क्या फिर चलेगा रहमान का जादू ?

ए आर रहमान
Image caption ए आर रहमान को '127 ऑवर्स' के लिए गोल्डन ग्लोब पुरस्कारों में नामांकित किया गया है.

प्रकृति और विपरीत परिस्थितियों से लड़कर मौत को मात देने वाली सच्ची कहानी पर आधारित है डैनी बॉयल की नई फ़िल्म ‘127 आवर्स’. ये कहानी अमरीका के आरोन राल्स्टन की आप बीती है.

बॉयल की पिछली फ़िल्म स्लमडॉग मिलेनियर ऐतिहासिक रूप से कामयाब रही थी और साथ ही आठ ऑस्कर जीतने में कामयाब रही थी, जिसमें दो ऑस्कर फ़िल्म के संगीत के लिये एआर रहमान को भी मिले.

127 आवर्स का संगीत भी प्रभाव पैदा करने में सफल होता दिख रहा है और इसको प्रतिष्ठित गोल्डन ग्लोब सम्मान में सर्वश्रेष्ठ मौलिक संगीत के लिये टॉप फ़ाइव में नामांकित भी किया जा चुका है. एआर रहमान का संगीतबद्ध और गाया गीत ’इफ़ आइ राइज़’ ऑस्कर के नामांकन के लिए भी शॉर्टलिस्ट हो चुका है.

Image caption पवन झा के मुताबिक़ रहमान एक बार फिर प्रभाव पैदा करने में सफल रहे हैं.

इन ख़बरों के बाद भारत में फ़िल्म की चर्चा बढ़ गई है. भारत में ये 28 जनवरी को प्रदर्शित की जा रही है और इसका संगीत हाल ही में रिलीज़ हुआ है.

साउंडट्रैक में कुल 14 गाने हैं जिनमें आठ रहमान ने तैयार किए हैं जबकि बाकी के गाने पुराने मशहूर ट्रैक्स हैं जो फ़िल्म में जगह-जगह इस्तेमाल किए गए हैं.

फ़िल्म के साउंडट्रैक में गीतों की गुंजाइश ना के बराबर है. वहीं पार्श्व-संगीत फ़िल्म के सबसे प्रबल पक्षों में से एक है.

रहमान के संगीत की बात करें तो ’द कैनयन’ एलबम में उनका पहला ट्रैक है. पहाड़ों के बेहद शांत माहौल और अकेलेपन का परिचय देता रहमान का ये ट्रैक, फ़िल्म के भयावह मगर ख़ूबसूरत वातावरण को प्रभावी रूप से स्थापित करता है.

’लिबरेशन’ ट्रैक को एलबम का थीम सॉन्ग कहा जा सकता है. ‘लिबरेशन’ तीन अलग-अलग ट्रैक्स (लिबरेशन बिगिन्स, लिबरेशन इन अ ड्रीम और लिबरेशन) के रूप में मौजूद है जो नायक की पांच दिन और 127 घंटों की जंग की तीन विभिन्न अवस्थाओं को प्रस्तुत करता है. तीनों ट्रैक्स में अंतिम ’लिबरेशन’ सबसे प्रभावी बन पड़ा है. रहमान का वाद्य संयोजन, फ़िल्म के सबसे रोमांचक क्षणों में पर्दे पर देखने लायक प्रभाव उत्पन्न करेगा इसकी उम्मीद की जा सकती है.

‘आर आइ पी’ में रहमान ने धीमी और शांत शुरुआत के साथ हर्षदीप कौर के स्वर समाहित किए हैं. ट्रैक के मध्य में संगीत अचानक गति पकड़ता है और असर छोड़ता है. ये ट्रैक फ़िल्म के नाटकीय मोड़ों का साक्षी होगा.

Image caption रहमान 'स्लमडॉग मिलेनियर' के लिए पहले ही ऑस्कर, गोल्डन ग्लोब और ग्रैमी पुरस्कार जीत चुके हैं.

रहमान ने फ़िल्म के संगीत में गिटार को मुख्य वाद्य के रूप में इस्तेमाल किया है.’टच ऑफ़ द सन’ पियानो के धीमे और शांत स्वरों से संयोजित किया गया है, साथ में चमगादड़ों की ध्वनियां ट्रैक को एक अनूठा वातावरण देती हैं.

‘एसिड दरबारी’ में रहमान ने राग दरबारी को आधार में लेते हुए भारतीय रंग के साथ एक अनूठी रचना प्रस्तुत की है. ये ट्रैक दर्द के स्वरों के साथ साथ उम्मीद के स्वर भी बखूबी उभारता है.

’इफ़ आइ राइज़’ फ़िल्म के क्लाइमेक्स का गीत है. फ़िल्म के लिए मूल रूप से लिखा गया ये गीत रहमान ने संगीतबद्ध किया है और ब्रिटेन की पॉप गायिका डीडो ने रहमान के साथ इसे गाया है.

ये एलबम की सबसे दमदार प्रस्तुति है. इसमें डीडो के साथ रहमान के स्वर, और बच्चों के कोरस का प्रयोग गीत को अलग आयाम देते हैं.

कुल मिलाकर देखा जाए तो रहमान ने फिर साबित किया है कि ‘स्लमडॉग मिलेनियर’ की कामयाबी कोई तुक्का मात्र नहीं थी और वे हॉलीवुड में एक स्थापित नाम बनने से बहुत दूर नहीं हैं.

छह जनवरी से ऑस्कर के टॉप फ़ाइव नामंकन की वोटिंग होगी और 25 जनवरी को तय होगा कि इस फ़िल्म में रहमान का गाया और संगीतबद्ध किया गाना ’इफ़ आइ राइज़’ ऑस्कर की दौड़ में है या नहीं. वहीं 16 जनवरी एक और महत्वपूर्ण दिन है जिस दिन पता चलेगा कि रहमान को ‘127 आवर्स’ के लिए दूसरी बार गोल्डन ग्लोब पुरस्कार मिलता है या नहीं.

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