'दम मारो दम' का निकला दम: पलाश सेन

दीपिका पादुकोण
Image caption दम मारो दम के रीमिक्स में थिरकती दिखाई दे रही हैं दीपिका

हिंदी फ़िल्म जगत में पुराने गानों को नए अंदाज़ में पेश करना कोई नयी बात तो नहीं है. लेकिन गायक पलाश सेन कहते हैं कि पुराने गानों को रीमिक्स करना इस बात का सबूत है की संगीतकारों के पास कुछ नया पेश करने को बचा नहीं है इसलिए वो पुराने अच्छे गानों को तोड़ मोड़ के अभद्र तरीके से पेश कर रहे हैं.

‘प्यार दो प्यार लो’ और ‘दम मारो दम’ जैसे पुराने और प्रचिलित गाने हाल में सुनाई तो दिए लेकिन उनका नया परिवेश ज्यादा किसी को भाया नहीं.

इन गानों के बारे में जो आम राय बनी वो यही थी कि ये गाने मर्यदा कि हर सीमा के परे हैं.

खुद पलाश सेन कहते हैं कि दम मारो दम जैसे बेहतरीन गाने को इतना अशलील तरीके से कम्पोस किया गया है कि उसे देखने या सुनने का मन भी नहीं करता. पलाश कहते हैं कि अगर संगीतकार पुराने गानों को रीमिक्स करना ही चाहते हैं तो अच्छे तरीके से करना चाहिए.

पलाश कहते हैं कि इंसान होने के नाते हमारे पास दिमाग कि कमी नहीं है. नए और अच्छे गाने हैं. पलाश कहते हैं कि वो सभी संगीतकारों से यही कहना चाहेंगे कि नए गाने बनाये, किसी और के गानों को रीमिक्स कर पेश करने में क्या बड़ी बात है.

नयी दिल्ली में आई पी एल कि टीम डेली डेयरडेविल्स के थीम सॉंग 'जियो दिल्ली' के लौंच के मौके पर पहुचे पलाश से जब बीबीसी ने पुछा कि क्या पुराने गानों को बिल्कुल रीमिक्स नहीं किया जाना चाहिए?

इस सवाल के जवाब में पलाश कहते हैं कि अगर पुराने गानों को रीमिक्स करना ही है तो ढंग से करें. साथ ही वो गायक नीरज श्रीधर का उदाहरण देते हुए कहते हैं कि नीरज भी रीमिक्स बनाते थे लेकिन वो पुराने गानों में अपनी तरफ से भी कुछ नया करते थे. लेकिन आजकल जो ट्रेंड चल रहा है उन गानों में कुछ समझ नहीं आता और न ही इन गानों में कोई भाव है.

पलाश कहते हैं कि फ़िल्म जगत में ए आर रहमान और शंकर महादेवन जैसे प्रतिभावान संगीतकार भी हैं जो अच्छा काम कर रहे हैं. साथ ही पलाश कहते हैं कि अच्छे संगीत की थोड़ी ज़िम्मेदारी फ़िल्म निर्मातों और संगीत कंपनियों की भी बनती है. उन्हें ख़राब संगीत को बढ़ावा नहीं देना चाहिए.

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