'ख़ूबसूरत लड़कियों के पीछे भागते हैं पुरुष'

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Image caption (बाएं से) श्रद्धा दास, कुमार मंगत, मधुर भंडारकर, अजय देवगन और इमरान हाशमी.

अभिनेता अजय देवगन मानते हैं कि पुरुष कभी परिपक्व नहीं होते और बार-बार एक ही ग़लती दोहराते रहते हैं.

अपनी आने वाली फ़िल्म 'दिल तो बच्चा है जी' के प्रमोशन पर मीडिया से बात करते हुए अजय ने कहा, "सभी पुरुषों का दिल बच्चों जैसा ही होता है. हम सभी ख़ूबसूरत लड़कियों के पीछे हमेशा भागते रहते हैं."

अजय ने कहा कि फ़िल्म का टाइटल 'दिल तो बच्चा है जी' इसलिए रखा गया क्योंकि सभी का दिल बच्चों जैसा होता है और सभी किसी भी चीज़ को पाने के लिए ज़्यादातर वक़्त बच्चों जैसी ज़िद करते रहते हैं.

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Image caption अभिनेत्री श्रद्धा दास (बाएं) और शाज़ान पद्मसी.

फ़िल्म के निर्देशक मधुर भंडारकर हैं. उनके साथ काम करने के अनुभव को अजय यादगार बताते हैं. अजय कहते हैं, "मधुर का सेंस ऑफ़ ह्यूमर कमाल का है. वो बेहद मज़ाकिया हैं. और जब आप फ़िल्म देखेंगे तो मेरी बात को बिलकुल सही पाएंगे."

अपने किरदार के बारे में अजय देवगन कहते हैं, "मैं इस फ़िल्म में एक 38-39 साल के आदमी का किरदार निभा रहा हूं, जिसका तलाक होने वाला है. अचानक उसकी मुलाकात एक 18-20 साल की लड़की से हो जाती है और फिर वो उसे इंप्रेस करने के लिए 20 साल का लड़का दिखने की कोशिश करने लगता है."

फ़िल्म में इमरान हाशमी और थ्री इडियट्स में चतुर का किरदार निभा कर ज़बरदस्त मशहूर हुए ओमी वैद्य भी हैं.साथ ही श्रुति हसन, श्रद्धा दास और शाज़ाऩ पद्मसी इस फ़िल्म की अभिनेत्रियां हैं.

ओमी बताते हैं, "जब मधुर ने मुझे इस फ़िल्म का ऑफ़र दिया तो मुझे लगा कि मेरी हिंदी तो कमज़ोर है. मैं कैसे ये किरदार निभा पाऊंगा. लेकिन मधुर जी को मुझ पर पूरा यक़ीन था. इस वजह से मैं ये रोल कर पाया."

सेंसर बोर्ड ने इस फ़िल्म को ए सर्टिफ़िकेट दिया है. निर्देशक मधुर भंडारकर ने बताया कि सेंसर बोर्ड ने उनसे कहा था कि फ़िल्म में करीब 12 कट लगाने होंगे तब जाकर इसे यूए सर्टिफ़िकेट दिया जाएगा.

मधुर कहते हैं, "मुझे लगा कि इतने कट्स के बाद फ़िल्म की कहानी को नुकसान पहुंचेगा. तब हम इसे ए सर्टिफ़िकेट के साथ रिलीज़ करने को मान गए."

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