मेरा तो काम ही दादागिरी का है

मुक्केबाज़ विजेन्दर सिंह
Image caption मुक्केबाज़ विजेन्दर सिंह का अगला लक्ष्य 2012 लंदन ओलंपिक खेल हैं.

बॉक्सिंग रिंग के अंदर अपने प्रतिद्वंद्वियों को मुक्कों से धाराशायी करने वाले मुक्केबाज़ विजेन्दर सिंह मानते हैं कि उनका काम दादागिरी का है.

ओलंपिक और विश्व पदक विजेता विजेन्दर सिंह ने ये बात दिल्ली में बुधवार को रियेल्टी शो ‘दादागिरी’ के नए सीज़न के लॉन्च पर कही.

ये पूछे जाने पर कि निजी ज़िंदगी में वो कितनी दादागिरी करते हैं, विजेन्दर ने हल्के-फुल्के अंदाज़ में कहा, “मेरा तो काम ही दादागिरी का है. बॉक्सिंग एक ‘रफ़ एंड टफ़’ खेल है इसलिए इसमें ज़्यादा दादागिरी दिखाई देती है लेकिन निजी ज़िंदगी में मैं ऐसा नहीं हूं.”

अगला लक्ष्य

नई दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य और उसके बाद गुआंगज़ाउ एशियन खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले विजेन्दर सिंह का अगला लक्ष्य 2012 लंदन ओलंपिक्स है.

फ़िलहाल आराम कर रहे विजेन्दर कहते हैं, “पिछली बार ओलंपिक में भारत का एक पदक था, इस बार कम-से-कम दो या तीन तो लेकर आएंगे.”

निकट भविष्य में विजेन्दर पहले नेशनल गेम्स और फिर उसके बाद सितम्बर में होने वाली विश्व चैंपियनशिप में हिस्सा लेंगे.

75 किलोग्राम वर्ग में विश्व में शीर्ष वरीयता प्राप्त विजेन्दर कहते हैं कि वो रैंकिंग नहीं बल्कि पदक के लिए खेलते हैं.

विजेन्दर सिंह चाहते हैं कि इस बार भारतीय क्रिकेट टीम विश्व कप जीते. भारतीय टीम के लिए उनका कहना था, “ले आओ वर्ल्ड कप, बहुत दिन हो गए देखे हुए. फ़ोटो देखी थी 1983 में कपिल देव की कप को पकड़े हुए.”

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