कुछ औसत, कुछ बेहतर गीतों का मेल: पटियाला हाउस

अनुष्का शर्मा और अक्षय कुमार
Image caption फ़िल्म 'पटियाला हाउज़' में पहली बार अक्षय कुमार और अनुष्का शर्मा एक साथ दिखेंगे.

फ़िल्म ‘पटियाला हाउस’ अभिनेता अक्षय कुमार और निर्देशक निखिल आडवाणी के लिये बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पहले इस जोड़ी का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट ’चांदनी चौक टू चाइना’ को दर्शकों ने बुरी तरह से नकार दिया था.

निखिल आडवाणी की फ़िल्मों (‘कल हो ना हो’, ‘सलाम-ए-इश्क़’, ‘चांदनी चौक टू चाइना’) में संगीत पक्ष एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है और इस बार फिर से संगीत की जिम्मेदारी शंकर-एहसान-लॉय की तिकड़ी को दी गई है.

फ़िल्म की कहानी लंदन में बसे एक पंजाबी परिवार और उसके विभिन्न किरदारों के सपनों, टकराव और उनके रिश्तों में चढ़ाव-उतार पर आधारित है.

फ़िल्म के साउंडट्रैक में सात मुख्य गीतों के साथ कुल 12 गाने हैं. फ़िल्म का परिवेश पंजाबी है इसके संगीत में पंजाबी तड़के का प्रभुत्व साफ़ दिखाई देता है. फ़िल्म में पारिवारिक उत्सव और जश्न के रंग में डूबे खुशनुमा थिरकाने वाले गीतों की प्रधानता है.

एल्बम की ज़ोरदार शुरुआत ’लौंग दा लश्कारा’ से होती है. हार्ड कौर अपने अनूठे अंदाज़ में ‘पटियाला हाउस’ में सुनने वालों का स्वागत करतीं हैं, मगर इस पार्टी सॉन्ग में अपनी गायकी से असली रंग जमाते हैं जस्सी. मस्ती और पंजाबी जोश से भरे पटियालवी गीत में महालक्ष्मी अय्यर भी मौजूद हैं मगर जस्सी सब पर हावी रहे हैं. शंकर-एहसान-लॉय ने आधुनिक वाद्य संयोजन में ढोल और लोक गायकी के अंदाज का अच्छा तालमेल प्रस्तुत किया है.

’क्यों मैं जागूं’ एल्बम का अगला गीत है. गीत का टैम्प्लेट और ग्राफ ’नमस्ते लंदन’ के ’मैं जहां रहूं, तेरी याद साथ है’ से बहुत प्रभावित लगता है. गीत की विशेषता है शफ़क़त अमानत अली की गायकी जो गीत को एक अलग स्तर पर ले जाने में कामयाब रही है. अन्विता दत्त गुप्तन के बोल भी प्रभावी हैं. उत्सव के माहौल से रंगे एल्बम में उदासी के स्वर एल्बम को नीरस होने से बचाते हैं.

’रोला पे गया’ उत्सव के माहौल में मेहंदी गीत है. ये शंकर-एहसान-लॉय की एक साधारण सी रचना है और वो अपनी पुरानी रचनाओं को दोहराते नज़र आते हैं. गीत कई सारे गायकों के बावजूद असर छोड़ने में नाकाम रहा है.

‘आदत है वो’ में मुख्य स्वर विशाल डडलानी का है जो समय के साथ एक गायक के रूप में भी पहचान बनाते जा रहे हैं. मगर एक अच्छी शुरुआत के बावजूद गीत पूरे तौर पर बहुत प्रभावी नहीं बन पड़ा है.

’बेबी वेन यू टॉक टू मी’ में नवीनता का अभाव है और शंकर-एहसान-लॉय संगीतकार के स्तर पर फिर से निराश करते हैं. गाने की धुन और शब्द दोनों साधारण हैं. रिमिक्स वर्शन शायद ‘डांस फ़्लोर्स’ पर कुछ दिनों तक सुनाई दे सकता है.

’तुम्बा तुम्बा तुड़क गया’ एल्बम की एक और कड़ी है. ऋषि कपूर, डिम्पल और परिवार के अन्य सदस्यों पर फ़िल्माए इस गीत में पारिवारिक उत्सव का माहौल है और गीत के तेवर, सरल और मधुर हैं. हंसराज हंस की गायकी इस सरल से, मगर मस्ती लिये गीत, को सुनने लायक बनाने में खासा योगदान करती है. बोल भी मज़ेदार हैं और उम्मीद की जा सकती है कि पर्दे पर ऋषि-डिम्पल की जोड़ी गीत का आकर्षण होगी.

‘अव्वल अल्लाह’ भक्ति रस के रंग की रचना है जिसे रिचा शर्मा ने अपनी गायकी से बखूबी निभाया है. इसके अलावा कुछ गीतों के रीमिक्स और अनप्लग्ग्ड ट्रैक्स भी हैं, मगर मुख्य गीतों से कुछ बहुत अलग पेश नहीं करते हैं.

कुल मिला कर ‘पटियाला हाउस’ का संगीत कुछ औसत, कुछ बेहतर गीतों का मेल है. शंकर-एहसान-लॉय ने नवीनता की बजाय अपनी पुरानी धुनों में ज़्यादा भरोसा जताया है. अन्विता दत्त गुप्तन के बोल कहीं कहीं पर प्रभावित करते हैं. संगीत, थीम-प्रधान होने की बजाय सहायक के रूप में प्रस्तुत हुआ है. फ़िल्म के संगीत में हिट होने के सभी तत्व मौजूद हैं मगर इसमें शक है कि गीत बहुत लंबे समय तक याद रखे जाएंगे.

रेटिंग : पांच में से ढाई अंक

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