम कहते हैं, "फ़िल्मों के बारे में लोगों की मानसिकता बदल रही है. आज से तीन साल पहले लोगों के लिए जो अच्छा अभिनय हुआ करता था, अब उस तरह के अभिनय को चीखना चिल्लाना कहकर नकार दिया जाता है. ओवरएक्टिंग के लिए अब कोई जगह नहीं है."

जॉन ये भी मानते हैं कि अब धीरे-धीरे उन्हें लोग एक अच्छा अभिनेता मानने लगे हैं.

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