दम मारो दम : नया नौ दिन पुराना सौ दिन

दीपिका पादुकोण
Image caption फ़िल्म का टाइटल ट्रैक दीपिका पादुकोण पर फ़िल्माया गया है.

'दम मारो दम' बॉलीवुड की इस मौसम की सबसे बड़ी फ़िल्मों में से एक है.

रोहन सिप्पी निर्देशित इस फ़िल्म का निर्माण रमेश सिप्पी के साथ फ़ॉक्स स्टार स्टूडियो कर रहा है.

फ़िल्म एक क्राइम थ्रिलर है जिसकी पृष्ठभूमि में गोवा और ड्रग माफ़िया है. इसका संगीत प्रीतम ने दिया है और गीतकार जयदीप साहनी हैं जो रोहन सिप्पी के लिए उनकी पिछली फ़िल्म ब्लफ़ मास्टर में भी कुछ मज़ेदार गीत लिख चुके हैं.

फ़िल्म के साउंडट्रैक में कुल आठ ट्रैक्स हैं जिनमें अकेले 'ते अमो' चार संस्करणों में मौजूद है.

फ़िल्म की पृष्ठभूमि में ड्रग्स माफ़िया है, इसलिए रोहन सिप्पी ने फ़िल्म का टाइटल आरडी बर्मन रचित चालीस वर्ष पहले की फ़िल्म 'हरे रामा हरे कृष्णा' के सुपर हिट गीत 'दम मारो दम' से प्रतीकात्मक रूप से लिया है और इस नई फ़िल्म का शीर्षक थीम गीत भी उसी गीत पर आधारित है.

प्रीतम ने जयदीप साहनी के नए बोलों के साथ पंचम के गीत का मूल हुक लेकर रीमिक्स का स्वरूप दिया है.

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Image caption अभिषेक बच्चन ने फ़िल्म में एक रैप गीत गाया है.

अनुष्का मनचंदा के स्वर और जयदीप साहनी के बोल, दम लेने वाली पीढ़ी के आक्रामक तेवर और कुंठाओं से परिचय कराते हैं. साथ ही उसका प्रतिनिधित्व करते भी दिखाई देते हैं इसीलिये कहीं न कहीं शालीनता की हद से बाहर भी निकलते हैं.

अनुष्का ने अपनी तरफ़ से गीत को एक चरित्र प्रदान करने की अच्छी कोशिश की है मगर उनकी तुलना आशा भोसले या उषा उत्थप से करना बेमानी होगी.

मिडिवल पंडित्ज़ और कर्ष काले ने रीमिक्स मे कुछ नए रंग भरने की कोशिश की है और गीत निस्संदेह इस दौर में एक चार्ट बस्टर साबित होगा, मगर फिर भी इसका श्रेय मूल पंचम के गीत की धुन और लोकप्रियता को जाना चाहिए.

रीमिक्स गीत मूल गीत जितना असर छोड़ने में नाकामयाब रहा है क्योंकि मूल गीत अपने आप में एक मील का पत्थर है और अपने आप में एक वक्तव्य है, जबकि 'दम मारो दम' का ये गीत एक हिट क्लब डांस से ज्यादा बड़ी जगह नहीं बना पाएगा.

'ते अमो' एलबम का अगला गीत है. ये एक रोमांटिक, खुशनुमा सा गीत है. मुख्य गीत ऐश किंग और सुनिधि चौहान के स्वरों में युगल गीत है मगर जो संस्करण सबसे ज़्यादा प्रभावित करता है वो सुनिधि चौहान का एकल संस्करण.

एक संस्करण मोहित चौहान के स्वर में भी है मगर उनका 'नेज़ल टोन' अब दोहराव का शिकार होता जा रहा है.

'ते अमो' स्पेनिश शब्द हैं और जयदीप साहनी ने बोलों में कहीं रेहाना के प्रसिद्ध पॉप गीत 'ते अमो' की लोकप्रियता को भुनाने की कोशिश की है. धुन और संयोजन के स्तर पर प्रीतम भी अपने आप को दोहराते नज़र आते हैं.

असम से आए नए गायक पैपन के गंभीर स्वर एलबम की अगली प्रस्तुति 'जिए क्यूं' को प्रभावी बनाने में सबसे ज़्यादा सहयोग देते हैं. गीत एक कविता के रूप में शुरु होकर बाद में जाकर एक पूरे रॉक गीत का स्वरूप ले लेता है.

Image caption पवन झा के मुताबिक संगीतकार प्रीतम अपनी ही धुनों को दोहराते नज़र आते हैं.

जयदीप के बोल और प्रीतम का संयोजन गीत को बेहतर प्रभाव देने में कामयाब रहे हैं. प्रीतम पहले भी इस किस्म के स्वरों में 'गैंग्स्टर' में बांग्लादेशी गायक जेम्स को लाए थे और उनकी नई खोज पैपन भी अपनी गायकी से प्रभावित करते हैं. कुल मिलाकर एलबम की अच्छी प्रस्तुति है 'जिये क्यूं'.

एलबम की एक और प्रस्तुति है 'जाना है' ज़ुबीन गर्ग के स्वरों में प्रीतम के चिर-परिचित टैम्पलेट से निकला हुआ गीत है. धुन और संयोजन के स्तर पर नवीनता नहीं है मगर ज़ुबीन अपनी गायकी से गीत में जान डालने की कोशिश करते हैं मगर फिर भी गीत एक साधारण प्रस्तुति से ऊपर नहीं उठ पाया है.

रोहन सिप्पी की पिछली निर्देशित फ़िल्म ब्लफ़मास्टर में अभिषेक बच्चन का गाया रैप बहुत लोकप्रिय हुआ था, यही देखते हुए इस बार भी एलबम में अभिषेक बच्चन का एक रैप गीत रखा गया है 'ठांय ठांय'.

गीत में लोकप्रिय होने के सभी तत्वों को समाहित किया गया है, ख़ासकर जयदीप साहनी के 'वन लाइनर्स' और स्लैंग.. अभिषेक बच्चन रैप को अच्छी तरह से निभा गये हैं और रैप में उनका साथ अर्ल और आयुष फुकन ने बखूबी दिया है. गीत फ़िल्म के प्रचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा इसमें कोई दो राय नहीं है.

कुल मिलाकर 'दम मारो दम' में जितना दम है उसमें बहुत कुछ पंचम के मूल गीत का योगदान है.

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Image caption पवन झा 'दम मारो दम' के संगीत को देते हैं पाँच में से ढाई नंबर.

टाइटल गीत की युवा वर्ग में लोकप्रियता संदेह से परे है. ख़ासकर टीवी के पर्दे पर, और डांस क्लब्स में कुछ महीनों तक इसकी धूम रहेगी.

अभिषेक के रैप का भी फ़िल्म के प्रचार में बड़ा योगदान रहेगा. मगर इनके अतिरिक्त प्रीतम बहुत हद तक अपने पुराने गीतों को ही दोहराते नज़र आ रहे हैं.

जयदीप साहनी से बहुत उम्मीदें थीं मगर वे भी उम्मीद के स्तर तक नहीं पहुंच पाये हैं.

निर्माताओं को शुक्र मनाना चाहिये चालीस वर्ष पहले गढ़े गये 'दम मारो दम' के जादू का जो कि अपनी धुन और लोकप्रियता के दम पर इस 'दम मारो दम' के संगीत को हिट कराने में सक्षम है.

रेटिंग के लिहाज़ से 2.5/5 (पाँच मे से ढाई)

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