फ़िल्मी सितारों से बड़े और भी हैं 'सितारे'

  • 26 अप्रैल 2011
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Image caption कृष की पटकथा लिखने वालों में सचिन भौमिक शामिल थे

कृष, कोई मिल गया, ताल, कर्ज़, गोलमाल, आराधना, एन ईवनिंग इन पेरिस, ब्रह्मचारी... ऐसी कई बेहतरीन फ़िल्मों के पटकथा लेखक सचिन भौमिक की कुछ दिन पहले मौत हो गई. चंद अख़बारों में ख़बर आई और दब गई. भला भारत में पटकथा लेखक का रुतबा इतना बड़ा कहाँ कि उसे अख़बरों, टीवी की सुर्ख़ियों में उपयुक्त जगह मिले?

भारतीय सिनेमा का दुर्भाग्य रहा है कि यहाँ स्टार कल्चर इस कदर हावी रहा है कि सितारों की चकाचौंध में अकसर उन स्तंभों को भुला दिया जाता है जिनकी कलम, लेखनी, गीतों और संगीत की मदद से कोई भी फ़िल्म बुलंदियों तक पहुंचती है.

कई लोग पूछेंगे सचिन भौमिक कौन?... फ़िल्म कृष में ऋतिक रोशन का सुपरहीरो किरदार लोगों को ज़रूर याद होगा, गोलमाल में लक्ष्मणप्रसाद-रामप्रसाद बने अमोल पालेकर का किरदार याद होगा. ऐसे कितने ही किरदारों में जान डालने का काम किया है पटकथा लेखक सचिन भौमिक ने.

सचिन भौमिक कोई मामूली फ़िल्मी हस्ती नहीं थे. 60 के दशक से लेकर 21वीं सदी के पहले दशक तक उन्होंने बेमिसाल पटकथाएँ लिखीं.

बलराज साहनी, शम्मी कपूर, अमिताभ बच्चन और ऋषि कपूर से होते हुए ऋतिक रोशन तक.... तो नासिर हुसैन, ऋषिकेश मुखर्जी, शक्ति सामंत, यश चोपड़ा और सुभाष घई से लेकर राकेश रोशन तक सबके लिए उन्होंने काम किया.

किसी भी अच्छी फ़िल्म का दिल और जान होती है अच्छी पटकथा. पटकथा की अहमियत का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अच्छे पटकथा लेखकों के अभाव को कई बड़े निर्देशक भारतीय सिनेमा की बड़ी कमी मानते हैं.

सितारों से बड़ा सितारा

1958 में सचिन भौमिक ने बलराज कपूर- नगरिस अभिनीत लाजवंती की पटकथा से करियर की शुरुआत की. उसके बाद से बड़े-बड़े सितारों की किस्मत को उन्होंने अपनी लेखनी से बुलंद किया.

फ़िल्म 'गोलमाल' में लक्ष्मणप्रसाद- रामप्रसाद बने अमोल पालेकर और भवानी शंकर बने उत्पल दत्त का गड़बड़झाला किसे याद नहीं. इसी पटकथा लिखने का श्रेय सचिन भौमिक को जाता है.

अमिताभ बच्चन ने भी टि्वटर पर अपने करियर में सचिन भौमिक की भूमिका को याद किया है. अमिताभ की 'बेमिसाल', 'दो और दो पाँच' सचिन भौमिक की ही देन हैं. शम्मी कपूर के लिए 'एन ईवनिंग इन पेरिस' और 'ब्रह्मचारी' की पटकथा लिखी तो ऋषि कपूर के लिए 'कर्ज़' और 'खेल खेल में' जैसी फ़िल्में लिखकर रूमानियत का नया दौर लेकर आए सचिन भौमिक .

आन मिलो सजना, आई मिलन की बेला, अनुराधा, लव इन टोक्यो, अराधना, कर्मा या आधुनिक दौर में सोल्जर, मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी, ताल, कोई मिल गया और कृष...फ़ेहरिस्त काफ़ी लंबी है.

हॉलीवुड या अन्य विदेशी भाषा की फ़िल्मों में सितारों के अलावा लेखक, निर्देशक भी उतने ही बड़े हीरो होते हैं. स्लमडॉग मिलियनेयर हिट हुई तो इसका बड़ा श्रेय पटकथा लिखने वाले साइमन बूफ़ॉय को दिया गया.

लेकिन भारतीय सिनेमा में ऐसी परिपक्वता कम ही देखने को मिलती है. यहाँ सितारों का बोलबाला है, धुरी उनके ईर्द-गिर्द घूमती है. यहाँ फ़िल्मी सितारे उन लोगों की चमक धुँधली कर देते हैं जो अपनी लौ देकर इनमें रोशनी भरते हैं. पटकथा लेखक सचिन भौमिक भी ऐसी ही हस्ती थे.

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