शोर इन द सिटी- एक संगीतमय एलबम

  • 12 अप्रैल 2011
शोर इन द सिटी इमेज कॉपीरइट pr
Image caption तुषार कपूर की मुख्य भूमिका वाली इस फ़िल्म में सचिन-जिगर का संगीत है.

नवोदित संगीतकार जोड़ी सचिन-जिगर की पिछली सफल फ़िल्म 'फ़ालतू' के संगीत का शोर अभी थमा नहीं था कि वे अपनी अगली फ़िल्म के साथ हाज़िर हैं - 'शोर इन द सिटी'.

फ़िल्म एकता कपूर प्रोडक्शन की अगली प्रस्तुति है. एक ब्लैक कॉमेडी है जिसका निर्देशन, निर्देशक जोड़ी राज-कृष्णा कर रहे हैं जिनकी पिछली फ़िल्म '99' पसंद की गई थी.

'शोर इन द सिटी' एलबम में सचिन-जिगर के अतिरिक्त संगीतकार हरप्रीत रचित गीत भी शामिल हैं और गीतकार हैं समीर और प्रिया पांचाल.

एलबम में में 5 मुख्य ट्रैक हैं. संगीत सोनी म्यूजिक ने जारी किया है और अपने लोकप्रिय ग़ैर-फ़िल्मी एलबमों के तीन बोनस ट्रैक्स भी इसमें शामिल किये हैं.

इमेज कॉपीरइट official website
Image caption एलबम के पहले गीत 'साइबो' में श्रेया घोषाल के बेहद मधुर स्वर हैं.

एलबम को एक अच्छी शुरुआत मिलती है "साइबो" से जिसे श्रेया घोषाल के साथ तोची रैना ने गाया है. सचिन-जिगर की धुन मधुर है और वे पियानो के बेस पर गीत में एक रोमांटिक वातावरण गढ़ने में कामयाब रहे हैं.

श्रेया घोषाल की मिठास के साथ तोची के भिन्नता लिए स्वर इस युगल गीत को असर देते हैं. एलबम में ये गीत रीमिक्स संस्करण में भी है मगर मुख्य संस्करण की मधुरता के आगे फ़ीका सा लगता है.

एलबम की अगली प्रस्तुति, "शोर", फ़िल्म का थीम गीत है जिसे 'अग्नि' बैंड के मोहन ने स्वर दिये हैं. सचिन-जिगर का वाद्य संयोजन प्रभावी है और मोहन की जोश भरी गायकी गीत को उचित मूड देने में कामयाब रही है.

आधुनिक संयोजन के साथ सितार का फ़्यूज़न प्रभावी है हालांकि कहीं ना कहीं 'स्लमडॉग मिलिनियर' के "मौसम एंड एस्केप" थीम की याद दिलाता है. फ़िल्म के कथानक में किसी महत्वपूर्ण मोड़ पर गीत परदे पर ज़रूरी माहौल रचने में सहायक हो सकता है.

इमेज कॉपीरइट pr

"धीम धीम ताना" संगीतकार हरप्रीत की प्रस्तुति है जिसे श्रीराम अय्यर ने स्वर दिये हैं. रैप मिश्रित इस रचना में थोड़ी नवीनता है और लिरिकल टैम्प्लेट मज़ेदार है.

श्रीराम अय्यर ने गाया अच्छा है और गीत एलबम को विविधता प्रदान करता है. मगर फिर भी बहुत कुछ खास पेशकश नहीं है.

फ़िल्म की थीम पर ही आधारित एक और प्रस्तुति है "कर्मा इज़ अ बिच". सचिन जिगर ने रॉक को अधार लेकर ये गीत रचा है जिसे सूरज जगन ने गाया है साथ में स्वर दिये हैं प्रिया पांचाल और स्वाति मुकुंद ने.

समीर के बोल तीखे तेवर लिये हुए हैं और कथानक में किरदारों की असफलताओं पर व्यंग्य करते नज़र आते हैं. रैप का मिश्रण गीत को मज़ेदार माहौल देता है. गीत युवाओं में लोकप्रिय होने की पूरी गुंजाइश रखता है.

इन गीतों के अतिरिक्त एलबम में तीन बोनस ट्रैक्स शामिल हैं, रूप कुमार राठौड़ के स्वर में "सांवरे", हरप्रीत की एक और रचना जो कुछ वर्ष पूर्व एलबम 'तेरी जुस्तजू' में शामिल थी.

'अग्नि' बैंड का "उजले बाज के सपनों" और कैलाश खेर का "बबम बम लाहिरी" भी पहले से लोकप्रिय रचनाएं हैं पर एलबम को और सुनने लायक बनाते हैं.

कुल मिलाकर 'शोर इन द सिटी' में शोर हावी नहीं है.

सचिन जिगर शुरुआत में राजेश रोशन और प्रीतम के सहायक रहे हैं और राजेश रोशन की लय और प्रीतम के संगीत संयोजन को आधार लेकर अपने संगीत से प्रभावित करते हैं.

"साइबो" और "कर्मा" लोकप्रिय होने की पूरी संभावना रखते हैं.

नंबरों के लिहाज़ से 'शोर इन द सिटी' के संगीत को पाँच मे से तीन (3/5).

संबंधित समाचार