'ये भारतीय सिनेमा का सबसे अच्छा दौर है'

  • 3 मार्च 2011
अनुमप खेर
Image caption अनुपम खेर जल्द ही 'ये फ़ासले' नाम की फ़िल्म में नज़र आएंगे.

अभिनेता अनुपम खेर ने अपने 25 सालों से लंबे करियर में ढेरों फ़िल्में की हैं. लेकिन वो मौजूदा दौर को भारतीय सिनेमा का सबसे बेहतर समय बताते हैं.

अनुपम खेर कहते हैं, "अब फॉर्मूले से हटकर जो फ़िल्में बन रही हैं वो भी दर्शकों को पसंद आ रही हैं. खोसला का घोसला, अ वेडनसडे, उड़ान, फंस गए रे ओबामा जैसी फ़िल्में हिट हो रही हैं. मुझे ख़ुशी है कि मैं इस दौर में काम कर रहा हूं और उम्मीद है कि अगले 20-22 सालों तक काम करता रहूंगा."

अनुपम ने अपनी आने वाली फ़िल्म 'ये फ़ासले' के बारे में पत्रकारों से बात करते हुए ये बातें कहीं.

अनुपम के मुताबिक़ आज लोगों के पास मनोरंजन के बहुत सारे साधन हो गए हैं. तो उन्हें आप कुछ भी नहीं दिखा सकते.

वो कहते हैं, "दर्शक तो राजा बनकर सिनेमाहॉल में आता है और कहता है दिखाओ भैया, क्या बनाया है तुमने. देखें कितना दम है तुम्हारी फ़िल्म में."

आजकल अनुपम फ़िल्मों में उतने ज़्यादा नज़र नहीं आते, जितना कभी आते थे. अनुपम ने इसकी वजह बताई, "ज़िंदगी के हर मोड़ पर इंसान का नज़रिया बदलता है. मैं आज उस तरह से काम नहीं कर सकता जैसे 10 साल पहले करता था. जो रोल मैं कर चुका हूं, उस तरह के किरदार दोबारा करने का कोई मतलब नहीं है."

अनुपम ने बीते कुछ सालों में दिबाकर बनर्जी, नीरज पांडे और अयान मुखर्जी जैसे नए निर्देशकों के साथ काम किया है.

वो कहते हैं, "मुझे नए लोगों के साथ काम करना बहुत अच्छा लगता है. वो अपने काम के प्रति बेहद समर्पित रहते हैं और बड़े जुनून से काम करते हैं. जबकि तथाकथित बड़े फ़िल्मकारों की फ़िल्मों में आजकल मुझे मन माफ़िक रोल नहीं मिलते, तो मैं नहीं करता हूं."

'ये फ़ासले' की कहानी बाप-बेटी के रिश्ते पर आधारित है. इसमें अनुपम एक ऐसा किरदार निभा रहे हैं जो बहुत गुस्सैल और महत्तवाकांक्षी है लेकिन साथ ही अपनी बेटी से बहुत प्यार करता है.

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