कॉमेडी मेरा एक और पहलू: मधुर भंडारकर

दिल तो बच्चा है जी
Image caption गंभीर विषयों पर फ़िल्में बनाने वाले निर्देशक मधुर भंडारकर की नई फ़िल्म 'दिल तो बच्चा है जी' कॉमेडी है.

‘चांदनी बार’, ‘फ़ैशन’, ‘पेज थ्री’ और ‘जेल’ जैसी संजीदा और गंभीर फ़िल्में बनाने वाले निर्देशक मधुर भंडारकर असल ज़िंदगी में काफ़ी मज़ाकिया किस्म के इंसान हैं.

मधुर भंडारकर की अगली फ़िल्म ‘दिल तो बच्चा है जी’ एक कॉमेडी है. मधुर कहते हैं, “ये मेरा एक और पहलू है. निजी ज़िंदगी में मैं बहुत मज़ाकिया हूं. मुझे करीब से से जानने वाले लोग जानते हैं कि मैं बहुत बहुर्मुखी और मज़ाकिया किस्म का इंसान हूं जो लोगों की नकल उतारता है. जब मैं ‘चांदनी बार’ बना रहा था तब तबू ने मुझसे कहा था कि मुझे कॉमेडी बनानी चाहिए. मैं सोचता था कि बनाऊंगा और मैंने दस साल इंतज़ार किया कॉमेडी बनाने के लिए. उम्मीद करता हूं कि जैसे लोगों को मेरी पिछली फ़िल्में पसंद आईं, उसी तरह उन्हें ये फ़िल्म भी पसंद आएगी.”

हाल ही में फ़िल्म की पहली झलक पेश की गई. इस मौके पर मधुर भंडारकर के अलावा फ़िल्म के मुख्य कलाकार भी मौजूद थे.

कॉमेडी क्यों ?

मधुर भंडारकर एक ही तरह की फ़िल्में नहीं बनाना चाहते हैं. उनका कहना है, “मुझे हर तरह की फ़िल्म बनाना चाहिए न कि टाइपकास्ट होना चाहिए. जब मैं यर्थाथवादी फ़िल्में बनाता हूं तो लोग कहते हैं कि मधुर मुद्दे वाला सिनेमा बनाता है. लेकिन अब जब मैं कॉमेडी कर रहा हूं तो लोग कहते हैं कि मधुर को अपनी तरह का ही सिनेमा करना चाहिए.”

अपनी पहली फ़िल्म ‘चांदनी बार’ से ही मधुर भंडारकर का नाम यथार्थवादी सिनेमा के साथ जुड़ गया. उसके बाद आई उनकी हर फ़िल्म समाज के किसी-न-किसी ज्वलंत मुद्दे से प्रेरित रही है.

लेकिन 'दिल तो बच्चा है जी' सिर्फ़ कॉमेडी से प्रेरित है. मधुर कहते हैं, “पहली बार मैं किसी अख़बार की ख़बर या मुद्दे से नहीं बल्कि कॉमेडी से प्रेरित हूं. ये कहानी मेरी या आपकी, किसी की भी हो सकती है. मैं ऋषिकेश मुखर्जी और बासु चटर्जी की फ़िल्मों से प्रेरित रहा हूं और ये उन्हीं की तरह की फ़िल्म है.”

कहानी और कास्ट

‘दिल तो बच्चा है जी’ में अजय देवगन, इमरान हाश्मी, ओमी वैद्य, श्रुति हसन, शहज़ान पद्मश्री और श्रद्धा दास मुख्य भूमिकाओं में हैं. फ़िल्म तीन पुरुषों और उनकी ज़िंदगी में आने वाली लड़कियों के बारे में है.

फ़िल्म की टैगलाइन है ‘लव ग्रोज़ मैन डोन्ट’. इस बारे में अजय देवगन कहते हैं, “आदमी इश्क में बार-बार वही ग़ल्ती करते हैं और फिर कहते हैं कि आगे नहीं करूंगा.”

Image caption 'दिल तो बच्चा है जी' की कहानी तीन पुरुषों और उनकी ज़िंदगी में आई लड़कियों की है.

अजय देवगन का किरदार नरेन मिड-थर्टीज़ में है और उसका तलाक़ चल रहा है. उसकी जिंदगी में एक कम उम्र की लड़की आती है और वो अपने-आप को बदलने की कोशिश करने लगता है.

अजय के साथ कम उम्र की लड़की की भूमिका में हैं शहज़ान पदमसी. अजय के बारे में शहज़ान कहती हैं, “मैं सिर्फ़ बाइस साल की हूं और मैं लंबे समय से अजय सर (देवगन) को देख रही हूं. मैं चाहती थी कि जब भी मैं उनके साथ काम करुं तो वो ये न कहें कि ये लड़की कौन है या इसे कुछ करना नहीं आता. मैं चाहती थी कि अजय देवगन को मेरे काम से कोई शिकायत न हो.”

‘थ्री ईडियट्स’ में सफलता के पीछे भागने वाले चतुर रामालिंगम यानि अभिनेता ओमी वैद्य इस फ़िल्म में प्यार के पीछे भाग रहे हैं.

ओमी वैद्य कहते हैं, “मैं अपने रोल कहानी और किरदार के आधार पर चुनता हूं. 'थ्री ईडियट्स' में थोड़ा सा नकारत्मक और मज़ाकिया किरदार था लेकिन ये लीड रोल है और इसमें हीरोइन भी है. ये प्यार के बारे में है. उस फ़िल्म में मेरे किरदार चतुर का प्यार से कोई लेना-देना नहीं था, वो सफलता के पीछे भाग रहा था लेकिन यहां मेरा किरदार प्यार के पीछे भाग रहा है.”

'दिल तो बच्चा है जी' अट्ठाइस जनवरी 2011 को रीलीज़ हो रही है.

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