'हज़ारों बरस में पैदा होता है भीमसेन जोशी सरीखा कलाकार'

पंडित भीमसेन जोशी
Image caption पंडित भीमसेन जोशी के निधन से संगीत जगत में शोक की लहर दौड़ गई.

प्रख्यात शास्त्रीय गायक भारत रत्न पंडित भीमसेन जोशी के निधन से संगीत जगत में शोक की लहर दौड़ गई.

मशहूर बांसुरी वादक पंडित हरिप्रसाद चौरसिया ने बीबीसी से बात करते हुए कहा, "वो भारतीय संगीत जगत के इतिहास पुरुष थे. वो संतों जैसे थे. उनके जैसे कलाकार तो हज़ारों साल में एक बार पैदा होते हैं."

पंडित हरिप्रसाद ने बताया कि इतने बड़े कलाकार होने के बावजूद भीमसेन जोशी बहुत सादा जीवन बिताते थे. वो किसी की बुराई नहीं करते थे. उन्हें मौजूदा दौर के संगीत से भी कोई शिकायत नहीं थी.

अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त सरोद वादक उस्ताद अमजद अली ख़ान ने पंडित भीमसेन जोशी से उनके निधन से एक दिन पहले ही मुलाकात की थी.

उनको याद करते हुए अमजद अली कहते हैं, "उनकी हालत इतनी ख़राब हो गई थी कि वो शायद ख़ुद ही ये दुनिया छोड़कर जाना चाहते थे. मेरे 49वें जन्मदिन पर उन्होंने मेरे घर पर गायन किया था. जब मैं पुणे जाता था तो उनके घर पर ही मेरा खाना होता था. जब वो दिल्ली आते थे, तो मेरे घर ज़रूर आते थे. वो अपने आप में एक संस्था थे."

उस्ताद अमजद अली ख़ान ने बताया कि पंडित भीमसेन जोशी ने उनके पिता से संगीत की शिक्षा ली और इस दौरान वो तीन साल तक उनके ग्वालियर स्थित घर में भी रहे.

गायक और संगीतकार शंकर महादेवन के मुताबिक पंडित भीमसेन जोशी के निधन से भारतीय संगीत का एक मज़बूत स्तंभ गिर गया है. वो कहते हैं, "जैसे ताजमहल भारत की राष्ट्रीय धरोहर है, वैसे ही पंडित जी भी हमारी धरोहर थे. भारतीय शास्त्रीय संगीत की बात होती है तो सबसे पहले उन्हीं का नाम ज़ेहन में आता है."

शंकर महादेवन जब सिर्फ़ 11 साल के थे तब उन्होंने पंडित भीमसेन जोशी के एलबम 'राम श्याम गुणगान' में वीणा बजाई थी. वो कहते हैं, "मेरे करियर की तो शुरुआत ही भीमसेन जोशी के आशीर्वाद से हुई. वो जहां भी होंगे वहां से हमें और समूचे भारतीय संगीत को अपना आशीष देते रहेंगे."

जाने-माने फ़ोटोग्राफ़र रघु राय कहते हैं कि पंडित भीमसेन जोशी जैसा ना कोई हुआ ना होगा. रघु राय ने भीमसेन जोशी के जीवन को तस्वीरों के ज़रिए एक किताब में पेश किया है.

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