बीबीसी टेक वन: चटपटी फ़िल्मी गपशप

शाहरुख़ ख़ान
Image caption अभिनेता शाहरुख़ ख़ान कहते हैं कि वो पहले से बहुत अच्छा महसूस कर रहे हैं.

मनोरंजन की दुनिया से सप्ताह भर की चटपटी ख़बरें समेटे बीबीसी हिंदी एफ़एम का विशेष कार्यक्रम 'बीबीसी टेक वन'.

बीबीसी टेक वन में इस हफ़्ते रिलीज़ हो रही फ़िल्मों की बात होगी फ़िल्म समीक्षक अर्णब बनर्जी के साथ.

निर्देशक सुधीर मिश्रा की फ़िल्म 'तेरा क्या होगा जॉनी' एक बार फिर रिलीज़ होते-होते रह गई. इस फ़िल्म को वैसे 2008 में रिलीज़ होना था लेकिन किसी न किसी वजह से इसकी रिलीज़ टालती जा रही है. ये फ़िल्म मुंबई को केन्द्र में रख कर बुनी गई है जिसमें कॉफ़ी बेचने वाले एक बच्चे की नज़र से भागती-दौड़ती मायानगरी को उकेरा गया है.

वहीं सालों से बन रही फ़िल्म 'अदा' आख़िरकार रिलीज़ हुई. जाने-माने संगीतकार ए आर रहमान ने 2001 में इस फ़िल्म का संगीत दिया था. फ़िल्म के निर्माता झामू सुघंध के निधन की वजह से इस फ़िल्म की रिलीज़ और टल गई. नए कलाकारों और नई कहानी के साथ तनवीर अहमद द्वारा निर्देशित ये फ़िल्म कई और कठिनायों को पार करते हुए अब दर्शकों तक पहुंची है.

सुनिए बीबीसी टेक वन

साल 2010 ख़त्म हो गया है और हिंदी फ़िल्म जगत के कई नामचीन सितारों ने बीबीसी को बताया की ये साल उनके लिए कैसा रहा.

Image caption सलमान ख़ान का कहना है कि जो इंसान अपने फ़ैसलों पर अडिग रहता है वो दबंग है.

निर्देशक फ़ारहा ख़ान की फ़िल्म 'तीस मार ख़ान' जो इस साल रिलीज़ हुई उनका कहना है कि इस साल ने तो उनकी ज़िंदगी ही बदल दी. वहीं शाहरुख़ ख़ान का तो मानना है कि साल फ़िल्मों से नहीं बल्कि ज़िंदगी से अच्छा बनता है. अभिनेता रितिक रोशन की इस साल दोनों ही फिल्में - 'काइट्स' और 'गुज़ारिश' दर्शकों को लुभाने में नाकामयाब रहीं. लेकिन उनका कहना है कि ज़िंदगी में हमेशा अच्छा हो ये ज़रूरी नहीं है.

साल 2010 की सबसे बड़ी फ़िल्म 'दबंग' के अभिनेता सलमान ख़ान ने बीबीसी के साथ एक ख़ास बातचीत में बताया कि कैसे शुरुआत से ही उनके फैंस ने हमेशा उनका साथ दिया है. वो कहते हैं कि वो कभी भी अपने भविष्य की योजना नहीं बनाते.

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