सेंसर बोर्ड बिल्कुल बकवास चीज़ है: प्रकाश झा

निर्माता-निर्देशक प्रकाश झा
Image caption प्रकाश झा मानते हैं कि सेंसर बोर्ड बकवास चीज़ है.

निर्माता-निर्देशक प्रकाश झा मानते हैं कि सेंसर बोर्ड बकवास चीज़ है. वो कहते हैं कि सही-ग़लत का फ़ैसला दर्शकों पर छोड़ना चाहिए.

प्रकाश कहते हैं, “मेरा व्यक्तिगत विचार ये है कि सेंसर नहीं होना चाहिए, ‘सेंसर इज़ क्वाइट ए नॉन्सेंस’. दर्शकों को इस बाद की छूट होनी चाहिए कि वो ख़ुद ही फ़ैसला करें कि नैतिक रूप से क्या सही और क्या ग़लत है.”

अलंकृता श्रीवास्तव द्वारा निर्देशित, प्रकाश झा की फ़िल्म ‘टर्निंग 30’ 14 जनवरी को रीलीज़ हुई है. लेकिन सेंसर बोर्ड का कहना है कि फ़िल्म के प्रोमोज़ सेंसर बोर्ड के सर्टिफ़िकेट के बिना टीवी पर दिखाए जा रहे हैं.

सोमवार को मुम्बई में प्रकाश झा और अलंकृता श्रीवास्तव ने एक पत्रकार सम्मेलन कर इस आरोप को ग़लत बताया. उन्होंने कहा कि उनके पास सभी सर्टिफ़िकेट हैं.

प्रकाश झा ने कहा, “इस बात में कोई भी सच्चाई नहीं है कि हम चैनल्स पर वो प्रोमोज़ दिखा रहे हैं जिन्हें सेंसर बोर्ड ने पास नहीं किया है. हमें एक भी वो सीन दिखाइए जो टीवी पर दिखाया जा रहा है और जिसे सेंसर बोर्ड ने पास न किया हो. आपको लगता है कि कोई भी चैनल ऐसा कोई भी प्रोमो दिखाएगा जो सेंसर ने पास न किया हो. आप जानते हैं कि कोई भी प्रोमो सेंसर सर्टिफ़िकेट के बिना रीलीज़ नहीं हो सकता.”

इस बारे में अलंकृता श्रीवास्तव ने कहा, “हमने सबसे पहले जो प्रोमो दिया था, उसमें एक भी सीन या डायलॉग बदले बिना ‘यू’ सर्टिफ़िकेट मिला था लेकिन बाद में कुछ वही सीन या डायलॉग वाले दूसरे प्रोमोज़ पर आपत्ति जताई गई.”

Image caption सेंसर बोर्ड का कहना है कि 'टर्निंग 30' के प्रोमो सेंसर सर्टिफ़िकेट के बिना टीवी पर दिखाए जा रहे हैं.

उन्होंने आगे कहा, “मेरा मानना है कि सेंसर बोर्ड के दृष्टिकोण में कोई समानता नहीं है. अलग-अलग मामलों में सेंसर बोर्ड अलग-अलग निर्णय लेता है. जैसे ‘शीला की जवानी’ गाने में सेक्सी शब्द है लेकिन हमें कहा गया कि हमारे प्रोमोज़ पास नहीं किए जाएंगे क्योंकि ‘टर्निंग 30’ के टाइटिल ट्रैक में सेक्सी शब्द है.”

वैसे प्रकाश झा की एक और फ़िल्म ‘ये साली ज़िंदगी’ के बारे में भी चर्चा है कि सेंसर बोर्ड को साली शब्द पर आपत्ति है और वो चाहता है कि फ़िल्म का नाम बदला जाए.

इस बारे में प्रकाश का कहना था, “साली शब्द का इस्तेमाल किसी व्यक्ति के लिए नहीं बल्कि ज़िंदगी के लिए हुआ है. इससे पहले इससे भी ज्यादा आपत्तिजनक और गंदे शब्दों का फ़िल्मों के नाम में इस्तेमाल हो चुका है. इसका सेंसर सर्टिफ़िकेट एक अक्तूबर को पास हो चुका है. तब से अब तक कुछ भी नहीं कहा गया और फ़िल्म अब रीलीज़ की कगार है तो अब टाइटिल बदलने के लिए कहा जा रहा है जो अब मुमकिन नहीं है.”

लेकिन इन विवादों के बावजूद प्रकाश झा नहीं मानते कि सेंसर बोर्ड ख़ास उनके साथ ही ऐसा बर्ताव कर रहा है. उनका कहना था, “मुझे नहीं लगता कि ख़ास मेरी फ़िल्मों के साथ ही ऐसा किया जा रहा है. ये महज़ इत्तेफ़ाक है कि दोंनो फ़िल्में के साथ एक साथ ऐसा हो रहा है. ‘राजनीति’ में थोड़ी मुश्किल हुई थी लेकिन उसके पहले मेरी किसी भी फ़िल्म में कभी कोई दिक्कत नहीं हुई.”

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